Thursday, 15 March 2018

Steefan haking स्टीफन हॉकिंग

मीठी मीठी -88 : सीख जो दे गए स्टीफन हॉकिंग

     8 जनवरी 1942 को इंग्लैंड के आक्सफोर्ड में जन्मे स्टीफन हॉकिंग 14 मार्च 2018 को 76 वर्ष की उम्र में दुनिया से जाते समय यह सीख दे कि यदि इच्छा शक्ति हो तो  अपंगता या लाचारी में भी मनुष्य आश्चर्यजनक कार्य कर सकता है । उन्हें मात्र 21 वर्ष की आयु में स्नायु सम्बन्धी ( ALS, अम्योट्रापिक लेटरल स्क्लेरोसिस) रोग लग गया जिसमें रोगी कुछ ही वर्ष जीवित रहता है । इस बीमारी के कारण वे एक हाथ की कुछ अंगुलियां ही हिला सकते थे, बाकी पूरा शरीर हिल नहीं पाता था । बोलने सहित उनके रोजमर्रा के काम तकनीक या लोगों पर निर्भर रहते थे । 56 वर्ष तक उनका ज्यादातर वक्त विशेष व्हील चेयर पर गुजरा ।

    स्टीफन हॉकिंग एक महान वैज्ञानिक और अद्भुत व्यक्ति थे जिनके कार्य और विरासत सदैव जीवित रहेंगे । उनकी बुद्धिमता, साहस और दृढ़ता दुनिया को प्रेरित करती रहेगी । उन्होंने 1970 में रॉजर पेनरोज के साथ मिलकर पूरे ब्रह्मांड पर ब्लैक होल के गणित को लागू किया और ब्रह्मांड की उत्पत्ति के बारे में बिग-बैंग के सिद्धांत को समझाया । उनकी पुस्तक 'ए ब्रीफ हिस्ट्री आफ टाइम' जो 1988 में प्रकाशित हुई, से उन्हें प्रसिद्धि मिली । इस पुस्तक की एक करोड़ प्रतियां बिकी और कई भाषाओं में इसका अनुवाद हुआ ।

    वे निरीश्वरवादी थे और पुनर्जन्म में उनका विश्वास नहीं था । वे विज्ञान के दुष्प्रभावों से भी दुनिया को आगाह करते थे । वे 2001 में भारत आये थे । वे अपनी खोजों में हमेशा जिंदा रहेंगे । मानवतावादी स्टीफन हॉकिंग अमेरिका के सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान  सहित कई पुरस्कारों से विभूषित किये गए थे । हम सबकी ओर से इस अद्भुत इंसान और विशिष्ट वैज्ञानिक को विनम्र श्रद्धांजलि ।

पूरन चन्द्र काण्डपाल
16.03.2018

Wednesday, 14 March 2018

Bachon par najar : बच्चों पर नजर जरूरी

बिरखांत - 203 : बच्चों पर नजर जरूरी

      आजकल हमारे इर्द-गिर्द एक अटपटा-अनसुना विदेशी भाषा का शब्द गूंज रहा है –‘पोर्न’ |  ये पोर्न क्या है ? वर्ष 1985  में प्रशिक्षण के लिए एक संस्थान में बीकानेर गया था | वहां सहकर्मियों ने पूछा, “क्या तुमने ब्लू फिल्म देखी है ?” मैंने कहा “नहीं” | मैंने ब्लैक-ह्वाइट, ईस्टमैन, फ्यूजीयामा, गेवा कलर की फिल्में तो देखी थी पर ‘ब्लू फिल्म’ नहीं | मैं सोचता था यह कोई विशेष कलर होता होगा | बाद में उनके बताने पर पता चला कि मैं दुनिया से कितना पीछे हूं |

     दुनिया से पीछे तो मैं आज भी हूं | आज मोबाइल-इंटरनेट का दौर है | बच्चे भी इस भंवर में घुस चुके हैं और बिना घुसे वे दुनिया के साथ दौड़ भी नहीं सकते | एक दिन सायंकाल छै-सात परिचित लड़कों (15- 16 वर्ष उम्र) का एक समूह एक खड़ी मोटरसाइकिल पर बड़ी तल्लीनता से एक बड़े मोबाइल पर कुछ दृश्य देख रहे थे | मेरे आते ही वे चल पड़े | एक छोटे बच्चे ने बड़ी मासूमियत से बताया “अंकल ये पोर्न देख रहे थे” | मैंने पूछा, “ये पोर्न क्या होता है ?”

     कक्षा 7 के इस बच्चे ने मुझे वह सब कुछ बेझिझक बता दिया जिसे मैं यहां लिख नहीं सकता | एक राष्ट्रीय दैनिक में डा. कुमुदिनी पति के एक लेख के अनुसार, चार सौ लकड़ों में से 70% ने बताया कि वे दस वर्ष की उम्र से ‘पोर्न’ देखने लगे थे और 93% ने कहा कि पोर्न की लत नशीली दवाओं की तरह है |  कुछ वर्ष पहले एक जनहित याचिका में सर्वोच्च न्यायालय ने इस पर चिंता जताई और सरकार ने 857 वेवसाईटो को बंद करने का निर्देश दिया | शीघ्र ही कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश बताने लगे | 

     आज हमारी मीडिया में ‘ऐड’ आता है ‘मसालेदार चटपटी बातें लड़की से करें’ | नेटवर्क वाले खूब कमाई कर रहे हैं परन्तु बच्चे और युवा बरबाद हो रहे हैं | हमने अपने बच्चों को नेट- मोबाइल- डोंगल सब कुछ दे दिया है | बच्चे अकेले में क्या देख रहे हैं ? क्या ‘सैंड’ कर रहे हैं ? कहां से ‘रिचार्ज’ का पैसा आ रहा है ? इन सवालों के जवाब अभिभावकों के पास नहीं है |

     बस सभी से इतनी सी अपील है कि बच्चों पर नजर रखें, अठारह वर्ष से छोटे बच्चों को मोबाइल (मजबूरी के सिवाय) नहीं दें, घर के कंप्यूटर पर बच्चों को अपने सामने बैठाएं, कम्प्यूटर कक्ष का दरवाजा खुला रखें | बच्चों के दोस्तों को भी पहचानें | उनकी बातचीत, हरकत, शिष्टाचार और पढाई के गिरते स्तर पर भी नजर रखें | खेलने के बहाने प्रतिदिन वह कितने घंटे घर से बाहर रहता है और रात को कितनी देर में घर आता है इस बात को जरूर नोट करें | समय रहते सजग रहें | हमारी सजगता अपनी अगली पीढ़ी को बरबादी से बचा सकती है | ‘का वर्षा जब कृषी सुखाने’ |

पूरन चन्द्र काण्डपाल
15.03.2018

Tuesday, 13 March 2018

Mananiyon par mukdame : 36% माननीयों पर मुकदमे

खरी खरी - 199 : माननीयों पर चौकिए मत

    एक समाचार के अनुसार  देश के सर्वोच्च न्यायालय को हमारी केंद्र सरकार ने हलफनामा देकर सूचित किया है कि हमारे 36 % माननीय सांसद एवं विधायकों पर आपराधिक मुकदमे दायर हैं । यह चौकाने वाला तथ्य है । क्या हमारे देश में स्वच्छ छवि के कैंडिडेट्स का अभाव है जो हमारे राजनैतिक दल अपराधिक छवि के लोगों को चुनाव में टिकट देते हैं ?

     इस समाचार से देश के किसी भी नागरिक का मन अवश्य विचलित होता होगा । हमारे प्रजातंत्र में यह अपराधीकरण क्यों हो रहा है ?  जिस देश में शास्त्री जी जैसे स्वच्छ छवि के कई अनुकरणीय जन सेवक हुए हों वहां की संसद और विधानसभाओं में अपराधियों का प्रवेश कैसे हो गया ?  आज देश के सामने यह एक गंभीर प्रश्न खड़ा है कि क्या हमारी प्रजातांत्रिक चुनी हुई संस्थाओं में आपराधिक पृष्ठभूमि के लोगों की प्रविष्टी रोकी नहीं जा सकती ?  देश का जनमानस आशा करता है कि जनहित के कानून बनाने वाली इन संस्थाओं में निर्मल छवि के प्रतिनिधि ही पहुंचें । क्या हमारे राजनैतिक दल जनता की इस अपेक्षा पर खरे उतरेंगे ?

पूरन चन्द्र काण्डपाल
14.03.2018

Monday, 12 March 2018

Mumbai aasmaan mein surakh : मुम्बई के आसमान में सुराख कर दिया किसान ने

खरी खरी - 198 : मुम्बई के आसमान में सुराख कर दिया किसान ने

     देश में किसानों की बिगड़ती हालत पर दो एपीसोड खरी खरी - 171 और खरी खरी- 173 क्रमशः 10 और 11 फरवरी 2018  को लिख चुका हूं । महाराष्ट्र के 35000 किसान 6 मार्च से 7 दिन की यात्रा के बाद नासिक से चलकर 180 कि मी पैदल चलने के बाद 12 मार्च की सुबह 6 बजे से पहले मुम्बई के आजाद मैदान में पहुंच गए । 12 मार्च को इन्हें रात के 1 बजे चलना पड़ा ताकि सुबह स्कूली बच्चों की परीक्षा इनके कारण अवरुद्ध न हो ।

     किसानों की मुख्य मांग थीं वन्य भूमि उनके नाम हो, फसल का लागत के हिसाब से उचित दाम मिले, प्राकृतिक आपदा से  फसल के नुकसान की भरपाई हो, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू किया जाय और फसल बीमा योजना ठीक से लागू हो आदि । विगत 7 दिन से केंद्र और महाराष्ट्र सरकार इन पर पैनी नजर रखे हुए थी । ज्योंही किसान मुम्बई पहुँचे सरकार ने किसानों से बात करने के लिए 6 मंत्रियों की टीम गठित कर दी ।

     सत्य तो यह है कि सरकार को यकीन नहीं था कि इतने बड़े समूह में किसान मुम्बई तक पहुंचेंगे । किसानों ने मुम्बई में विधानसभा घेरने की चेतावनी दी थी जिससे सरकार सकते में आ गई । महाराष्ट्र के किसानों ने साबित कर दिया कि यदि इच्छा शक्ति हो तो पांव के छालों से रिसता हुआ खून भलेही सड़क पर छाप छोड़े परन्तु उनके इरादों को नहीं तोड़ सकता । इन किसानों ने अपने मजबूत इरादों और कठिन तपस्या से मुम्बई के आसमान में सुराख करके ही दम लिया । 

     अब कहा जा रहा है कि महाराष्ट्र सरकार ने किसानों की सभी मांगें मान ली हैं । मांगें तो पहले भी कई बार मानी गईं परन्तु क्रियान्वित नहीं हुईं । इस बार मांगें वास्तव में मानी गई  या आश्वासन का झुनझुना पकड़ा दिया गया यह तो वक्त बताएगा । दुष्यंत कुमार का स्मरण करते हुए  देश के अन्नदाता कृषक को शत शत नमन ।
हो गई पीर पर्वत सी,
अब तो पिघलनी चाहिए...
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहये...

पूरन चन्द्र काण्डपाल
13.03.2018

Sunday, 11 March 2018

Navsamvatsar shubhkamna : नवसंवत्सर शुभकामना

मीठी मीठी - 86 : नवसंवत्सर शुभकामना समारोह 

     11 मार्च 2018 को गढ़वाल भवन नई दिल्ली में उत्तरांचल विद्वत परिषद दिल्ली के तत्वाधान में 'नवसंवत्सर शुभकामना समारोह'  ( संवत्सर 'विरोधी' 18 मार्च 2018 को है । ) आयोजित किया गया । समारोह के प्रथम सत्र में प्रकांड विद्वान तथा संस्था के अध्यक्ष पंडित महिमामानंद द्विवेदी, डा. गंगा प्रसाद 'विमल', डा. हेमा उनियाल, आचार्य मधुकर द्विवेदी और पूरन चन्द्र काण्डपाल आदि ने आयोजन में अपने विचार प्रस्तुत किये जिनका सभागार में बैठे आगन्तुकों ने खूब आंनद लिया । इस अवसर पर श्रीमती मीरा गैरोला ने अपने गीत से सबको मंत्र मुग्ध कर दिया ।

      भोजनोपरांत आयोजन के अपरान्ह सत्र में कुमाउनी - गढ़वाली कवि सम्मेलन आयोजित किया गया जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ कवि श्री ललित केशवान जी ने की । काव्य पाठ करने वाले कवियों में सर्वश्री दिनेश ध्यानी, रमेश हितैषी, गिरीश बिष्ट 'हँसमुख', डा. केदारखंडी, श्रीमती संयोगिता ध्यानी, ओपी आर्य, गिरीश भावुक, सच्चिदानंद नैनवाल , प्रदीप वेदवाल, कैलाश धस्माना और पूरन चन्द्र काण्डपाल आदि थे । शुभकामना के भाव- विह्वल कर देने वाले संदेशों के इस आयोजन के दोनों सत्रों का कुशल संचालन डा. पवन मैठानी जी ने बहुत ही सटीक और सूक्ष्म शब्दों में विश्लेषण के साथ किया ।

     हमारे लिये सबसे हर्ष की बात यह है कि इस समारोह में संस्था के अध्यक्ष पंडित जी ने सबको जोड़ने तथा साथ लेकर समाज के हित में कार्य करने पर जोर दिया । आयोजन में सामाजिक मुद्दों पर चर्चा होने के साथ ही हमारी भाषा की भी बात हुई । डा.मधुकर द्विवेदी जी ने अपने शुभकामना संदेश में सामाजिक सौहार्द की बात करते हुए भविष्य में भी इस तरह के आयोजन करते रहने की प्रतिवद्धता प्रकट की । पंडित जी के स्नेहाशिर्वाद के साथ आयोजन का समापन किया गया ।

पूरन चन्द्र काण्डपाल
12.03.2018

Saturday, 10 March 2018

Sansad marg gairsain : संसद मार्ग पर गैरसैण गूंज

खरी खरी - 197 : संसद मार्ग पर "गैरसैण" की गूंज

     कल 10 मार्च 2018 को कई उत्तराखंडी संसद मार्ग पहुंचें । गैरसैण के लिए सबने कहा 'अभी नहीं तो कभी नहीं ।' 18 वर्ष हो गए हैं सरकार के आश्वासन की प्रतीक्षा में । डबल इंजन को यार्ड में जंग लग रहा है । उत्तराखंड में कांग्रेसयुक्त बीजेपी सरकार को अब ईमानदारी से शीघ्र गैरसैण को राजधानी घोषित कर देना चाहिए । पहाड़ के विकास का द्योतक है गैरसैण । 2 वर्ष में अमरावती बन गयी और हम टटास रखे गए । बातें तो सबने कही, वायदे तो सभी ने किए लेकिन मुकरते चले गए । अब नहीं चलेगा ये छल । अब प्रत्येक उत्तराखंडी समझ चुका है और गैरसैण ले के ही मानेगा । उत्तराखंड में भी कई दिनों से आन्दोलन चल रहा है ।

     1994 के उत्तराखंड राज्य आंदोलन के 42 शहीदों की आत्मा को शांति तभी मिलेगी जब राज्य की राजधानी गैरसैण बनेगी । प्रधानमंत्री जी के कार्यालय को आज भी  9 फरवरी 2018 की तरह ज्ञापन सौंपा गया । आज के संसद मार्ग धरने पर कई वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार, कवि, समाजसेवी, राज्य- आंदोलनकारी, मातृशक्ति सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे । अब सरकार की समझ में यह बात आ जानी चाहिए कि उत्तराखंडी गैरसैण राजधानी बनवा कर ही मानेंगे ।

पूरन चन्द्र काण्डपाल
11.03.2018

Friday, 9 March 2018

Pratmaon par gussa : प्रतिमाओं पर गुस्सा क्यों ?

खरी खरी - 196 : प्रतिमाओं/मूर्तियों पर गुस्सा क्यों ?

    अचानक देश के कई भागों में महापुरुषों/ जन नेताओं की प्रतिमाओं पर संरक्षण प्राप्त असामाजिक तत्वों द्वारा तोड़फोड़ करने के कई समाचार आये हैं । अब तक त्रिपुरा में लेनिन की, मेरठ में डॉ अम्बेडकर की, कोलकाता में श्यामा प्रसाद मुखर्जी की, केरल में पेरियार की तथा कन्नूर में  महात्मा गांधी की प्रतिमाओं को क्षतिग्रस्त करने अथवा  विरूपित करने के मीडिया ने समाचार प्रसारित किए हैं ।

     इस तरह इन प्रतिमाओं से छेड़छाड़ कर देश के सौहार्द को क्षरण करने की यह कुत्सित हरकत निन्दनीय है । प्रतिमाओं को तोड़ने से कुछ भी नहीं होगा । वह विचार नहीं मरेगा जिससे ये असामाजिक तत्व घृणा करके उस विचारक की प्रतिमा को तोड़ना चाहते  हैं । जहां भी ये तोड़फोड़ हो रही है उस राज्य की सरकार को इन कुत्सित तत्वों पर कठोर कारवाई करनी चाहिए । राज्यों  में अमन- चैन का वातावरण बनाये रखना सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए । ऐसे अवसरों पर प्रजातंत्र के चौथे स्तम्भ को संयमित समाचार प्रसार करने चाहिए तथा अफवाह फैलाने वालों से भी शासन को सख्ती से निपटना चाहिए ।

पूरन चन्द्र काण्डपाल
10.03.2018