Friday, 8 November 2019

kitane devta : कितने देवता

खरी खरी - 516 : कितने देवता ?

     देवता कितने हैं ? इस पर लोग बहस करते रहते हैं । देवता तो 33 कोटि हों या 33 करोड़ । ( बताए 33 कोटि अर्थात 33 प्रकार के हैं ।) पर बहस क्यों हो ? यह अनंत बहस है । कभी समाप्त नहीं होगी । हम एक ईश्वर की बात करें । जिसको जो देवता पूजना हो पूजे । ईश्वर/भगवान केवल एक है और वह निराकार है । उसमें विश्वास रखने से हमें ताकत मिलती है, शांति मिलती है और अंहकार दूर रहता है तथा दुःख को सहने की शक्ति मिलती है । यह श्रध्दा का सवाल है । यही आदि औऱ यही अंत । इस पर इससे ज्यादा वार्ता करना व्यर्थ है ।

        हम वर्तमान में जी रहे हैं और पौराणिक युग की चर्चाओं को ही समय दे रहे हैं । यह बहस क्यों नहीं होती कि देश के बच्चे कुपोषित क्यों हैं ? यह बहस क्यों नहीं हो कि देश अंधविश्वास के घेरे से बाहर कैसे आये ? बहस तो कितने दीए जलाएं, इस पर भी होनी चाहिए और पटाखों के निषेध पर भी होनी चाहिए । यह वार्ता क्यों नहीं होती कि नदियों में विसर्जन सहित सभी प्रकार की गंदगी मत डालो । इस वैज्ञानिक युग में उस धरती की बात नहीं हो रही जो हमारे शोषण से त्रस्त है और जलवायु का अचानक परिवर्तन हो रहा है ।  पर्यावरण को बचाने की बहस भी बहुत जरूरी है । प्रत्येक त्यौहार पर एक पौधा रोपने की भी बहस होनी चाहिए । अतः समाज को स्वयं चेतना/सोचना होगा कि हम अपने को किस बहस में उलझाएं ?

पूरन चन्द्र काण्डपाल
08.11.2019

Wednesday, 6 November 2019

Kab thamegi sadak durghatanasyein :कब थमेगी सड़क दुर्घटनाए

बिरखांत- 289 : कब थमेंगी सड़क दुर्घटनाएं 

    एक सर्वे के अनुसार हमारे देश में प्रतिवर्ष सड़क दुर्घटना में करीब एक लाख तीस हजार (350 मृत्यु प्रतिदिन अर्थात प्रति चार मिनट में एक मृत्यु ) लोग अपनी जान गंवाते हैं | इस तरह बेमौत मृत्यु में हमारा देश विश्व में सबसे आगे बताया जाता हैं | कैंसर, क्षय रोग, मधुमेह, हृदय गति व्यवधान आदि रोंगों के बाद देश में सड़क दुर्घटना में मरने वालों के संख्या आती है | इस बेमौत मृत्यु में दुपहिया वाहन चालक/सवार सबसे अधिक हैं जिसमें 18 वर्ष से कम उम्र के किशोरों की मृत्यु दर 12 % है | सड़क दुर्घटना में करीब पांच लाख लोग घायल होते हैं जिनमें अधिकाँश अपंग हो जाते हैं | दो वर्ष पहले केन्द्रीय मंत्री गोपीनाथ मुंडे की अकाल मृत्यु भी 3 जून 2014 को सड़क दुर्घटना में हुयी थी | वर्तमान में कोई भी दिन ऐसा नहीं बीतता जब हम टी वी में क्षत-विक्षत शव तथा चकनाचूर हुए वाहनों के दृश्य नहीं देखते हों 

     देश की राजधानी में प्रतिदिन सड़क दुर्घटना में पांच लोग मरते हैं जिनमें औसतन दो पैदल यात्री और दो दुपहिया चालक हैं | प्रति सप्ताह दो  साइकिल चालक तथा एक कार चालक सड़क दुर्घटना में मरता है | सड़क दुर्घटनाओं के मुख्य कारण हैं बिना लाइसेंस के वाहन चलाना, वाहन चलाने का अल्पज्ञान होना, सिग्नल जम्पिंग, वाहन से सिग्नल नहीं देना, ओवर स्पीड (गति सीमा से अधिक ), ओवर लोड, शराब पीकर वाहन चलाना, रोड रेस (एक दूसरे से आगे निकलने की जल्दी), सड़क पर गलत पार्किंग, चालक की थकान या झपकी आना, लापरवाही, डेक का शोर अथवा मोबाइल पर ध्यान बटना आदि | विपरीत दिशा से आरहे वाहन की गलती, हेलमेट कोताही, सड़क के गड्डे, तथा मशीनी खराबी आदि भी भीषण दुर्घटना के अन्य कारण हैं |  

     इन सब दुर्घटनाओं का मुख्य कारण है लोगों में क़ानून का डर नहीं होना | हमारे देश के लोग विदेश जाते हैं और वहाँ के नियम-क़ानून का पालन बखूबी करते हैं | स्वदेश आते ही यहां के क़ानून को अंगूठा दिखा देते हैं क्योंकि यहां क़ानून का डर नहीं है | सब जानते हैं कि शराब पीकर वाहन चलाने सहित सभी सड़क सुरक्षा के नियमों की अवहेलना में जुर्माना है परन्तु लोगों को जुर्माने की चिंता नहीं है | उन्हें घूस देकर छूटने का पूरा भरोसा है या जुर्माने की रकम अदा करने के फ़िक्र नहीं हैं | प्रतिवर्ष लाखों चालान भी कटते हैं |

      हमारे देश में बच्चे अपने अभिभावकों का वाहन खुलेआम चला कर दुर्घटना में कई निर्दोषों को मार देते हैं | कई बार बड़ी तेजी से उड़ती मोटरबाइक में एक साथ बैठे छै- सात बच्चे सड़क पर जोर जोर से हॉर्न बजाते हुए देखे गए हैं | इन दुपहियों में कार या ट्रक का हॉर्न लगाकर, रात हो या दिन जोर जोर से हॉर्न बजाते हुए उड़ जाना इन बिगडैल बच्चों का फैशन बन गया है | पुलिस या तो होती ही नहीं या देख- सुन कर भी अनजान बनी रहती है | अब जब दुर्घटनाओं की अति हो गई तब इन नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने पर अभिभावकों को दण्डित करने की मांग उठ रही है | सड़कों पर गड्ढे भी दुर्घटना का मुख्य कारण बन गए है जिन्हें शीघ्र भरा जाना चाहिए ।

     इस बीच उत्तराखंड में भी सड़क दुर्घटनाओं की बाड़ सी आ गई है जिससे कई घर उजड़ गए हैं | बारात, पर्यटन, तीर्थाटन, व्यवसाय आदि से जुड़े कई वाहन आये दिन दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं | इसका कारण भी सभी सड़क सुरक्षा के नियमों की अवहेलना ही है | इन सभी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए हमें अपने घर से शुरुआत करनी पड़ेगी | अपने नाबालिग बच्चों को भूलकर भी कोई वाहन नहीं दें ताकि सड़क पर कोई अनहोनी न हो | लाइसेंस प्राप्त बालिंग बच्चों का प्रशिक्षण भी उत्तम होना चाहिए | आप स्वयं भी वाहन चलाते समय संयम रखें क्योंकि दुर्घटना से देर भली | स्मरण रहे आपका परिवार प्रतिदिन आपकी सकुशल घर वापसी के इंतज़ार में रहता है |

पूरन चन्द्र काण्डपाल

07.11.2019 


 


Tuesday, 5 November 2019

Dhar wor - Dhar por :धार वोर -धार पोर

मीठी मीठी - 379 : 'धार वोर - धार पोर ' - दिनेश ध्यानी

    3 नवंबर 2019 हुणि हिंदी और गढ़वालि क वरिष्ठ साहित्यकार दिनेश ध्यानी ज्यूल मिकैं आपण लेखी गढ़वालि कविता संग्रह  "धार वोर - धार पोर "  गढ़वाल भवन नई दिल्ली में भेंट करी ।  70 कविताओंक य कविता संग्रह में 22 छिटगा कविता लै छीं । ध्यानी ज्यूल य किताब वरिष्ठ साहित्यकार दिवंगत भगवती प्रसाद नौटियाल ज्यूक चरणों में भेंट करि रैछ । नौटियाल ज्यू कि भौत याद ऐ किलै कि एक पत्रिका में उनार और म्यार आँखर दगड़ - दगड़ी छपछी भौत पैली। किताब में वरिष्ठ साहित्यकार मदन मोहन डुकलान ज्यूल भलि भूमिका लेखि रैछ । विशेष बात य छ कि ध्यानी ज्यूल य पोथि में करीब तीन दर्जन कलमकारों, कवियों और पत्रकारों  कैं याद करि रौछ जनुमें एक नाम म्यर लै छ ।

       कविता संग्रह में सबै कविता एक है भाल एक छीं । कैकि चर्चा करूं और कैकि नि करूं है जांरै । फिर लै कविता वन्दना, धार वोर - धार पोर, बुबा जी, पाणी, नाता -रिश्ता, तेरि याद, भेदभाव, फूलदेई और छिटागा भौत भाल और मार्मिक कविता छीं । कविता वन्दना में मां सरस्वती हैं प्रार्थना छ - " बेटि - ब्याटा फरक नि हो कखि, जाति - पाति न हंकार हो ।"

      एक कविता, कविता संग्रहक नाम पर लै छ,  'धार वो र - धार पोर' । कविताक भाव देखो -

"अद बाटम च जिंदगानी
इनै उनै ठौर निरै
धार वोर - धार पोर
झट्ट छंटेनु बसौ नि  हवै ।"

    कविता 'लासनौ पात ' में य दुख प्रकट है रौछ कि खेति बांजि हैगे और एक लासण क पतेल लै हरै गो । कविता ' बुबा जी ' भौत मार्मिक छ । बौज्यू कि याद कवि हृदय में जमि हुई छ, "

"अमणि बुबा जी
नि छन हम्हरा बीच
पण वोंकि बुद्धि -सीख
बा टुल बाथौ पाणी रैंद
हमुथैं दिन रात ।"

    कविता ' नाता - रिश्ता ' लै भौत वेदना भरी कविता छ जमें रिश्तों कि चिंता है रैछ -

"मठु -मठु कै, जरा -जरा कैकि
नाता रिश्ता हर्चंणा छन
पीठि का अपणा भै दगड्या
घड़ि म सोरा हूणा छन ।"

एक छिटगा लै देखो -

" सक अर सुबौ न बढै दे
दूरी हमरा दरम्यान
नथर यथगा बुरु
तु बि नि छै, मि बि नि छौं ।"

   उम्मीद करनू कि सब पाठकोंल य कविता संग्रह पढ़न चैंछ । कविताओं में उत्तराखंडक  धरातल और खुशबू भौत महकि रैछ । जो लै यूं कविताओं कैं पढ़ल उकैं वांकि अन्वार जरूर मिललि । ध्यानी ज्यू कैं भौत - भौत बधै और शुभकामना । संपर्क - 9968502496, 9319667106.

पूरन चन्द्र कांडपाल
06.11.2019

Monday, 4 November 2019

Nau varshak byaa : नौ वर्षक ब्या

मीठी मीठी - 378 : कहानी संग्रह " नौ वर्षक ब्या" - रमेश हितैषी

     3 नवम्बर 2019 हुणि गढ़वाल भवन नई दिल्ली में उत्तराखंड आर्य समाज विकास समिति (पं) दिल्ली द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन समारोह में हिंदी, कुमाउनी और गढ़वालि भाषाक लेखक रमेश हितैषी ज्यू कि पांचू किताब कुमाउनी कहानि संग्रह " नौ वर्षक ब्या" क लोकार्पण हौछ ।

      य किताब में उत्तराखंडक धरातल दगै जुड़ी हुई 22 कहानि छीं । यूं कहानियों में पहाड़क लोकजीवन, दुख -पीड़, रहन- सहन, रीति -रिवाज, भाषा -संस्कृति, शिक्षा - स्तर, स्यैणियांक कंकाव, अंधविश्वास कि जकड़, नशा -धूम्रपान कि राव -घोव  देखण  में ऐंछ ।  हितैषी ज्यूू कि कहानियों में कल्पना बिलकुल नजर नि ऊंनि बल्कि यूं कहानियों में यथार्थ भरी हुई छ । समाज में जस लै उनुकैं नजर आ, उनूल उई टिपि दे । सामाजिक विषमता पर यूं कहानियों में भौत वेदना छ ।

      कहानी "नौ वर्षक ब्या", "मोती बल्द", "हुड़क्याण" "पिरमू सिपाइ" "रतनु बैदि" आदि एक है एक भौत भाल कहानि छीं । कहानियों में देशप्रेम, कर्म -संस्कृति कि झलक लै छ और सामाजिक सौहार्द कि अपील लै छ । उम्मीद छ कि अतिशयोक्ति है दूर और पारिवारिक संवेदना में भरपूर य कहानि संग्रह पाठकों कैं भल लागल । किताब प्राप्ति लिजी मोब.9910679220 पर संपर्क करण चैंछ ।

पूरन चन्द्र कांडपाल
05.11.2019

Sunday, 3 November 2019

Arya samaaj vikas samiti :आर्य समाज विकास समिति

मीठी मीठी - 377: उत्तराखंड आर्य समाज विकास परिषद में  हमरि भाषाक कवि सम्मेलन

      बेई 3 नवम्बर 2019 हुणि गढ़वाल भवन नई दिल्ली क अलकनंदा सभागार में उत्तराखंड आर्य समाज विकास समिति (पं) कि को - आपरेटिव (अर्बन) थ्रिफ्ट/क्रेडिट सोसाईटी लि. दिल्ली द्वारा 10उं वार्षिक आम बैठक कि बाद कुमाउनी - गढ़वाली कवि सम्मेलन आयोजित करिगो । य कवि सम्मेलन में करीब 28 कवियों ल काव्य पाठ करौ और अध्यक्षता वरिष्ठ कवि ललित केशवान ज्यूल करी । कवि सम्मेलन में काव्य पाठ करणी कवि छी सर्वश्री ललित केशवान, पूरन चन्द्र कांडपाल, दिनेश ध्यानी, रमेश हितैषी, चंदन प्रेमी, ओम प्रकाश आर्य, मदन डुकलान,  गिरीश भावुक, पयाश पोखड़ा, डॉ सतीश कालेश्वरी, द्वारका प्रसाद चमोली, नीरज बवाड़ी, जगत कुमाऊनी, जगमोहन रावत, सुरजीत सिंह, अनूप रावत, प्रकाश मिलनसार, विरेन्द्र जुयाल, संतोष जोशी, गोविंद राम, बी पी जुयाल, जगदीश तिवारी, कीर्तन कुमार, आशीष सुंदरियाल, रोशन लाल, डॉ सुशील सेमवाल, प्रकाश आर्य और संजय आर्य ।

      हाम उत्तराखंड आर्य समाज विकास समिति कैं विशेष धन्यवाद दीण चानू कि उनूल आपणी वार्षिक बैठक में हमरि भाषा क कवि सम्मेलन आयोजित करौ । य तब हौछ जब  उनार मन में हमरि भाषा कैं सिंचित करण कि सोच मौजूद छी । य मौक पर संस्था द्वारा कुमाउनी - गढ़वाली साहित्य बेचण क काउंटर लै उपलब्ध करिगो जां बै कएक साहित्यकारों क किताब लोगों ल ख़रीदीं । य मौक पर रमेश हितैषी ज्यू रचित कुमाउनी कहानि संग्रह "नौ वर्ष के ब्या " क लोकार्पण लै हौछ जैकि सूक्ष्म समीक्षा लै करिगे।  सम्मेलन कैं डॉ सत्येन्द्र प्रयासी और वरिष्ठ पत्रकार चारु तिवारी ज्यू ल लै संबोधित करौ । य मौक पर पत्रकार सत्येन्द्र रावत, संस्थाक अध्यक्ष गुसाई राम आर्य, UFNI अध्यक्ष श्रीमती संयोगिता ध्यानी समेत कएक गणमान्य व्यक्ति और संस्थाक पदाधिकारी मौजूद छी । सफल और सुव्यवस्थित मंच संचालन रमेश हितैषी ज्यूल करौ । जल पान व्यवस्था क साथ अध्यक्ष द्वारा सबै आगंतुकों आभार व्यक्त करिगो ।

पूरन चन्द्र कांडपाल
04.11.2019

Saturday, 2 November 2019

paramveer chakra :परमवीर चक्र

T824.आधुनिक युवा क्रिकेट खिलाड़ियों - फिल्मी सितारों के नाम जानते हैं लेकिन वे किसी परमवीर चक्र -अशोक चक्र विजेता का नाम नहीं जानते । देश में 21 परमवीर चक्र विजेता हैं, 14 मरणोपरांत । देश में 69 अशोक चक्र विजेता हैं, 59 मरणोपरांत । शत शत नमन आपकी वीरता को । जयहिंद ।

Friday, 1 November 2019

Dilli mein uttrakhandi sansthayein : दिल्ली में उत्तराखंडी संस्थाएं

खरी खरी - 515 : दिल्ली में उत्तराखंडी संस्थाएं

      राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में अनुमान लगाकर लोग बताते हैं कि यहां लगभग 25 से 30 लाख तक उत्तराखंड के लोग रहते हैं जो दिल्ली की आबादी ( 1.9 cr  वर्ष 2011 ) का 7वां हिस्सा बताया जाता है । इस जनसंख्या की कोई ऑपचारिक गिनती नहीं है । उत्तराखंड एकता मंच के नाम से 20 नवंबर 2016 को  दिल्ली के रामलीला मैदान में एक रैली भी उत्तराखंड समाज ने की । वहां लोग आए परंतु कितने लोग आए उसका भी अनुमान नहीं लगाया जा सका । ( कृपया किसी को ज्ञात है तो बताने का कष्ट करें ।) इतना जरूर है कि यह भीड़ अनुमानित जनसंख्या के हिसाब से बहुत कम थी क्योंकि रामलीला मैदान की कैपेसिटी लगभग एक लाख से अधिक बताई जाती है । दिल्ली एनसीआर में उत्तराखंडी जनसंख्या की करीब 400 से 500 तक (अनुमानित ) सामाजिक संस्थाएं बताई जाती हैं । इनकी भी गिनती किसी ने  नहीं की हैं लेकिन उत्तराखंडी समाज की संस्थाएं दिल्ली के कोने - कोने में या हर गली - मोहल्ले में हैं । इन संस्थाओं में पंजीकृत और अपंजीकृत दोनों प्रकार की संस्था हैं जो अपनी संस्कृति, भाषा, त्यौहार और रीति - रिवाजों को सिंचित करते रहते हैं । यही उत्तराखंड समाज की एक बहुत बड़ी पहचान है ।

         पंजीकृत संस्थाओं में अधिकांश संस्थाएं पंजीयन कानून 1860 के हिसाब से निरंतरता नहीं बनाए रखती । प्रत्येक पंजीकृत संस्था को प्रतिवर्ष 31 मार्च को बैलेंस सीट और बैंक खाते के परिचालन का विवरण अपनी संस्था के सदस्यों को महासमिति की आम बैठक में देना होता है । यही नियम प्रत्येक RWA के लिए भी होता है । हम सब कई ऐसी संस्थाओं को जानते हैं जो पंजीकृत केवल लेटर हेड में हैं जबकि जमीन में उनकी कभी कोई क्रियान्वयन गतिविधि नजर नहीं आई । इनमें कुछ ऐसी संस्थाएं भी हैं जिनको दो दसक से भी अधिक हो गए हैं । पता नहीं संस्था है भी या नहीं परन्तु उनके पदाधिकारी अवश्य यदा कदा कई मंचों से पुकारे जाते हैं, तब पता लगता है कि अमुक संस्था भी कहीं न कहीं है ।

        कुछ मित्रों को इस बात का पता नहीं है कि वार्षिक ऑडिट, बैलेंस शीट और संस्था में यदि कुछ बदलाव हुआ है तो इसकी सूचना पंजीयक सोसाइटी को देना आवश्यक होता है अन्यथा उनका पंजीयन रद्द हो जाता है । पुनः पंजीयन के लिए फिर नए सिरे से पूरी कार्यवाही करनी होती है । सभी मित्रों से अनुरोध है कि यदि आपके पास दिल्ली एनसीआर में उत्तराखण्डियों की जनसंख्या और सामाजिक संस्थाओं की अनुमानित संख्या ज्ञात हो तो साझा करने का कष्ट करें । संस्थाओं को जीवंत रखना आसान कार्य नहीं है । अपने समाज के लिए जनहित में प्रतिबद्ध इन सभी संस्थाओं को हम नमन करते हैं ।

पूरन चन्द्र कांडपाल
02.11.2019