Tuesday, 12 January 2021

Uttraini kautik Buraradi : उत्तरैणी कौतिक बुराड़ी

मीठी मीठी - 555 : उतरैणी कौतिक 2021 (कुमाऊँ सांस्कृतिक कला मंच (पं) संत नगर (बुराड़ी) दिल्ली

      कोरोना के दौर में भी हमारे त्यौहार और संस्कृति को जीवंत रखने वाली सभी संस्थाओं और मनीषियों को हम नमन करते हैं ।  ऐसी ही एक संस्था है कुमाऊँ सांस्कृतिक कला मंच (पं) ( उत्तरैणी हमारी पहचान ) संत नगर, बुराड़ी दिल्ली -84 द्वारा 24वां उतरैणी पर्व (कौतिक) डी के कौनवेंट स्कूल सभागार बुराड़ी दिल्ली में करीब दो सौ आगंतुकों के जन-समूह के बीच मनाया गया । लोकगायिका श्रीमती कौशल पांडे के निर्देशन में स्वर साधना सांस्कृतिक कला मंच दिल्ली के कलाकारों द्वारा उत्तराखंडी गीतों पर आधारित उत्तरैणी गीतमाला कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया ।

     इस भव्य आयोजन में  हमारी भाषा, साहित्य, संस्कृति और उत्सवों को संजोए रखने का आह्वान किया । मंच से संचालन कर रहे संस्था के प्रतिनिधि श्री गिरीश जोशी जी ने इस अवसर पर उतरैणी के महत्व पर भी प्रकाश डाला । 13 जनवरी 1921 को बागेश्वर के उतरैणी कौतिक में कुमाऊँ केसरी बद्रीदत्त पांडे जी की हुंकार पर "कुली बेगार" के रजिस्टरों को सरयू-गोमती के संगम में बहा दिया गया और उत्तराखंड के लोगों ने कुली बरदायस से हमेशा -हमेशा के लिए मना कर दिया । अंग्रेज डिप्टी कमिश्नर लोगों के मर-मिटने के जोश और जज्बे  को देखकर गोली नहीं चला सका ।

     उतरैणी त्यौहार के दिन उत्तराखंड के उन शहीदों का स्मरण भी नितांत आवश्यक है जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में अपने प्राणों की आहुति दी । खुमाड़ गोली कांड (05.09.1942) में चार स्वतंत्रता सेनानी - गंगा राम, खीमानंद, बहादुर सिंह और चूड़ामणि भी इसी कड़ी में शहीद हो गए । इन अमर शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि । उतरैणी कौतिक के साथ इन अमर शहीदों का बलिदान हमें बताता है कि जब देश स्वतंत्रता संग्राम लड़ रहा था तो उत्तराखंडी भी पीछे नहीं रहे । उन्होंने इस आंदोलन में बढ़-चढ़ कर भागीदारी के साथ अपना बलिदान भी दिया । इस इतिहास को भी सांस्कृतिक मंचों पर अन्य मनोरंजन गीतों के साथ मंचित किया जाना चाहिए ।

       इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष श्री खीम सिंह रावत (उत्तरैणी वाले ) व उनकी पूरी टीम ने सभी आगंतुकों का स्वागत किया जिनमें समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े हुए प्रबुद्ध जन और गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे । इस आयोजन के लिए संस्था की पूरी टीम वास्तव में साधुवाद की पात्र है जिसने कोरोना संक्रमण से बचने के सभी उपाय किए जिनमें मास्क बांटना, क्षेत्र को सेनीटाइज करना तथा हस्त सेनीटाइजर का उचित प्रयोग कर इस सफल कार्यक्रम को अविष्मरणीय बना दिया । आयोजन में कोरोना संक्रमण से हमारे बीच से चल बसे दिवंगतों को भी श्रद्धांजलि दी गई । यह आयोजन 1 बजे से 6 बजे तक यू ट्यूब और फेसबुक लिंक पर प्रसारित किया गया । सभी को उतरैणी त्योहार की शुभकामना और हार्दिक बधाई । 

पूरन चन्द्र काण्डपाल
13.01.2021

Kas jaman aigo : कस जमान ऐगो

खरी ख़री - 772 : कस जमान ऐगो (II)

च्यालां क छीं गर्लफ्रैंड
च्येलियां क बौय फ्रैंड,
हाथों पर बादि रईं
फ्रेंडशिपाक बैंड,
क्वे घुमरीं पार्कों में
क्वे डवां मुणि भैरीं,
औणी जाणियाँ कि परवा
न्हैति बेफिकर हैरीं,
शरम लिहाजक
निशान लै मटिगो,
कस जमान देखौ
कस जमान ऐगो ।

आब जनम दिन लै
नईं तरिक ल मनूं रईं,
केक़ा क माथ बै
मोमबत्ती जगूं रईं,
तीन आंखर अंग्रेजी
सबूंल सिखी है,
अंग्रेजी में कूं रईं
हैपी बर डे,
जैल दी जगूण चैंछी
उ दी नीमू फैगो,
कस जमान देखौ
कस जमान ऐगो ।

मतलबाक लोग हैगीं
मतलबाक यार,
दिखावटी दुनिय में
दिखावटी प्यार,
मतलब निकलि गोयौ
पै भुलि जानी,
रूबरू मिलनी
अपन्यार है जानी,
धरम करम न्हैगो
मतलबी रैगो,
कस जमान देखौ
कस जमान ऐगो ।

पूरन चन्द्र काण्डपाल
12.01.2021

Sunday, 10 January 2021

Lal Bahadur Shashtri : लाल बहादुर शास्त्री

मीठी मीठी - 553 : भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री 

       आज 11 जनवरी, देशाक दुसार प्रधानमंत्री भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री ज्युकि पुण्यस्मृति । "लगुल" किताब बै लघुलेख उनार बार में याँ उधृत छ । विनम्रतापूर्वक श्रद्धांजलि ।

पूरन चन्द्र काण्डपाल

11.01.2021

kas jamaan aigo i : कस जमान ऐगो

खरी खरी - 771 : कस जमान ऐगो (I)

ब्या में बरेतिय लोग सिद


ब्योलि कै घर ऊंनी,


खै-पी बेर लिफाफ


ब्यौला बाप कैं पकडूंनी,


कै दगै बात करण क


टैम न्हैति बतूनी,


जैमाव डाउण है 


पैलिकै खसिकि ऊंनी,


बरयात कूण में सिरफ


ब्यौलक परिवार वां रैगो,


कस जमान देखौ


कस जमान ऐगो ।

ब्याक लगन कि


परवा क्वे नि करन,


वीडियो फोटो वलांक


सब जाग हुकम चलूं,


खिसाई बामण चुपचाप


टकटकी लगै भैरां,


कभतै झपकि ल्युछ


कभतै आंख मिनू,


फोटोग्राफी भलि है गेई


समझो भल ब्या हैगो,


कस जमान देखौ


 कस जमान ऐगो ।

पूरन चन्द्र काण्डपाल


11.01. 2021


Saturday, 9 January 2021

Chandra singh Rahi : चन्द्र सिंह राही

स्मृति - 551 : चन्द्र सिंह राही : प्रेम का जोगी, आज पुण्यतिथि

     राही जी ( चन्द्र सिंह राही) 10 जनवरी 2016 को दिवंगत हुए । आज 10 जनवरी 2021 को उनकी 5 वीं पुण्यतिथि है | जब वे 73 वर्ष के ही थे परन्तु यात्रा का काल चक्र पूर्ण हो चुका था | विगत दो दशकों से मैंने कई बार उनके गीत सुने | गीत प्रस्तुति का उनका एक निराला ही अंदाज था | याद करिए उनकी गजल “कुतगली ना लगौ |” उन्हें हुड़का सहित कई वाद्यों की महारथ हासिल थी | वे लोक गायक तो थे ही एक गीतकार भी थे | चार दशकों तक उन्होंने लोकगायकी में लोगों का मनोरंजन किया | ‘हिलमा चांदी को बटना, भाना हो रंगीली भाना , स्वर्ग तारा य जुनाली राता.., जैसे कई गीतों कों उन्होंने स्वर दिया जिनके मुखड़े भुलाए नहीं भूलते |

      राही जी ने ‘दिल को उमाल, रमछौल, धै और गीत गंगा’ आदि पुस्तकैं भी लिखी | गीत गंगा 126 गढ़वाली गीतों का संग्रह है जो 2010 में प्रकाशित हुआ | इस गीत गंगा में नदी, पहाड़, जंगल, घर-आगन, लोक  जीवन, पशु-पक्षी, मौज-मस्ती, हंसी- खुशी और मिलन- बिछोह के गीत हैं | राही जी अपनी भाषा के प्रति समर्पित थे |  मंच संचालकों को कई बार वे अपने एक अद्भुत अक्खड़ अंदाज में कह भी देते थे, “आपणी भाषा में बोलो यार, कतु क मिठी भाषा छ हमरि” |  वे कन्हैयालाल डंडरियाल सहित कई गढ़वाली कवियों की चर्चा भी करते थे | ‘ प्रेम को जोगी’ गीत में वे कह गए, “ तेरा प्रेम को भूको छौं मुखडी ज़रा बतै जा |”

    राही जी की कला का श्रृंगार भी हुआ | उन्हें कएक सम्मान भी मिले | इनमें एक सम्मान उत्तराखंड भाषा संस्थान, उत्तराखंड सरकार, देहरादून से भी उन्हें वर्ष 2011-12 का ‘बालम सिंह जनौटी लोकभाषा सम्मान’ 12  दिसंबर 2011 को प्रदान किया गया | हम समारोह में साथ ही थे | आयोजन के समापन के बाद उस दिन वे मेरे साथ दून हॉस्टल देहरादून  से रेलवे स्टेशन तक साथ आए | इस दौरान उनसे उनके गीत गायन यात्रा संबंधी कई बातें हुई | राही जी वास्तव में प्रेम के भूखे थे जिसे हमने उनके गीत, संगीत और भाषा व्यवहार में लहलहाते देखा | राही जी की जीवन यात्रा भलेही थम गयी परन्तु उनकी ‘गीत गंगा’ की गंगोत्री कभी नहीं थमेगी | राही जी को विनम्र श्रद्धांजलि |

पूरन चन्द्र काण्डपाल, 


10.01.2021

Friday, 8 January 2021

Kisi 8 tarikh ko : किसी 8 तारीख को

खरी खरी -770 : किसी 8 तारीख को

      जिस तरह 8 नवम्वर 2016 को अचानक नोटबंदी की घोषणा हुई उसी तरह एक दिन किसी भी 8 तारिख को अचानक यह घोषणा भी कर दी जाय कि आज से देश का कोई भी राजनैतिक दल केवल चैक या कैशलेस से ही चंदा स्वीकार करेगा और चंदे का अधिकांश भाग बैंक में रखेगा तथा चंदे का पूरा हिसाब भी जनता को बताएगा । राजनैतिक दलों को इस दायरे में शीघ्र लाया जाय । नकद रहित की शुरुआत घर से होनी चाहिए । जब देश के सुरक्षा प्रहरी आय कर देते हैं तो जनप्रतिनिधि एवम् राजनैतिक दलों को भी कर के दायरे में लाया जाना देश के हित में होगा ।  साथ ही जिस तरह ग्राम प्रधान की योग्यता के लिए न्यूनतम शिक्षा और परिवार में बच्चों की संख्या अनिवार्य है उसी तरह विधायकों एवम् सांसदों के लिए भी ये शर्तें अनिवार्य होनी चाहिए । इसी तरह किसी दिन यह आदेश भी जारी हो कि सभी नेताओं, राजनीतिज्ञों और सरकारी कर्मचारियों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ेंगे तभी सरकारी स्कूलों की दशा सुधरेगी, वहां पाठ्य सामग्री एवम् स्टाफ भी पूरा होगा । यदि यह सब हो गया तो तभी भारत डिजिटल इंडिया और विश्व गुरु बन सकेगा ।

पूरन चन्द्र काण्डपाल,
09.01.2021

Bhagwan bhi surakshit naheen : भगवान भी सुरक्षित नहीं

बिरखांत- 352 : भगवान भी नहीं सुरक्षित

      अपने चिर परिचित चनरदा वही अपने अल्लहड़ अंदाज में मिलते रहते हैं | उनके पास कई वर्षों के समाचार पत्रों की वे कतरनें  रहती हैं जिनमें मंदिरों में चोरी की खबरें छपी होती हैं | चनरदा बताने लगे, “अरे साब इधर-उधर की तो खूब पढ़ते-लिखते हो ज़रा इन कतरनों को भी देखो | देश का कोई ऐसा मंदिर नहीं होगा जहां से आजतक कभी न कभी, कुछ न कुछ चोरी नहीं हुआ होगा | इन वर्षों में कर्णप्रयाग के चंडिका मंदिर से आठ छत्र; हल्द्वानी गौजाजाली मन्दिर से घंटे, कलश, नाग, त्रिशूल, नथ, हार, मुकुट, माला ,दीपक स्टैंड, लोटा और नकदी; केदारनाथ से मुकुट; दिल्ली के प्रशांत विहार बालाजी मंदिर से करीब बीस लाख मूल्य की वस्तुएं, जहांगीरपुरी से राम- जानकी- 90लक्षमण की मूर्ति |

      इसी तरह दिल्ली के भजनपुरा, वैशाली, सूरजमल पार्क, जगतपुरी, पांडव नगर, महरौली, वेलकम, आन्दंद विहार, दिलशाद गार्डन, सप्तऋषि गार्डन सहित पिलखुवा, सिरोही आदि स्थानों के मंदिरों में भी चोरी हुई | आए दिन धार्मिक स्थलों में अपराधिक घटनाएं होती रहती हैं | इन कुकृत्यों को अंजाम देने वालों में यदा कदा यहां के सेवादारों अथवा ‘उपासकों’ की मिलीभगत भी होती है | अब तो धर्मस्थलों के तथाकथित सेवादार महिलाओं के साथ वह कृत्य भी करने लगे हैं जिसकी चर्चा करना भी शर्मनाक है । हाल ही में ( 5 जनवरी 2021) बदायूं उ प्र की घटना बहुत ही दुखद है ।

     पूजा स्थलों की प्रत्येक वस्तु शक्ति का प्रतीक मानी जाती है | आस्था एवं शक्ति की प्रतीक जब ये मूर्तियां चोरी हो जाती हैं या धर्मस्थलों का खजाना लूटा जाता है या किसी महिला के साथ यहां अमानवीय कृत्य होता है तो मन में प्रश्न उठने लगता है कि भगवान ने स्वयं को या वहां की वस्तुओं को या उस महिला को बचाते हुए इन राक्षसों को दण्डित क्यों नहीं किया ? उस नरपिशाच पर स्वयं वह मूर्ति ही गिर जाती, पंखा या कोई अन्य वस्तु गिर जाती, उसे ठोकर ही लग जाती |

      ‘यह कलियुग है’ कह कर लोग अपनी श्रधा पर कोई खरोंच नहीं लगने देते लेकिन धर्मस्थलों में भगवान का इन नरपिशाचों पर प्रहार नहीं करना श्रधालुओं को अखरता जरूर है | धर्मस्थलों के परिसर की कोई दुर्घटना या धर्मस्थल की यात्रा के दौरान की दुर्घटना अन्य स्थानों की दुर्घटना से कहीं अधिक अखरती है | इन सब घटनाओं से मन में कबीर के भजन “मोको कहां ढूंढें रे बन्दे’ का स्मरण हो आता है | कबीर ने भगवान के मूरत-तीरथ, जप- तप, व्रत-उपवास, काबा-कैलाश, क्रियाक्रम, जोग- संन्यास में नहीं होने की बात कही है | उनका मानना है कि एक अच्छे- सच्चे इंसान के मन में ही भगवान वास करते हैं | सत्य भी यही है भगवान पूजा स्थलों में नहीं होते | पूजा स्थल तो केवल भगवान् का स्मरण करने की एक जगह है जहां ईश्वर स्मरण के साथ अन्य आगंतुकों से भी मिलाप हो जाता है |”

     ( ये चनरदा कौन हैं ? चनरदा लेखक का वर्षों पुराना वह कर्म पुजारी किरदार है जो किसी धर्म- संप्रदाय -जाति- मजहब का न होकर सबसे पहले एक इंसान है, एक भारतीय है और समाज में व्याप्त विषमता, वैमनस्यता, असमाजिकता, जुगाड़बाजी, चाटुकारिता, अन्धविश्वास, अंधभक्ति और असहिष्णुता पर गांधीगिरी के साथ अपना मुंह खोलने की हिम्मत से सराबोर है | )

पूरन चन्द्र काण्डपाल
08.01.2021