Wednesday, 21 April 2021

Dashrath majhi : दशरथ माझी

खरी खरी 833 : आज दशरथ माझी की बात

       आज दिल्ली लौकडाउन का दूसरा दिन है । कोरोना वायरस से देश का पूरा तंत्र लड़ रहा है  । हमारा सहयोग यह है कि हम घर में रहें, बाहर न निकलें । इस वक्त यही हम सबकी बहुत बड़ी जिम्मेदारी है कि हम सरकार के निर्देशों का पालन करें और स्वयं को घर में बंद करें तथा करोना से लड़ रहे कर्मवीरों को शुभकामनाएं प्रेषित करें । वीडियो के माध्यम से आज कुछ बातें दशरथ माझी के एक ऐसे संकल्प की आपके सम्मुख हैं जिसने उन्हें अमर कर दिया । उसी संकल्प से कुछ लोग प्रेरणा लेते हैं । हमारे देश को भी आज वीर दशरथ माझी जैसे ही एक संकल्प की सख्त आवश्यकता है ।

            कुछ लोग लाकडाउन को मजाक समझ रहे हैं और बेवजह इधर - उधर घूम रहे हैं। खुद तो घूम रहे हैं दूसरों को भी बुला रहे हैं। अपने घर के पास ही घूमना चाहिए या घर में ही होगा करना चाहिए । ऐसे लोगों की वजह से आज देश और दिल्ली का बुरा हाल हो गया है। समझदार बनो, दुर्योधन और गांधारी मत बनो। बाद में पछताने से क्या होगा ?

पूरन चन्द्र कांडपाल
21.04.2021

Aaj Ram ki baat : आज राम की बात

खरी खरी - 832 : आज राम की बात

    आज राम जी के बारे में बहुत बड़े लेख की जरूरत नहीं है क्योंकि राम जी के बारे में हम सब जानते हैं । हम प्रतिवर्ष रामलीला भी देखते हैं, सुन्दर कांड का पाठ भी करते-सुनते हैं और यदाकदा राम कथा भी सुनते हैं । राम जी के बारे में जानते तो हैं परन्तु उनके बताए मार्ग पर नहीं चलते । राम जी की तरह हम निषाद- सबरी को गले नहीं लगाते । हम पर्यावरण पर भी ध्यान नहीं दे रहे और न हमें उस राम-राज्य की चिंता है जिस में सामाजिक न्याय और सामाजिक सौहार्द को प्रमुखता दी जाती थी । राम- भक्त हनुमान जी की तरह हम में सेवा -भाव भी नहीं है । हो सके तो इस पर विनम्रता से मंथन करें क्योंकि राम जी संयम, विनय, सामंजस्य, सौहार्द, मर्यादा, शिष्टाचार तथा कर्म के प्रतीक हैं  । यह गीत भी हमें यही शिक्षा दे रहा है -

'देखो वो दिवानों
तुम ये काम न करो,
राम का नाम
बदनाम न करो ।'

     दो दिन के सप्ताहांत कर्फ्यू के बाद दिल्ली में कोरोना लौकडाउन का आज पहला दिन है । दिल्ली में अभी 20 से 26 अप्रैल 2021 तक 6 दिन का लाकडाउन घोषित किया है। संक्रमण ने देश और दिल्ली में बेहद भयंकर रूप धारण कर लिया है। उधर कुंभ और चुनाव रैलियां जारी हैं। यह अच्छी बात है कि कुछ दलों ने रैलियां नहीं करने की घोषणा कर दी है। समाज और देश के लिए कुछ अच्छा काम करने की सोच के साथ आज अष्टमी नवरात्रि के अवसर पर अपने राम को रिझाने का पवित्र अवसर है । आइये अपने राम को रिझायें और सबको शुभकामना दें कि वे कोरोना लौकडाउन का सम्मान के साथ पालन करें और नेताओं से अपील करें कि कुंभ और चुनाव रैलियां तथा सभी धार्मिक - सामाजिक आयोजन बंद करें । देश के संकट का सब मिलकर मुकाबला करें ।  'जान है तो जहान है ' को चरितार्थ करें, स्वयं घर में रहें और सबको घर में रहने का निवेदन करें । पतझड़ से निराश न हों, वसंत दूर नहीं है । अष्टमी नवरात्रि की सबको शुभकामनाएं।

पूरन चन्द्र काण्डपाल
20.04.2021

Monday, 19 April 2021

Rawan aur Duryodhan : रावण और दुर्योधन

खरी खरी - 831 : रावण - दुर्योधन

       देश में पिछले साल 25 मार्च 2020 से आरम्भ हुआ 40 दिन का कोरोना लौकडाउन 03 मई 2020 तक चला । पिछले साल से दुनिया में 30.36 लाख से अधिक लोग क्रूर कोरोना के ग्रास बन चुके हैं । हमारे देश में 1.48 करोड़ से अधिक लोग संक्रमित हुए और 1.77 लाख से अधिक ग्रास बन चुके हैं । हमारी सरकार/सरकारें /शासन इस रोग से लड़ रहे हैं । हमारा सहयोग यह है कि हम घर में रहें, बाहर न निकलें । इस वक्त यही हम सबकी बहुत बड़ी जिम्मेदारी है कि हम सरकार के निर्देशों का पालन करें और स्वयं को घर में बंद करें तथा करोना से लड़ रहे कर्मवीरों को शुभकामनाएं दें । इस दौर में हमें निराशा से बचना है । यदि हरिद्वार कुंभ और चुनाव रैलियों पर भी महामारी रोधक कानून लगता तो आज हमारे देश में कोरोना का तांडव नहीं होता और निर्दोष लोगों की जान नहीं जाती । देश में आज एक दिन में 2.61 लाख नए केस हो रहे हैं जबकि पिछले 24 घंटे में 1.5 हजार से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। दिल्ली की स्तिथि भी बेहद गंभीर है जहां पिछले 24 घंटे में 25462 नए केस हुए और 167 रोगी मृत हो गए। 

     आज सबसे बड़ी बात यह है कि हम दुर्योधन बनकर बाहर न घूमें और रावण बनकर अहंकार न करें । दुर्योधन और रावण दोनों ही विनम्रता विहीन दुष्चरित्र थे जो किसी की बात नहीं सुनते थे और स्वयं को सर्वोपरि समझते थे। इन दोनों ने अपनी जिद और अहंकार से अपने साथ कई निर्दोषों का भी विनाश किया । जिन लोगों के कारण देश आज इस बेहद बिकराल स्थिति से गुजर रहा है उन्हें इतिहास कभी भी माफ नहीं करेगा ।  कोरोना से बचिए और देश को बचाइए । मास्क पहनकर ही घर से बाहर पांव रखिए।  यही इस वक्त राष्ट्र की पुकार है और राष्ट्रभक्ति भी ।

पूरन चन्द्र कांडपाल

19.04.2021

Sunday, 18 April 2021

Maya Naheen mahaan : माया नहीं महान

खरी खरी - 830 : माया नहीं महान

(पैसा बहुत कुछ है परन्तु सबकुछ नहीं । कुछ चीज़ें पैसे से नहीं खरीदी जा सकती ।)

जग में माया नहीं महान,
फिर तू काहे करे गुमान ।

माया से तुझे मिले बिछौना
नींद न मिलने पाये,
माया से साधन मिल जाते
खुशी न मिलने पाये,
माया से तुझे मिलता मंदिर
मिले नहीं भगवान । जग...

माया से मिले भवन चौबारे
घर नहीं मिलने पाये,
दवा -आभूषण मिले माया से
मुस्कान न मिलने पाये,
माया से पोथी मिल जाए
नहीं मिल पाये ज्ञान । जग...

माया से प्रसाधन मिलते
मिलते नहीं संस्कार,
माया से संस्कृति मिले ना
मिल जाता बाजार,
अंत समय कछु हाथ न लागे
सभी खोखला जान । जग...

( कोरोना ने देश में भयंकर रूप ले लिया है । देश में पिछले 24 घंटे में  2.34 लाख से अधिक नए केस हुए हैं जबकि 1341 लोग संक्रमण से मारे गए। दिल्ली में भी पिछले 24 घंटे में 24 375 नए संक्रमित केस हुए और 167 मृत बताए गए हैं। बचाव के नियम गंभीरता से पालन करिए । कुंभ से लौटे सज्जनों को कोरांटाइन बहुत जरूरी।  आदेश मानिए । दुर्योधन मत बनिए । वैक्सीन लगाइए और व्यर्थ में घर से बाहर मत जाइए । कोरोना वीरों के लिए दुआ कीजिए । हारेगा कोरोना और जीतेगा देश। )

पूरन चन्द्र काण्डपाल
18.04.2021

Saturday, 17 April 2021

Haarega korona : हारेगा कोरोना।

खरी खरी - 829 : हारेगा कोरोना हम सब जीतेंगे

कोरोना ने दुनिया में आग लगा दी है
मानव को मानव की औकाद बता दी है,

धृतराष्ट्र की तरह मानव चलने लगा था
सर्वशक्तिमान खुद को समझने लगा था,

पड़ोसी चीन ने पहले इसको छिपाया
जब मरने लगा तो दुनिया को बताया,

चीन से ही ये महामारी दुनिया में फैली
जिसने पूरे विश्व में अनगिनत जान लेली,

कोरोना को जब तक दुनिया समझ पाती
वायरस बना लाइलाज अति क्रूर उत्पाती,

लेकर हल्के में इसे कर दी लापरवाही
पूरे विश्व में मच गई है अब त्राहि त्राहि,

इक्कीस लाख मानव ग्रसित कर चुका है
सवा लाख जन जीवन को निगल चुका है,

भारत में भी पांव इसके पहुंच चुके हैं
हजारों जन ग्रसित हैं कई मर चुके हैं,

उपचार एक ही है इसके कहर का
कर ले गृह बंदी तू घर में ठहर जा ।

संकल्प कर लें हम सब घर में रहेंगे
हारेगा कोरोना हम मिलकर जीतेंगे ।

(एक साल बाद भी यह कविता आज के दौर में प्रासंगिक। आज देश में पिछले 24 घंटे में 2 लाख से अधिक नए कोरोना केस जबकि दिल्ली में इसी दौरान 19.5 हजार से अधिक नए केस। मरने वालों की संख्या भी डरावनी है। श्मशान घाटों में स्थिति बहुत भयानक।  क्या अब कुंभ और चुनाव के बारे में पुनः नहीं सोचा जाना चाहिए ? कुंभ समाप्त होना चाहिए और पश्चिम बंगाल के बचे हुए चार चरण के चुनाव अब एक दिन में समाप्त होने चाहिए। ऐसा करने से स्थिति को बदतर होने से बचाया जा सकता है। )

पूरन चन्द्र कांडपाल
17.04.2021

Sharaabi pati : शराबी पति

बिरखांत - 366 :  शराबी पति तो पत्नी क्या करे ?

    शराब विरोध के बारे में कई लेख कई पुस्तकों में लिख चुका हूं | हम सब जानते हैं कि जो भी पिता, पति या पुत्र शराब पीता है उसकी परेशानी हर हाल में एक बेटी, पत्नी या मां को ही झेलनी पढ़ती है | यदि किसी महिला का पति शराबी हो तो उस पर क्या गुजरती है यह केवल और केवल वह महिला ही जानती है | शराबी पति से जूझ कर अपना घर बचाने वाली इन वीरांगनाओं को यह बिरखांत समर्पित है |

    स्वभाव से हर पत्नी चाहती है कि उसका पति उसके नखरे उठाये, उसकी खुशामत करे, रूठने पर उसे मनाए, उसकी परवाह करे, उसकी ओर आकर्षित रहे और उसकी हर बात माने | एक चुस्त-दुरुस्त, फुर्तीला, योग्य, तंदुरुस्त, सम्पूर्ण ऐबों से दूर, सभी गुणों से भरपूर, सुन्दर पति की कामना सभी महिलाएं अपने मन में संजोये रहती हैं | इसके विपरीत जब किसी महिला का शराबी पति से पल्लू बंध जाए तो इसे विषम परिस्थिति ही कहा जाएगा और इस परिस्थिति से निबटने के लिए ही उसे असाधारण बनना पड़ेगा | असाधारण अर्थात अपरिमित धैर्य और अपार साहस अपने में जुटाना पड़ेगा | इस तरह की पत्नियाँ अवश्य ही बरबादी की ओर जाने वाले अपने जीवन-रथ के पहियों को रोक कर सुखद जीवन की ओर मोड़ लेती हैं |

     शराब की लत रूपी जंजीर में जकड़े कुछ ऐसे चिकने घड़े रूपी पति भी होते हैं जिन पर पत्नी के धैर्य, सहिष्णुता तथा प्रार्थना का तनिक भी असर नहीं पड़ता | ऐसी  परिस्थिति में पत्नी क्या करे ? उस पर उसके करीबी लोग यह लांछन लगाने के लिए भी तैयार खड़े हैं कि वह अपने पति को संभाल नहीं सकी | ऐसी घड़ी में बहुत बड़े सयंम की जरूरत है | किसी प्रकार के झगड़े, अनशन या द्वन्द से तो पारिवारिक कलह बढ़ता ही चला जाएगा | असंख्य उदाहरण हैं शराब और क्रोध की दुखदायी परिणिति के | जब व्यक्ति नशे के प्रभाव में होता है तो वह शराब या स्वयं की बुराई को सह नहीं सकता भलेही वह विनाश में विलीन हो जाए |

     कुछ टोटके मास्टरों ने ऐसी दुखित महिलाओं को दिग्भ्रमित किया | उन्हें नीम-हकीम, झाड़ू-मंतर जैसे टोटकों को अपनाने की सलाह दी | इससे समस्या सुलझने के बजाय उलझती ही गई | टोटकों से पति ‘वश में’ नहीं हो सकता | पति को वश में करने का सबसे बड़ा और रामबाण तरीका है प्यार का | असहाय, निराश एवं तनाव से जूझ रही ऐसी महिलाओं को प्यार से इस समस्या से निबटना पड़ेगा | प्यार रूपी इस रामबाण से अधिकांश महिलाओं को सफलता मिली है | विषम परिस्थितियों में खुश रहना या मुस्कराना आसान नहीं है | यह वैसा ही जैसे कोई हमें सुई चुभाये और रोने-चिलाने के बजाय हंसने को कहे | ऐसा करना कठिन है पर करना पड़ेगा क्योंकि उसे अपने डूबते हुए जहाज को बचाना है |

     इस समस्या का एकमात्र हल यह है कि यदि पत्नी ठान ले कि वह अपने पति से शराब रूपी सौत को अलग करके ही चैन लेगी तो उसे एक निश्छल रणनीति बनानी होगी जिसे अंजाम देने के लिये उसे स्वयं को तैयार करना होगा |  विनम्रता, शालीनता, सहनशीलता एवं समर्पण की पुष्पमाल  बन कर अपनी हार नहीं मानते हुए उसे पति के गले का हार बनना होगा | पति से शराब नहीं पीने की बात तब करनी होगी जब वह शराब में डूबा न हो | नशे की हालात में शराब नहीं पीने की बात करना आग में घी डालने के सामान है | पत्नी को उन क्षणों की तलाश करने होगी जब उसका पति उसकी अधिक से अधिक बातें सुन सके | पत्नी को पूर्ण तन्मयता से ऐसा वातावरण बनाना होगा जिस वातावरण में यह पटरी से उतरा हुआ पुरुष दुबारा पटरी पर आ जाय |  महिला में इतनी शक्ति है कि वह परिवार को टूटने से बचा कर बच्चों का भविष्य ध्यान में रखते हुए अंगूर की बेटी संग डूब रहे अपने पति को सावित्री बन कर बचा सकती है |

पूरन चन्द्र कांडपाल
16.04.2021

Wednesday, 14 April 2021

Chanarada ki baat : चनरदाकि बात।

खरी खरी -828 :   चनरदा कि बात

    चनरदा बाबाओं क पाखण्ड और उनार सेवकों क अन्धविश्वास देखि  दुखी  छीं । बतूं रईं, "जैल हमू कैं 'अ, आ -क, ख' सिखाईं, इस्कूल- कालेजों में शिक्षा दी, हाम ऊं मास्टरों-अध्यापकों -गुरुजनों कैं भुलि गोयूं । हमूं कैं दुसरि गुरुभक्ति कि बिमारी लैगे । कबीर दास ज्यूल जो साधु कि बात करी ऊं सब अदप है गईं ।

    हमर देश आब दुसार किस्मक संत, गुरु, सदगुरू, तांत्रिकोंल भरीगो । इनू में असंतों कि ज्यादै भरमार छ । हालों में कएक असंत जेल न्हैगीं, एक असंत और वीक च्यल जेल में सडैं रौ । हमार अंधविश्वासी भक्त फिर लै इनार चंगुल बै मुक्त नि हूँ राय।  आब त बाबाओं कैं जेड सुरक्षा लै मिलैं फैगे और बाबा मंत्री लै बनै रईं । कुछ लोग बाबा कैं दूदल नवै बेर उ दूद कि खीर पकै बेर खां रईं ।

     उत्तराखंड में चिलम- सुल्प धारी बाबा छीं, शराब- सिगरेट सुट्टवाल बाबा छीं ।  यूँ नशेड़ी, पाखंडी, व्यभिचारी, बाबाओं क नाम पर कलंक लगूणी असंत कैक के भल कराल ?  लोग आपणी समस्या समाधानक लिजी यूं पाखंडियों कि शरण में किलै  जां रईं ?  जरा चर्चा करो धैं !"

    चनरदाल एक भलि खबर लै बतै । उनूल बता, " परंपरा मैंस  बणूनी, मैंसों कैं परंपरा नि बनून ।  ब्याक दिन सात फ्यार सबै ल्ही रईं । यूं फ्यारांक मतलब कैकैं मालुम न्हैति ।  न क्वे पुछन, न क्वे बतून । शॉटकट करो, फटाफट करो, दाम- दक्षिण मुणी धरो, हैगो ब्या ।

      हरयाणा में नवम्बर 2014 में एक ब्या में एक ज्वड़ल एक फ्यार ज्यादै लगा, आठ फ्यार लगाईं । आठूं फ्यार में उनूल पेड़ लगै बेर पर्यावरण बचूंण कि कसम खै । उनर य आठूं फ्यार अखबार- टीवी कि खबर बनौ । ब्योलिक बौज्यूल लै उदिन कएक डाव- बोट रोपीं । य परंपरा अपनोंण चैंछ ।

         पैली बै 'मैती आंदोलन' में उत्तराखंड में ब्योलिक दगड़ी य ई काम करछी । आब सिर्फ ज्वत कि रकम ऐठनीं, रिबन काटिए कि इंट्री फीस मांगनीं, बस । ब्योलिक सखियोंल 'मैती आंदोलन' कैं ज्यौन धरण चैंछ । 

(य चनरदा को छ ? चनरदा लेखकक भौत पुराण किरदार छ । य हमू में बै क्वे लै है सकूं । चनरदाक सही नाम  चनरिय , चनर सिंह, चन्द्र दत्त, चनर राम, चन्द्र बल्लभ के लै है सकूं पर सब उनुहैँ चनरदा ई कौनी । चनरदा ज्यौन लाश न्हैति, उ मसमसाट नि पाड़न । उ गिच खोलण कि हिम्मत धरूं और सबूं हैं सामाजिक विषमताओं पर गिच खोलण कि उम्मीद करूं ।  )

पूरन चन्द्र काण्डपाल,
15.04.2021