Thursday, 6 May 2021

We chaar din apavitr kyon ?वे चार दिन अपवित्र क्यों?

बिरखांत  -368 : वे चार दिन  अपवित्र क्यों ?

      कुछ समय पहले एक समाचार पत्र में  'वे चार दिन' के बारे में एक लेख छपा था । शायद कुछ मित्रों ने पढ़ा भी हो । सूक्ष्म में बताता हूं, कालम की लेखिका कहती है, “गुहाटी (असम) के कामाख्या मंदिर की देवी को आषाढ़ के महीने में चार दिन तक राजोवृति होने से मंदिर चार दिन बंद कर दिया जाता है |  फिर चार दिन बात रक्त-स्रवित वस्त्र भक्तों में बांट दिया जाता है | बताया जाता है कि इस दौरान ब्रहमपुत्र भी लाल हो जाती जिसके पीछे अफवाहें हैं कि पानी के लाल होने के पीछे पुजारियों का हात होता है |”

     लेखिका ने ‘रजोवृति के दौरान देवी पवित्र और महिला अपवित्र क्यों ?'  इस बात पर सवाल उठाते हुए अपने बचपन की घटनाओं की चर्चा की है कि जब वे इस क्रिया से गुजरती थी तो उनकी मां उन्हें अछूत समझती थी | लेखिका ने लेख में कई सवाल पूछे हैं | कहना चाहूंगा कि यहां सवाल स्वच्छता का होना चाहिए न कि महिलाओं की अपवित्रता का | महिला को अपवित्र कहना हमारी अज्ञानता व अंधविश्वास जड़ित कुंठित मानसिकता है ।

     उत्तराखंड में यह स्तिथि होने पर महिलायें  पहले गोठ (पशु निवास) या ' छुतकुड़ी' में रहती थीं | बाद में चाख के कोने (मकान का प्रथम तल में बाहर का कमरा) में रहने लगी, परन्तु रहती थी अछूत की तरह | शिक्षा के प्रसार से आज बदलाव आ गया है |  बेटियों का विवाह बीस से पच्चीस वर्ष या इससे भी अधिक उम्र में हो रहा है | अब न लोगों को छूत लगती है, न किसी के बदन में कांटे बबुरते हैं और न किसी महिला में ‘देवी’ या ‘देवता’ औंतरता (प्रकट) है | घर -मकान- वातावरण सब पहले जैसा ही है, सिर्फ अब छूत नहीं लगती |

     सत्य तो यह है कि वहम (भ्रम), पाखण्ड, आडम्बर, मसाण और अंधविश्वास के बेत से महिलाओं को दबा- डरा कर रखने की परम्परा का न आदि है न अंत | बात- बात में बहू को देख सास में ‘देवी’ औंतरना फिर गणतुओं, जगरियों, डंगरियों और बभूतियों द्वारा बहू को प्रताड़ित किया जाना एक सामान्य सी बात थी (है) |

      ऋतुस्राव (रजस्वला अर्थात पीरियड या मासिक ) के वे चार दिन न तो कोई छूत है और न अपवित्रता | यह एक प्रकृति प्रदत क्रिया है जो यौवन के आरम्भ होने या उससे पहले से उम्र के पैंतालीसवे पड़ाव तक सभी महिलाओं में होती है और इसका नियमित होना स्त्री के स्वस्थ शरीर का परिचायक है । इस दौरान सैनिटरी पैड का प्रयोग बहुत जरूरी है ।  यदि ऋतुस्राव नहीं होगा तो मातृत्व सुख भी नहीं मिल सकता । इस दौरान स्वच्छता सर्वोपरि है बस |  इसमें छूत या अस्पर्श जैसी कोई बात नहीं है । स्कूल जाने वाली छात्राओं तक को अब इस प्रक्रिया से जानकारी दी जाने लगी है जो एक अच्छी बात है । अब फिल्म ( उदाहरण के लिए - पैड मैन ) और विज्ञापन से यौवन में कदम रखने वाली लड़कियों को बताया जाता है कि यह उत्तम स्वास्थ्य का प्रतीक है और इसे कुछ अनहोनी या समस्या समझना हमारी जानकारी की कमी समझा जाएगा । इस दौरान स्वच्छता का ध्यान अति आवश्यक है । अतः प्रकृति नियम के इन चार दिनों को अपवित्र न समझा जाय और उस दौरान किसी भी महिला को हेय दृष्टि से देखना भी अज्ञानता ही कहा जाएगा।

पूरन चन्द्र काण्डपाल
07.05.2021

Neebu - Mirch : नीबू - मिर्च।

खरी खरी - 846 : नीबू-मिर्च वाले पड़ोसी

(आज देश में कई जगह कोरोना कर्फ्यू/ लौकडाउन। ये दिन भी जाएंगे गुजर, गुजर गए कई बुरे दिन । आज विश्व में कोरोना संक्रमित संख्या 15.52 करोड़ और ग्रास हुई संख्या 32.45 लाख तथा हमारे देश में संक्रमित संख्या 2.07 करोड़ से अधिक व ग्रास हुई संख्या 2.26 लाख से अधिक हो गई है । घर में रहें, लौकडाउन का सम्मान करें । किसी भी प्रकार के अंधविश्वास से दूर रहें, केवल चिकित्सकों की बात मानें। जल चढ़ाने या जल में डुबकी मारने से कोरोना थमने के बजाय और अधिक जोर-शोर से फैल रहा है । कोरोना से लड़ने वाले कर्मवीरों को शुभकामना देते रहें । )

सात मिर्च, एक नीबू
दोनों पड़ोसियों ने,
अपने अपने दरवाजे पर
आमने-सामने लटकाई  ।

आपस में एक दूसरे की
नजर जीने में टकराई,
अचानक टकराने पर
नजर नहीं मिलाई ।

न मुलाकात, न जज्बात
न कभी बात, न नजर मिले,
शायद इसी लिए ही
नीबू -मिर्च लटकाई ।

दोनों ही जग से कहते हैं
पड़ोस से मिलकर रहना,
जरूरत पड़ने पर पड़ोस ही
काम आएगी मेरे भाई ।

कोरोना ने कुछ तो सिखाया
ऊंच नीच सब एक दिखाया
धर्म संप्रदाय सब समझाया
पर कइयों के समझ न आया।

अब न नफ़रत न लगे नजर
सिर्फ एक कोरोना का डर
दुनिया में कैसा ढाया कहर
तू रह चौकन्ना आठों पहर ।

आज लौकडाउन का दौर
सब बैठे हैं चुप अपनी ठौर
जीने का सीख अब नया तौर
पतझड़ जाए, आए नई बौर।

पूरन चन्द्र काण्डपाल
06.05.2021

Tuesday, 4 May 2021

PPE kits : साहसिक कार्य पी पी ई किट पहनना

खरी खरी - 845 : पी पी ई किट्स पहनना बहुत साहसी कार्य

       चीन द्वारा उत्पन्न वैश्विक संकट कोविड -19 (कोरोना वायरस ) से विश्व में 15.46 करोड़ से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं जिनमें से 32.33 लाख दुनिया की छोड़ कर जा चुके हैं । भारत में इस रोग का पहला केस 30 जनवरी 2020 को पहचान में आया । आज देश में 2.05 करोड़ से अधिक लोग ग्रसित हैं ( जबकि 30.04.2020 तक करीब 31 हजार ग्रसित केस थे ) और 2.25 लाख से अधिक हमारे बीच से जा चुके हैं ( जबकि 30.04.2020 तक एक हजार मृत हुए थे।)  आज देश में कई जगह लौकडाउन चल रहा है । देश को बचाने के लिए हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम घर में रहें, केवल बहुत जरूरी कार्य के लिए मास्क पहनकर बाहर निकलें । घूमना या धर्म स्थलों में जाना जरूरी कार्य नहीं है । कोरोना के इस बिकराल रूप के लिए देश की जनता द्वारा इस रोग को गंभीरता से नहीं लिया जाना तो है इससे भी बढ़कर हमारे नीति नियंता जिम्मेदार हैं जिन्होंने धार्मिक - राजनैतिक - सामाजिक आयोजनों, कुंभ स्नान और 5 राज्यों सहित उत्तर प्रदेश के पंचायती चुनावों में कोरोना से बचने के सभी नियमों को ताक पर रख दिया। यदि उचित कदम उठाए होते तो आज ये हाल नहीं होता।  आज देश में कोरोना रोगी आक्सीजन के बिना दम तोड़ रहे हैं । हम किस मुंह से अपनी प्रगति का बखान कर रहे हैं ? उन लोगों को नमन जो कुछ जगहों पर रोटी के साथ आक्सीजन लंगर भी लगा रहे हैं।

          इस समय देश के कर्मवीर इस रोग को हराने में जुटे हैं । अस्पताल में रोगी से संपर्क करने वाले प्रत्येक कर्मवीर को पी पी ई ( पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट ) किट पहननी अनिवार्य है । सिर से लेकर पैर तक पूरे शरीर को ढकने के लिए कई परतों में यह किट पहनी जाती है जिसमें एडल्ट डाईपर भी शामिल है । इस किट से शरीर को हवा नहीं मिलती और असहजता पैदा होती है । जीवन को जोखिम में डालने वाले ये कर्मवीर इस किट को बड़ी हिम्मत और सही तरीके से पहनते हैं । थोड़ी सी असावधानी खतरनाक हो सकती है । ये कर्मवीर इस अवस्था में भी बड़े धैर्य और साहस से अपना कर्तव्य निभाते हैं । कई कोरोना फ्रंट लाइन वर्कर अपनी कुर्बानी दे चुके हैं।

       हम इन कर्मवीरों को सलाम कहते हैं, नमन करते हैं और सलूट करते हैं । इनका कर्म व्यर्थ न जाय इसलिए हमारी जिम्मेदारी है कि हम कोरोना को हराने के लिए घर में रहें तथा लौकडाउन का सम्मान करें । अब वैक्सीन लगाई जा रही है जिसे अवश्य लगाएं । वैक्सीन के लिए अपनी बारी की प्रतीक्षा करें और जागरूक रहें । इन पंक्तियों के लेखक ने सपत्नीक वैक्सीन की दोनों डोज लगा ली हैं और लोगों को वैक्सीन के लिए मोटिवेट करना जारी है । वैक्सीन लगाने के बाद किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं हुई ।  अभी भी कुछ लोग कोरोना को गंभीरता से नहीं ले रहे और धार्मिक स्थानों, बाजारों व पार्कों में जा रहे हैं तथा सड़कों पर घूम रहे हैं । सबसे बड़ा धर्म देश है । देश को बचाएं और घर में रहें तथा प्रत्येक कर्मवीर को घर बैठे दिल से शुभकामना दें ।

पूरन चन्द्र कांडपाल
05.05.2021

Naitikta : नैतिकता

खरी खरी - 844 :  नैतिकता - संवेदनहीनता

नैतिकता -

चुनाव पांच राज्यों का हुआ दो मई को अंत
क्रूर कोरोना दौर यह डस गया संत-असंत,

डस गया संत-असंत थम गया चुनाव का खेला
तंत्र ताकता रह गया देख रैली भीड़ का रेला,

कह 'पूरन' गिद्ध - बाज, खीज करत कांव टांव
जीते को नैतिकता सिखावे, जो हार गए चुनाव।

संवेदनहीनता -

कोरोना रोगी अस्पताल में सांस गिन रहा है,
पूरा देश आक्सीजन के लिए संघर्ष कर रहा है,
बेशर्म पंचायत चुनाव जीत का जलूस निकाल रहा है,
असहाय प्रशासन आंख मूंद तमाशा देख रहा है।

पूरन चन्द्र कांडपाल
04.05.2021

Monday, 3 May 2021

hara korona :हारा कोराना

खरी खरी - 842 : द्वि हजार बीस में हारौ कोरोना

(पिछाड़ि साल हारि गोछी कोरोना। उ दौर कि 03 मई 2020 कि कविता फिर देखो।)

चीन बै वायरस कोराना आय,
येल दुनिया कैं ही लै दे ।

तीस जनवरी द्वि हजार बीस
भारत में है पैलि तफ्तीश,
पुर देश में मची हलचल
फ़ैल कोरोना चारों दीश।
हाय रै चीना त्वील दुनिय कैं
य संताप किलै दे ? चीन...

पैल लौकडाउन ईक्कीस दिनक
दुसर हय उन्नीस दिनक,
नि थमी बीमारी फिर लगायौ न
तिसरि बार चौद दिनक।
चालीस दिनक लौकडाउनल
पुर देश कैं वसिलै दे । चीन...

लौकडाउन में यसि आफत
जो जां छीं वा वांईं रै गोयौ,
भुक मरण कि नौबत ऐ गेइ
काम धंध सब छुटि गोयौ।
हाहाकारल मजदूरों कैं
डरै बेर तिलमिलै दे । चीन...

सरकारी ऑडर ऐ गया
घर में आपण बंद रया,
जरूरी काम पड़ल जब
तबै खुट भ्यार ल्या या ।
देह दूरी के ख्याल करिया
मास्क महाव लगै दे । चीन...

मुफ्त राशन मुफ्त भोजन
सरकारों लै लगायौ जतन,
लैन भौत लाम है गा छी
कैकणी मिलौ कै नि मिलन ।
दानवीरों लै दान दी बेर
गरीबों कैं खाण खिलै दे । चीन...

एक तरफ बीमारी दहशत
दुसरि तरफ बिगड़ी बोल,
क्वे करैं रौछी देश सेवा
क्वे छणकैं रौछी जहर घोल।
अफवाहों लै कोरोना पर
रंग मजहबी चढै दे । चीन...

स्वास्थ्य कर्मी पुलिस डाक्टर
य बीच बनि गाय भगवान,
थाइ बजै बेर दी जगै बेर
देश लै कर इनर आहवान।
कर्मवीरों लै जोखिम उठै
कर्तव्य आपण निभै दे । चीन...

पूरन चन्द्र कांडपाल
03.05.2021

bheed ka rela : भीड़ का रेला

खरी - 843 : भीड़ का रेला

चुनाव जीत के जश्न में नहीं कोरोना रोक
कोर्ट आदेश की अवहेलना जो दिया था ठोक,

जो दिया था ठोक, नहीं कोरोना अनुशासन
पंचायत चुनाव मत गणना रेला मूक प्रशासन,

कह 'पूरन' तमाशबीन रहने की बन गई है रीत
क्यों सिस्टम सख्त नहीं हुआ,को हारे को जीत?

पूरन चन्द्र कांडपाल
03.05.2021

Saturday, 1 May 2021

Naanchhina ki yaad : नानछिना कि याद

खरी खरी 841 : नानछिना कि याद


      आज 02 मई  2021,दिल्ली कर्फ्यू के 13उं दिन छ । आब लौकडाउन 10 मई तक बढ़ि गो।  हम लोग आपण घर में परिवार दगै च्छयूं । जो लोग कोरोना वायरस दगै जुझैं रईं, ऊं महान लोग छीं । उनुकैं प्रणाम । भ्यार झन जया , भतेरै रया । मास्क जरूर लगाय या । एक दिन कोरोना जरूर हारल। नानछिनाकि याद पर य वीडियो देखिया। 

पूरन चन्द्र कांडपाल
02.05.2021