Friday, 18 May 2018

Ganga : गंगा में दिखाव

खरी खरी- 240 : दिखाव कि बात

मिहुणि गंगा मैया
लै कूं रौछा,
सबूं हैं गंगा गंदी
हैगे लै कूं रौछा,
गंद नालों कैं
म्ये में बगों रौछा,
मुर्द म्यार किनार
पर भडूँ रौछा,
मरी जानवर म्ये
में लफाऊँ रौछा,
धोबीघाट म्यार
किनार खोलें रौछा,
विसर्जन क नाम पर
म्ये में कुड़-कभाड़
लफाउं रौछा,
पै दिखाव कि बात केक
लिजी करैं रौछा ?

पूरन चन्द्र काण्डपाल
19.05.2018

Kishoree yaun utpeedan : किशोरी यौन उत्पीड़न

खरी खरी - 239 : देश में यौन उत्पीड़न की गंभीर स्थिति

     खरी खरी - 238  (16.05.2018) में भी मैंने मृत्युदंड पाए एक बलात्कारी हत्यारे की चर्चा की थी । एक सर्वे के अनुसार देश में हर तीन में से एक किशोरी सार्वजनिक स्थानों पर यौन उत्पीड़न को लेकर चिंतित रहती है जबकि 5 में से एक किशोरी बलात्कार सहित अन्य शारीरिक हमलों को लेकर डर के साये में जीती है । वर्तमान में नारी यौन उत्पीड़न में देश का बहुत बुरा हाल है ।

     देश की 40% लड़कियों को लगता है कि पुलिस उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लेगी या उल्टे उन पर ही आरोप लगाएगी । 25% लड़कियों को लगता है कि उनका कभी भी शारीरिक शोषण और बलात्कार हो सकता है । इस तरह का डर प्रत्येक लड़की के मन में चौबीसों घण्टे मौजूद रहता है । इस भयावह स्तिथि के लिए हम सब जिम्मेदार हैं क्योंकि इस अपराध को करने वाला कोई पुरूष ही तो है । अपनी बेटियों की इस भयावह हालत की चर्चा हम अपने बेटों से तो कर ही सकते हैं ।

पूरन चन्द्र काण्डपाल
18.05.2018

Satynarayan kath : सत्यनारायण काथ

सत्यनारायण काथ में सवाल-जबाब


     ‘चनरदा’ यूं पंक्तियों क लेखक क एक भौत पुराण जाणी- पछ्याणी किरदार छ | इनर   नाम चन्द्र मणी, चंद्रा दत्त, चन्द्र प्रकाश, चनर देव, चनर सिंह, चान सिंह, चन्दन सिंह, चनर राम, चनराम, चनिका, चनरी आदि कुछ लै है सकूं पर लोग उनुहें चनरदा ई कौनी | चनरदा मसमसाणक बजाय गिच खोलनीं, कडुआहट में मिठास घोउनीं, बलाण है पैली भली-भांत तोलनीं और सच- झूठकि परख लै करनीं | म्येरि कएक रचनाओं में चनरदा कतू ता ऐ गईं | आज ऊँ एक सत्यनायण कि काथ सुणि बेर ऐ रईं |


    राम- रमो क बाद मील चनरदा हैं पुछौ, “भौत दिनों में नजर औं रौछा चनरदा आज, लागें रौ कैं दूर जै रौछिया और वै रमि गछा ?”  “कां जनूं यार, यै छी | राजकपूर कै गो, ‘जीना यहां मरना यहां, इसके सिवा जाना कहां ?’ काथ क न्यौत खै बेर औं रयूं | सत्यनारायण ज्यू कि काथ छी एक मितुर क घर”, चनरदा ल मुलमुलै बेर कौ |  “अच्छा काथ क ताज ज्ञान ल सराबोर है रौछ, तबै भौत खुशि नजर औं रौछा,” मील मजाक करी | “तुम जे समझो यार, क्वे ताज ज्ञान वालि बात नि हइ | वर्षों बटि सुणते औं रयूं, बस एकै  ज्ञान हय- लालच ल वशीभूत है बेर पुज क संकल्प करो, बामणों कैं भोजन खांहूँ खवौ, संकल्प नि निभाला तो उ व्यौपारी क चार बेक़सूर दुख पाला...आदि | काथ क बहानै ल इष्ट- मितुरों दगै भेट है जींछ और ‘वील काथ करै’ क प्रचार त है ई जांछ |”


    “काथ छी तो ब्राहमण और बाबा त आयै हुनाल, उनुकैं खउण –पेउण में पुण्य मिलनेर हय बल | जजमानक दगाड़ सुणणियांल पुण्य कमा हुनल”, मील सवाल उठा मैंने | चनरदा सहमत नि हाय और झट बलाईं, “काथ सुणणी त छी पर कैक ध्यान काथ में नि छी | यास में पंडिज्यू लै टोटल पुर करें रौछी | ‘जसी तेरी जाग्द्यो उसी म्येरि भेट-पखोव |’ शोर-शराबा देखि मील सुणणियां हैं हाथ जोड़ नै कौ, “ देखो काथ ध्यान ल सुणो, कथा क आखिर में  पांच सवाल पुछी जाल | जो सही उत्तर द्यल उकैं हर सही उत्तर पर बीस रुपै क इनाम दिई जाल | मील दस-दसा क दस नौट थान में धरि देईं | कुछ कम शोर साथ काथ चलते रै


      काथ पुरि होते ही आरती है पैली मील सुणणियां हैं पांच साधारण सवाल पुछीं –‘लीलावती और कलावती को छी, सूत जी को छी, सदानंद को छी, को ऋषियों ल को जाग पर सूत ज्यू हैं बात पुछी और बर को नगर क छी ?’ हैरानी तब है जब एक लै सवाल क उत्तर ठीक नि मिल | स्पष्ट है गो छी कि कैक लै ध्यान काथ में नि छी | पंडिज्यू हैं जी सवाल नि पुछ  ताकि व्यास गद्दी क सम्मान बनी रौ और पंडिज्यू ल लै खुद उत्तर दीण कि क्वे पहल नि करि | सौ रुपै कि जमा राशि तत्काल पंडिज्यू क सुपुर्द करि दी |”


     चनरदा अघिल बतूनै गईं, “मीकैं कैकि आस्था- श्रधा पर क्ये कौण न्हैति, मी त  अंधश्रद्धा या अंधविश्वास क विरोध करनूं | काथ में किसी क्वे गरीब कैं भोजन करूण या कर्म करण कि चर्चा कैं लै न्हैति | बामणों कैं भोजन करूण ल और पुज करण ल पुण्य और वांच्छित फल  मिलण कि चर्चा कतू ता छ | ‘श्रीमद भागवद गीता’ में केवल कर्म करण क संदेश जबकि ‘य काथ’ और ‘गरुड पुराण’ में केवल बामण कैं भोजन करूण ल पुण्य प्राप्ति क द्वार बताई रौछ | 


     अंत में एक लौंड सवाल पुछौ, “य काथ में पुज करण कि बात कतू ता बतायी गे, काथ करण कि बात लै कई गे पर सत्यनारायण कि काथ के छी य त बतैयै ना  ?” चनरदा बलाय, “उ लौंड क सवाल मीकैं ठीक लागौ जैक जबाब आज लै नि मिलि रय | आखिर काथ के छी जैकैं नि करण ल कएक लोगों कैं सजा भुगतण पड़ी ? य काथ कैं ‘कथा’ कि जागि पर ‘पुज’ कौण ठीक रौल  |


पूरन चन्द्र काण्डपाल

17.05.2018

 


Tuesday, 15 May 2018

22 din mei saja : 22 दिन में सजा ए मौत

खरी खरी - 238 : न्याय हुआ 22 दिन में - कुकृत्य की सजा-ए-मौत

     दुष्कर्म (रेप) ने हमारे देश में अब एक समस्या का रूप ले लिया है । 95% आरोपी तो पीड़िता के रिश्तेदार, पड़ोसी, सहपाठी, सहकर्मी या पहचान वाले होते हैं । अब किस पर भरोसा करें । आज हम उस दौर से गुजर रहे हैं जब नारी वर्ग को हर किसी भी पुरुष को संदेह की दृष्टि से देखना चाहिए कि वह उसके लिए कभी भी घातक हो सकता है ।

     अधिक दुःखद तो तब होता है जब ये नरपिशाच दुधमुंही बच्चियों को इस कुकृत्य का शिकार बनाते हैं । कुछ दिन पहले इंदौर में एक 26 वर्षीय नरपिशाच ने एक 4 माह की बच्ची के साथ दुष्कर्म करके उसकी हत्या कर दी । यह नरपिशाच उस बच्ची के परिजनों को जानता था ।

     वारदात के 22 दिन बाद 12 मई 2018 को इंदौर की जिला अदालत ने इस नरपिशाच हत्यारे को फांसी की सजा सुनाई है ।  मानवता को शर्मसार करने वाले इस कांड में पुलिस ने बड़ी तेजी से जांच पूरी की और आरोप पत्र अदालत में पेश कर दिया । न्यायालय ने अपने 51 पृष्ठ के फैसले में इसे जघन्य, वीभत्स, क्रूर और जंगली कृत्य बताते हुए आरोपी को मृत्युदंड दिया । अब आगे भी इस कांड पर द्रुत कार्यवाही हो और सजा का क्रियान्वयन शीघ्रता से हो । 6 वर्ष हो गए हैं  2012 के निर्भया कांड के दोषी अभी भी जिंदा हैं ।  अदालत का फैसला तो मात्र 22 दिन में आ गया, अब देखते हैं कि इंदौर के इस बालात्कारी हत्यारे को कब फांसी पर लटकाया जाता है ?

पूरन चन्द्र काण्डपाल
16.05.2018

Monday, 14 May 2018

Aviral lekhani : अविरल लेखनी के 365 दिन

मीठी मीठी - 110 : अविरल कलमघसीटी का आज 365वां दिन

     मित्रो फेसबुक और व्हाट्सएप पर लगातार कलमघसीटी के आज 15 मई 2018 को पूरे 365 दिन हो गए । सोसल मीडिया में लिखना तो वर्ष 2015 के आरंभ से चल रहा है परंतु यह नियमित अथवा प्रतिदिन नहीं था । बीच बीच में रुक -रुक कर चलते रहा परन्तु 15 मई 2017 से लगातार रहा, एकदिन भी नहीं छूटा । सोसल मीडिया की इस लेखन यात्रा में अब तक तीन शीर्षकों के माध्यम से बिरखांत के 211, खरी -खरी के 237 और मीठी-मीठी के 110 लेख लिखे जिनका कुल योग 558 होता है ।

     अविरल लेखन के 365वें दिन पर मैं अपने पसन्दकारों, टिप्पणीकारों, आलोचकों, व्हाट्सएप के करीब तीन दर्जन से अधिक समूहों तथा अन्य पाठकों जिनकी संख्या हजारों में है, सभी को नमन करता हूँ और सबका हार्दिक आभार भी व्यक्त करता हूँ । आप सभी मुझे प्रेरित करते हैं, मेरी लेखनी पर धार लगाते हैं, मेरा मार्ग-दर्शन करते हैं और मेरी आलोचना करते हैं तथा मुझे ऊर्जा देते हैं । आशा है भविष्य में भी मेरे शब्दों की माला पर आपका स्नेह बरसते रहेगा । यही मेरे लिए आपका दिया हुआ सबसे बड़ा पुरस्कार भी होगा ।

पूरन चन्द्र काण्डपाल
15.05.2018

Sunday, 13 May 2018

Gich kholanee : गिच खोलणी चैनी

खरी खरी - 237 :  गिच खोलणी चैनी

मसमसै बेर क्ये नि हुन
बेझिझक गिच खोलणी चैनी,
अटकि रौछ बाट में जो दव
हिम्मतल उकैं फोड़णी चैनी ।

अन्यार अन्यार कै बेर
उज्याव नि हुन,
अन्यार में  एक मस्याव
जगूणी चैनी ।
मसमसै..

क्ये दुखै कि बात जरूर हुनलि
जो डड़ाडड़ पड़ि रै,
रुणी कैं एक आऊं
कुतकुतैलि लगूणी चैनी ।
मसमसै बेर...

पूरन चन्द्र काण्डपाल
14.05.2018

Maatri diwas : मातृ दिवस

मीठी मीठी - 109 : इज है ठुल को ? मातृ दिवस ।

न सरग न पताव
न तीरथ न धाम,
इज है ठुल क्वे
और न्हैति मुकाम ।

आपूं स्येतीं गिल म
हमूकैं स्येवैं वबाण,
हमार ऐरामा लिजी
वीक ऐराम हराण ।

इज क कर्ज है दुनिय में
क्वे उऋण नि है सकन,
आंचव में पीई दूद क
क्वे मोल नि चुकै सकन ।

दुख सुख में हरबखत
गिचम इज क नाम,
'ओ.. इजा..' कैते ही
मिलि जां सुख ऐराम ।

'मातृ दिवस' कि शुभकामना

पूरन चन्द्र काण्डपाल
13 मई 2018