Monday, 13 November 2017

Baal diwas : बाल दिवस

मीठी मीठी - 45 : नेहरू जयंती - बाल दिवस

    आज 14 नवम्बर को देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की जयंती है जिसे बाल दिवस के रूप में भी मनाया जाता है । विनम्र श्रद्धांजलि । 'लगुल' पुस्तक में मैंने देश के 13 राष्ट्रपतियों और 14 प्रधानमंत्रियों के बारे में तीन भाषाओं में एक साथ लिखा है । यहां उधृत हैं नेहरू जी के बारे में कुछ शब्द ।

पूरन चन्द्र काण्डपाल
14.11.2017

Sunday, 12 November 2017

Gutkha dhuokmrpaan : गुटखा-धूम्रपान

खरी खरी - 121 :  गुटखा-धूम्रपान

गुटखा तम्बाकू धूम्रपान
लहू तेरा पी रहे सुनसान ।

खैनी गुटखा पान मसाला
चूना कत्था जर्दा वाला,
पुड़िया तम्बाकू मुंह उड़ेले
कब जागेगा तू इंसान ।

खुद को तो तू मार रहा
धुआं दूजे पर डाल रहा,
तेरे मुंह के धुमछल्लों से
सारा जग होता परेशान ।

अस्पताल बैंक रेल स्टेसन
घर दफ्तर आंगन बस स्टेसन,
गली मुहल्ला झड़क शौचालय
लाल किया तूने नादान ।

नुक्कड़ कोना खिड़की सीढ़ी
फैंके टुकड़े सिगरट बिड़ी,
कार्यालय का वाटर कूलर
बना दिया तूने थूकदान ।

नशा नहीं है ये तो जहर है
तुझ पै ढा रहा कैसा कहर है,
अभी वक्त है छोड़ नशे को
बन समाज का व्यक्ति सुजान ।

पूरन चन्द्र काण्डपाल
13.11.2017

Saturday, 11 November 2017

Samman arpan : सम्मान अर्पण

मीठी मीठी - 44 : हमरि भाषा कैं सम्मान अर्पण

     11 नवम्बर 2017 हुणि उत्तराखण्ड लोकभाषा साहित्य मंच दिल्ली द्वारा हिन्दी -कुमाउनी क रचनाकार पूरन चन्द्र काण्डपाल और हिन्दी- गढ़वाली क रचनाकार मदन मोहन डुकलान कैं क्रमशः 2016 और 2017 क महाकवि कन्हैयालाल डंडरियाल सम्मान कंस्टीट्यूसन क्लब नई दिल्ली में प्रदान करीगो । सम्मान में द्विये साहित्यकारों कैं शाल, सरस्वती प्रतिमा (वागदेवी मूर्ति ), प्रशस्ति  पत्र और ₹ 21000/- क चैक भैंट करीगो । 

     सम्मान अर्पण मान्यनीय भोले ज्यू महाराज, पूज्य माता मंगला ज्यू और हमार केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा ज्यू क द्वारा हौछ । यौ सम्मान क प्रायोजक छी दिल्ली पैरामेडिकल मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट (DPMI) जैक प्रबंध निदेशक छीं डॉ विनोद बछेती । व्यक्तिगत तौर पर मी सोचनू कि यौ हमरि भाषा कुमाउनी और गढ़वाली क साथ यूं भाषाओं क पाठकों और हमरि भाषाप्रेमियों क सम्मान छ ।

    महाकवि कन्हैयालाल डंडरियाल सम्मान हर साल कुमाउनी - गढ़वाली- जौनसारी क एक साहित्यकार कैं वर्ष 2012 बटि दिई जांरौ । यौ क्रमशः पांछू और छठूं सम्मान छी । समारोह क दुसौर सत्र में कुमाउनी- गढ़वाली सिखणी करीब 300 नना कैं प्रमाणपत्र दि बेर सम्मानित करीगो । यौ आयोजन क लिजि उत्तराखंड लोकभाषा साहित्य मंच दिल्ली और DPMI कैं साधुवाद दीण चानू । अलंकरण समारोह आयोजन में आई सबै मित्रों, भाषाप्रेमियों, नारी शक्ति, साहित्यकारों, वक्ताओं, विद्वानों, पत्रकारों, आयोजन समिति क सदस्यों, राजनीतिज्ञों समेत सबै युवाओं एवं भाषा सिखणी नानतिनों कैं विनम्रता क साथ धन्यवाद और हृदय बटि आभार प्रकट करण चानू ।

     सम्मान प्राप्ति क बाद मील विनम्रतापूर्वक कन्हैयालाल डंडरियाल ज्यू क स्मरण करते हुए मंच बै घोषणा करी कि यौ सम्मान में मिली पुरि इक्कीस हजार रुपै कि रकम कैं निकट भविष्य में एक कुमाउनी- गढ़वाली साहित्य वार्ता क साथ कवि- सम्मेलन आयोजन में खर्च करी जाल और यै में बै कुछ राशि हमरि भाषा क लेखकों कि किताब खरिदि बेर समाज तक पुजूण में मदद करी जालि । 

पूरन चन्द्र काण्डपाल
12.11.2017

Friday, 10 November 2017

Kanhaiylal dandriyal : कन्हैयालाल डंडरियाल समारोह

मीठी मीठी - 43 : महाकवि कन्हैयालाल डंडरियाल समारोह

     आज 11 नवम्बर हुणि नागराजा महाकाव्य सहित अनेक किताबों क रचनाकार महाकवि कन्हैयालाल डंडरियाल ज्यू कि जयंती छ । उनुकैं विनम्र श्रद्धांजलि । यौ मौक पर आज ढाई बजी (0230 अपरान्ह) कंस्टीट्यूसन क्लब नई दिल्ली (मैट्रो स्टेसन पटेल चौक) में उत्तराखंड लोक भाषा साहित्य मंच दिल्ली द्वारा आयोजित और दिल्ली पैरामेडिकल मैनेजमेंट इंस्टीटूयट (DPMI) न्यू अशोक नगर नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित एक सम्मान अलंकरण समारोह आयोजित करी जांरौ । सबै लोगों हैं निवेदन छ कि यौ कार्यक्रम में जरूर पुजण क कष्ट करिया । धन्यवाद ।

पूरन चन्द्र काण्डपाल
11.11.2017

Thursday, 9 November 2017

Andhvishwas : अंधविश्वास की जकड़

खरी खरी - 120 : अन्धविश्ववास की जकड़

पढ़े-लिखे अंधविश्वासी 
बन गए 
लेकर डिग्री ढेर,
अंधविश्वास कि मकड़जाल में
फंसते न लगती देर ।

औघड़ बाबा गुणी तांत्रिक
बन गए भगवान् 
आंख मूंद विश्वास करे जग,
त्याग तत्थ – विज्ञान ।

लूट करे पूजा दर्शन में
प्रसाद में लूट मचावे,
धर्म के नाम पर जेब तराशे
मृदु उपदेश सुनावे ।

उलझन सुलझे करके हिम्मत
और नहीं मंत्र दूजा,
सार्थक सोच विश्वास दृढ़ 
मान ले कर्म को पूजा ।

अंधविश्वास ने जकड़ा जग को
यह जकड़ मिटानी होगी,
कूप मंडूक की जंजीरों से
मुक्ति दिलानी होगी ।

अंधियारा ये अंधविश्वास का
मुंह बोले नहीं भागे,
शिक्षा का हो दीप प्रज्ज्वलित
तब अंधियारा भागे ।

पूरन चन्द्र काण्डपाल
10.11.2017

Wednesday, 8 November 2017

Badhaaee kis baat kee : बधाई किस बात की ?

बधाई किस बात की ?

     उत्तराखंड की राजधानी गैरसैण जाये , आज यही सबसे बड़ा मुद्दा है । 42 शहीदों की आत्मा  पूछ रही है कि हत्यारों को सजा क्यों नहीं मिली ? राजधानी गैरसैण क्यों नहीं गई ? हां 17 वर्ष में 9 मुख्यमंत्री जरूर बने ।

असली बधाई तब ,
राजधानी गैरसैण बने जब ।
शहीदों ने गैरसैण ही कहा था ।

पूरन चन्द्र काण्डपाल
09.11.2017

Nau bhasha sammelan : नौ उं भाषा सम्मेलन अल्माड़

दिल्ली बै चिठ्ठी ऐ रै


नौउं राष्ट्रीय कुमाउनी भाषा सम्मेलन- 2017 अल्माड़

       कुमाउनी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति प्रचार समिति, कसारदेवी, अल्माड़ (उत्तराखंड) और ‘पहरु’ कुमाउनी मासिक पत्रिका, अल्माड़ द्वारा नौउं राष्ट्रीय कुमाउनी भाषा सम्मेलन दिनांक 3, 4 व 5 नवम्बर 2017 हुणि कुंदन लाल साह प्रेक्षागृह, अल्मोड़ा में आयोजित करिगो | यौ  सम्मेलन में देश कि राजधानी दिल्ली सहित पुर उत्तराखंड क लगभग द्वि सौ कुमाउनी प्रेमियों और साहित्कारों ल भाग ल्हे | यौ तीन दिनी सम्मेलन में सांसद प्रदीप टम्टा, उत्तराखंड सरकार क भाषा -संस्कृति मंत्री प्रकाश पंत ज्यू और विधान सभा क पूर्व अध्यक्ष श्री गोविंद सिंह कुंजवाल ज्यू सहित कएक  गणमान्य व्यक्तियों कि गरिमामय उपस्थिति रैछ |

      उक्त संस्थाओं द्वारा वर्ष 2009 बटि लगातार सम्मेलन आयोजित करी जानौ | यौ सम्मेलन में लै पिछाडि आठ सम्मेलनों कि चार उत्तराखंड कि मुख्य भाषा कुमाउनी और गढ़वाली कैं संविधान क आठूँ अनुसूची में जोड़न, स्कूली शिक्षा क पाठ्यक्रम में यूं भाषाओं कैं शामिल करण कि बात हैछ | सम्मेलन में करीब द्वि दर्जन वक्ताओं ल आपण विचार धरीं जनूमें मुख्य छी  सर्वश्री प्रोफेसर शेर सिंह बिष्ट, डा. शमशेर शिंह बिष्ट, जुगल किशोर पेटशाली, प्रो दिवा भट्ट, ब्रिगेडियर (से नि ) डी के जोशी, डा. पी सी फुलोरिया, देव सिंह पिलखवाल, संस्था क अध्यक्ष कर्मयाल ज्यू और आयोजन समिति क सचिव एवं ‘पहरु’ पत्रिका क सम्पादक डा. हयात सिंह रावत | सबै वक्ताओं ल एक स्वर में आपणी भाषाओं कैं मान्यता कि बात भौत दृढ़ता क साथ धरी | सम्मेलन में हमरि भाषाओं कि प्राचीनता, इनर साहित्य और साहित्यकारों कि चर्चा लै चैछ  |

     सम्मेलन में उत्तराखंड सरकार द्वारा हमरि भाषा और साहित्यकारों क प्रति दिखाई उदासीनता पर लै गुस्स देखण में आछ | कएक वक्ताओं ल  सरकार क रुख कैं भाषा और साहित्य क प्रति यौ कौनै भल नि बताय कि देहरादून स्तिथ उत्तराखंड भाषा संस्थान बांज घटों कि चार पट्ट भै गो जां पिछाड़ि कएक वर्षों बटि साहित्य सम्बंधी क्वे लै गतिविधि नि है रइ और नै साहित्यकारों कि क्ये खूस- खबर लियी गेइ | सरकार कि साहित्य क प्रति यसि निष्ठुरता कि खुलिबेर निंदा करिगे | अल्माड़ में भाषा प्रचार समिति ल एक भवन क निर्माण लै करण क कदम उठै हैछ जैकि बुनैद लै डाइ है और पिलर बनूंण क बाद काम चलि रौछ पर धन कि कमी है रै | यौ मुद्द में निवेदन करण पर लै सरकार ल क्वर आश्वासन दी बेर पल्ल झाड़ि ल्हे और क्ये लै मदद नि करि | आपणी भाषा क प्रति उत्साहित आगंतुकों ल य मौक पर स्वेच्छा ल आर्थिक सहयोग करण क प्रस्ताव लै पास करौ और करीब द्वि लाख रुपैं जम लै है गईं | कएक लोगों ल मदद क बचन दान लै दि रौछ ।

     आठ सत्रों क आयोजन में छठूँ सत्र कुमाउनी कविता पाठ क छी जमें  54 कवियों  ल काव्य पाठ करि श्रोताओं कैं भावविभोर करि दे | सम्मेलन में लोक साहित्य, लोकगीत, गायन सहित अन्य विधाओं पर लै गहन विचार विमर्श हौछ | यौ आयोजन सबूं क सहयोग ल करिगो जमें आवास क इंतजाम स्थानीय होटलों ल करौ | आयोजन समिति क प्रमुख डा. हयात सिंह रावत ज्यू कि पुरि टीम जमें सर्वश्री एडवोकेट जमन सिंह बिष्ट, नीरज पंत, चन्दन बोरा, रूप सिंह बिष्ट, अजय तिवारी, महेंद्र ठकुराठी, कंचन तिवारी, अजय तिवारी आदि छी जनूल भौत भल काम करि बेर आयोजन कैं सफल बना|

      यौ मौक पर कुमाउनी क कएक  साहित्यकारों कैं विभिन्न विधाओं में सम्मानित लै करिगो और एक दर्जन है ज्यादै किताबों क विमोचन लै हौछ | सम्मेलन में तीनों दिन जय नंदा लोक कला केंद्र  क कलाकरों ल आपणी विशिष्ट प्रस्तुति दी बेर सत्रों क श्रीगणेश करौ | यौ टीम क प्रमुख सुप्रसिद्ध ए ग्रेड हुड़का वादक श्री चन्दन बोरा क दगाड में छी सुश्री लता पांडे, विमला बोरा, शीला, पूरन कुमार और अन्य | यौ टीम ल उत्तराखंड कि सांस्कृतिक झलक देखै बेर सबै आगंतुकों क स्वागत करौ जैकि भौत प्रशंसा करिगे | सम्मेलन में कएक पत्र- पत्रिकाओं क संपादक, पत्रकार और रेडियो स्टेशनों के रिकार्डिस्ट लै ऐ रौछी | यौ सफल आयोजन क लिजी पुरि टीम कैं साधुवाद और शुभकामना |

पूरन चन्द्र काण्डपाल
09.11.2017