Monday, 7 October 2019

Bhartiya vayu sena ko salootवायु सेना को सलूट

मीठी मीठी - 363 : भारतीय वायुसेना को सलूट

     आज 08 अक्टूबर भारतीय वायुसेना दिवस है । इस शुभ अवसर पर देश की वायुसेना को हार्दिक शुभकामनाएं | वायुसेना के एकमात्र परमवीर चक्र विजेता फ़्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखूं को आज हम पुनःशत शत नमन करते हैं | सेखूं को युद्ध के समय वीरता का यह सर्वोच्च पुरस्कार 1971 के भारत- पाक युद्ध में मरणोपरांत प्रदान किया गया  था | वर्तमान में भारतीय वायुसेना के सर्वोच्च अधिकारी (मुखिया, CAS)  एयर चीफ मार्शल राकेश कुमार सिंह भदौरिया हैं ।

       कारगिल युद्ध (1999) में  वायुसेना के आपरेशन 'सफ़ेद सागर' को भी देश कभी नहीं भूलेगा जब उसने टाइगर हिल, जुबेर और तोलोलिंग के शिखरों पर दुश्मन के परखचे उड़ाए थे | साथ ही केदारनाथ आपदा (2013) को हम कैसे भूल सकते हैं जब हमारी वायुसेना ने आपदा में घिरे  हजारों असहाय लोगों की जान बचाई थी | विंग कमांडर अभिनंदन, वीर चक्र, ने 27 फरवरी 2019 को अपने मिग 21 बिसन फाइटर से  पाकिस्तान का F16 फाइटर गिराया था और 60 घंटे पाकिस्तान में बंदी रहकर स्वदेश वापस आए थे । अपनी लाडली वायुसेना को 'ग्रेट रेड सलूट' |

"सूखा बाढ़ भूकम्प दंगा
तुरत प्रकट हो जाता तू,
हर त्रासदी में देश का रक्षक
हर गर्दिश में सखा है तू ।"

पूरन चन्द्र काण्डपाल
08.10.2019

Sunday, 6 October 2019

30 ghante ki ramlila 3 ghante mein :30 घंटे की रामलीला 3 घंटे में :

मीठी मीठी - 362 : 30 घंटे की रामलीला का मंचन 3 घंटे में 

     दस दिन की रामलीला को मात्र एक दिन में मंचित करना आसान तो नहीं परन्तु यह प्रयास कर दिखाया उत्तराखंड के गीत - संगीत - नाट्य निदेशक शिवदत्त पंत जी ने । कल 6 अक्टूबर 2019 की संध्या को प्यारेलाल भवन आई टी ओ नई दिल्ली में रुद्रवीणा संस्था दिल्ली द्वारा 10 दिनों में मंचित होने वाली रामलीला को मात्र 3 घंटे में मंचित किया गया । इस आयोजन में मुख्य अतिथि पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी एवम् सांसद अजय भट थे ।  दर्शकों से भरे हुए सभागार में मैंने  समाजसेवी सुधीर पंत, पत्रकार चारु तिवारी, खिमदा, कला निर्देशक गंगादत्त भट्ट और हेम पंत जी के साथ रामलीला का मंचन देखा ।

           निश्चित समय से कुछ विलंब के साथ रामलीला का शुभारंभ  'श्रीरामचन्द्र कृपालु भजमन ' प्रार्थना के साथ  हुआ।  इसके बाद नट- नटी संवाद, रावण का भगवान शिव से वर मांगना, राजा दशरथ का पुत्रेष्ठी यज्ञ, राम जन्म, विश्वामित्र का राम - लक्ष्मण को राजा दशरथ से मांगना, तड़का बध, धनुष यज्ञ, सीता स्वयंवर, परशुराम - लक्ष्मण संवाद,  मंथरा - केकई संवाद,  कैकेई - दशरथ संवाद, राम - सीता और लक्ष्मण का वन गमन , सीता हरण, सबरी मिलन, अंगद - रावण संवाद और राम  - रावण युद्ध, राजतिलक आदि  कई दृश्य मंचित किए गए । स्वाभाविक है जिन दर्शकों ने 10 दिन की रामलीला देखी है उन्हें बहुत कुछ देखने को नहीं भी मिला होगा। परन्तु हम जानते हैं कि पूरी रामलीला को 3 घंटे में समेटना बहुत कठिन काम है । फिर भी उत्तराखंड के लोगों को इन 3 घंटों में पर्वतीय रामलीला का लुभावना धरातलीय ऐहसास तो  शिवदत्त पंत जी ने करा ही दिया ।

        पात्रों पर दृष्टि डालें तो सभी पात्रों का अभिनय उत्कृष्ट था । नट - नटी,  शिवजी, दशरथ, कैकेई , मंथरा, जनक, राम, सीता, लक्ष्मण, परशुराम, रावण, वशिष्ठ , विश्वामित्र, सुमंत, ताड़का, सूपनखा, मृग,  दरवान सहित सभी पात्रों ने अपने अभिनय से दर्शकों को बांधे रखा।  पार्श्व गायन में स्वयं शिवदत्त पंत जी, पुत्री दीपा पंत और अन्य गायकों ने अच्छी प्रस्तुति दी । संगीत की मधुर धुन का निर्देशन विरेन्द्र राही जी ने किया। वस्त्र एवम् रूपसज्जा दोनों उत्कृष्ट एवम् आकर्षक थे । दृश्य, प्रकाश, मंच सज्जा एवम् स्पेशल इफेक्ट्स भी उत्तम थे । कुल मिलाकर रुद्रवीणा की टीम का यह कला प्रदर्शन बहुत रोचक और शैलीवद्ध था । शिवदत्त पंत जी और उनकी सम्पूर्ण टीम को इस सफल आयोजन के लिए बधाई और शुभकामना । 

पूरन चन्द्र कांडपाल


07.10.2019


Saturday, 5 October 2019

PayslPaayal nam chhi week : पायल नाम छि वीक

मीठी मीठी - 361 :  पायल नाम छि  वीक  

    पायल उनियाल एक भलि गढ़वालि कवयित्री छी जो मात्र 37 साल कि उमर में 5 अक्टूबर 2018 हुणि य दुनिय कैं छोड़ी बेर न्हैगे । उ बीमार है बेर या क्वे दुर्घटना में नि मरि बल्कि वील आपणी अबघात आफी करि दी । के दुख त जरूर हुनल उकैं ।  फिर लै वील यस नि करण चैंछी । बेई 5 अक्टूबर 2019 हुणि उत्तराखंड लोक भाषा साहित्य मंच दिल्ली, आर्यसमाज विकास समिति दिल्ली और गढ़वाल हितैसिणी सभा दिल्ली व अन्य साहित्य मित्रों क सहयोग ल वीकि पैल पुण्य तिथि गढ़वाल भवन नई दिल्ली में मनै । दुःख कि बात य छ कि य मौक पर पायलक न क्वे मैत बै छि और न सरास बै । सब साहित्य दगै जुड़ी हुई लोग छी । पायल करीब 7 दर्जन अप्रकाशित कविता य दुनिय में आपणी निशाणि छोड़ि गे ।

       य मौक पर करीब द्वि दर्जन कवियोंल कुमाउनी और गढ़वालि में पायल कैं काव्यांजलि दी । काव्यांजलि दिणियां में शामिल  छी - सर्वश्री ललित केशवान, पूरन चन्द्र कांडपाल,  जयपाल सिंह रावत, दिनेश ध्यानी, पयास पोखड़ा, दर्शन सिंह रावत, चंदन प्रेमी, रमेश हितैषी, ओम प्रकाश आर्य, बी पी जुयाल, जगनमोहन जिज्ञासु, योगेश भट्ट, गिरधारी रावत,  सुश्री रामेश्वरी नादान, सुरजीत सिंह, विरेन्द्र जुयाल, अनूप रावत, द्वारिका चमोली, प्रदीप खुदेड, शंकर ढौंडियाल और खुद दिवंगत पायल उनियाल ( इंटरनेट बै अनूप रावत द्वारा ) । सर्वश्री पवन मैठाणी ज्यू, जलंधरी ज्यू , सत्येन्द्र रावत ज्यू,  मन मोहन बुड़ाकोटी ज्यू , इनू लोगों ल लै आपण  विचार धरीं । य सफल आयोजन क संचालन ध्यानी ज्यू ल करौ । अंत में सुश्री रामेश्वरी नादानल सबूं कैं धन्यवाद दे ।

पूरन चन्द्र कांडपाल
06.10.2019
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Friday, 4 October 2019

Swaroop Dhaundiyal : ढौंडियाल स्मरण

मीठी मीठी - 360 : स्वरूप ढौंडियाल स्मरण (85 वीं जयंती )

     कल 4 अक्टूबर 2019 को गांधी शांति प्रतिष्ठान नई दिल्ली में ' अलकनंदा ' परिवार द्वारा प्रख्यात लेखक, पत्रकार और ' अलकनंदा ' पत्रिका के संस्थापक संपादक  दिवंगत स्वरूप ढौंडियाल जी की 85वीं जयंती का आयोजन किया गया । इस अवसर पर कई  वरिष्ठ लेखकों ने अपने विचार प्रकट किए जिनमें मुख्य थे सर्वश्री राजेन्द्र सिंह पूर्व महानिदेशक कोस्टल गार्ड, डा. गंगा प्रसाद विमल, पंकज बिष्ट, डा. हरिसुमन बिष्ट, मंगलेश डबराल, अवतार सिंह रावत अधिवक्ता और महेश चंद्रा जी । सभी वक्ताओं ने अपने अपने तरीके से ढौंडियाल जी का स्मरण कर उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को याद किया ।  इस अवसर पर सभागार में कई साहित्यकार, पत्रकार और राजनीति से जुड़े व्यक्ति मौजूद थे । अलकनंदा पत्रिका के नए अंक और वल्लभ डोभाल जी की पुस्तक ' सैनिक संवाद ' का लोकार्पण भी इस अवसर पर किया गया । कार्यक्रम संचालन पत्रकार सुषमा जुगरान ने किया तथा ' अलकनंदा ' पत्रिका के संपादक विनोद ढौंडियाल ने आगंतुकों का आभार व्यक्त किया ।

        इस बात को भी हमें समझना होगा कि ढौंडियाल जी ने उत्तराखंड के जनसरोकारों के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली और तन - मन - धन से लेखन से जुड़ गए । यदि आज स्वरूप ढौंडियाल जी जीवित होते तो वे अवश्य पूछते कि उत्तराखंड से पलायन क्यों हो रहा है ?, गांव वीरान क्यों हो रहे हैं ?, राज्य की राजधानी गैरसैंण क्यों नहीं बनी ?, राज्य आंदोलन के 42 शहीदों को न्याय क्यों नहीं मिला ?,  उत्तराखंड में शराब के गधेरे क्यों बह रहे हैं ? क्या जो भी शौचालय बने उनमें पानी का प्रबंध है या वे स्टोर बन गए हैं?, उत्तरकाशी में सिर्फ लड़के ही क्यों पैदा हो रहे हैं?, और राज्य में प्रतिदिन कोई न कोई वाहन दुर्घटना क्यों होती है ? स्वरूप ढौंडियाल की बुलंद आवाज तब सुनी जाती थी और आज उनकी जैसी प्रखर आवाज नहीं उठती क्योंकि कलमों की धार कुंद कर दी जाती है , बोलने का दम सिथिल हो गया है, चाटुकार पुरस्कृत हो रहे हैं और पत्रकारिता तथा मीडिया की निष्पक्षता को वक्त की दीमक ने खोखला कर दिया है ।

पूरन चन्द्र कांडपाल
05.10.2019

Thursday, 3 October 2019

Jiwan path par : जीवन पथ पर..

मीठी मीठी - 358 : जीवन पथ पर...

     कुछ दिन पहले सुश्री विजय लक्ष्मी शर्मा ' विजया ' जी ने स्वरचित काव्य - संग्रह " जीवन पथ पर..." मुझे भेंट किया । जब भी किसी रचनाकार ने मुझे अपनी पुस्तक भेंट की है, मैं कुछ शब्द उस पुस्तक के बारे में देर - सबेर अवश्य लिखता हूं । इन शब्दों को समीक्षा तो न समझा जाय परन्तु पुस्तक की एक झलक कहा जा सकता है ।

       सत्साहित्य प्रकाशन दिल्ली द्वारा प्रकाशित ' जीवन पथ पर...' काव्यसंग्रह में 120 पृष्ठों में समाई हुई 60 कविताएं हैं । लेखिका की यह प्रथम पुस्तक है जो अपने माता - पिता को समर्पित है जिसमें उनके प्रति सम्मान प्रकट किया गया है " नमामि मातृ और पितृ शक्ति, जिनसे विजया को इतना सम्मान मिला ।" अपने माता - पिता के प्रति लेखिका की यह अपार कृतज्ञता है ।

        पुस्तक में "मां " शब्द के साथ जुड़ाव रखती चार कविताएं हैं - ' आओ मां ', ' मेरी मां ' , ' मां अब बूढ़ी होने लगी है ' और ' ममता ' । ' मेरी मां ' कविता में कवयित्री मां के ऋण को याद करती हैं -

" मेरे हर कदम पर गुरु,
सखी और उपदेशक सी,
ऋणी है मेरी हर सांस,
तेरी जागती लंबी रातों की ।"

     कविता "आज फिर " में लेखिका समाज में फैली अराजकता,  अ सामाजिकता, नारी निरादर, बढ़ते अपराध और वैमनस्यता को देखकर व्यथित हैं । वे कहती हैं -

" द्रौपदी चीर हरण आज फिर,
जहर का प्याला आज फिर,
सीता  -हरण आज फिर,
प्रतीक्षारत अहिल्या आज फिर,
कैकेयी - मंथरा आज फिर,
अबला ही है आज फिर ।"

     एक कविता जो अपनी ओर ध्यान आकृष्ट करती है वह है " मिला नहीं "। जब मनुष्य की उम्मीद पूरी नहीं होती है तो कवयित्री कह उठती हैं -

"कभी छिड़कते थे जान मुझ पर,
आज उन्हीं की आंख की किरकिरी हूं,
बेवफा होकर कहां छु गए हो तुम
हमको भी कहीं करार मिला नहीं ।"

     इस कविता संग्रह की सभी कविताएं पठनीय हैं, संदेशात्मक हैं और संवेदना प्रेषक हैं । एक कविता "अंध भक्ति " भी इस कविता संग्रह में है जो अंध भक्ति पर व्यंगात्मक प्रहार करती है । झूठ - पाखंड और धर्म के ठेकेदारों को बेनकाब करती इस कविता की कुछ पंक्तियां इस तरह हैं -

"जय हो ऐसे भक्तों की है ईश्वर !
जो झूठ को सच समझते हैं,
अंध भक्ति में ये हैवान को
भगवान समझते हैं ।"

      एक  रोचक एवम् संग्रहणीय कविता  संग्रह की रचना हेतु लेखिका को बहुत -बहुत बधाई और शुभकामनाएं । उम्मीद है पाठक इस काव्य साहित्य का अवश्य आनंद लेंगे।  पुस्तक का मूल्य ₹ 250/-, संपर्क - 8587909899, 8700404381.

पूरन चन्द्र कांडपाल
04.10.3019

Wednesday, 2 October 2019

Jantar mantar 2 oct 2019 : जंतर मंतर 2 अक्टूबर 2019

खरी खरी - 500 : जंतर-मंतर पर 2 अक्टूबर

     कल 2 अक्टूबर 2019 को संसद की चौखट नई दिल्ली जंतर-मंतर पर कई आंदोलन कर्ताओं को देखा । जंतर-मंतर राष्ट्रीय धरना स्थल के रूप में विख्यात है जहां देश के कोने कोने से लोग आंदोलन के माध्यम से सोती हुई सरकारों को जगाने और अपनी मांग को मनवाने के लिए आते हैं । कल भी यह स्थान कई आन्दोलनकारियों से खचाखच भरा था ।

      विगत वर्षों की तरह उत्तराखंड के लोगों द्वारा कल भी जंतर- मंतर पर काला दिवस मनाया गया । काला दिवस मनाने का मुख्य कारण था 2 अक्टूबर 1994 के मुजफ्फरनगर कांड के नरपिशाचों को 25 साल बाद भी सजा नहीं दिया जाना । इस अवसर पर राजधानी गैरसैण नहीं बनाने, दोषियों को सजा नहीं दिये जाने, उत्तराखंड के प्रस्तावित 4 रेल मार्गों के निर्माण में शिथिलता बरतने और उत्तराखंड की भाषाओं के प्रति उदासीनता रखने सहित कई मुद्दों पर वक्ताओं ने अपने विचार प्रकट किए । सरकार को एक ज्ञापन भी भेंट किया गया ।

      इस आयोजन के मुखिया  'प्यारा उत्तराखंड' समाचार पत्र के संपादक देव सिंह रावत 'देवदा' थे । इस अवसर पर कई संस्थाओं के प्रतिनिधियों बड़े दुख के साथ कहा कि उत्तराखंड के शहीदों और अपमानित नारी सकती को आजतक भी न्याय नहीं मिला । कई लोगों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए केंद्र और राज्य  सरकार के प्रति भारी रोष प्रकट किया गया । 1994 राज्य आंदोलन  में हुए 42 शहीदों के लिए श्र्द्धांजलि स्वरूप हवन भी किया गया और शहीद परिवारों एवं उस कांड में पीड़ित मातृशक्ति के प्रति सम्मान भी प्रकट किया गया । इस अवसर पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी को भी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की गई ।

पूरन चन्द्र काण्डपाल

03.10.2019

Tuesday, 1 October 2019

Aasan naheen hae shastri giri aur gandhi giriआसान नहीं है गांधीगिरी और शास्त्री गिरी :

बिरखांत - 285 : आसान नहीं है गांधीगिरी और शास्त्रीगिरी

     गांधी जी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर गुजरात में, 13 वर्ष की उम्र में कस्तूरबा से विवाह, 18 वर्ष में वकालत पढ़ने इंग्लैंड गए, 1893 में मुक़दमा लड़ने दक्षिण अफ्रीका गए, वहां रंग -भेद का विरोध किया, 7 जून 1893 को गोरों ने पीटरमैरिटजवर्ग रेलवे स्टेशन पर उन्हें धक्का देकर बाहर निकाला, 1915 में भारत वापस आए, सत्य-अहिंसा-असहयोग के अमोघ हथियार से स्वतन्त्रता संग्राम लड़ा, 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ और 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गौडसे ने उनकी ह्त्या कर दी परन्तु बापू मरे नहीं, राजघाट दिल्ली में आज भी वे  विराजमान हैं | दुनिया राजघाट आती है और ‘वैष्णव जन तो..’ भजन में बापू को महशूस करती है |

       गांधी ने जो कुछ कहा और जिस तरीके से उसका क्रियान्वयन किया उसे दुनिया ‘गांधीगिरी’ कहती है | गांधीगिरी आसान नहीं है और न यह सबके बस की है | जो लोग ‘मजबूरी का नाम महात्मा गांधी’ कहते हैं यह उनकी कुत्सित सोच है | दुनिया जानती है कि गांधी ने फिरंगी को खदेड़ा और यूनियन जैक की जगह तिरंगा फहराया | जिन्होंने ने गांधी को ट्रेन से धक्का मारा, गांधी ने उन्हें अपने देश से धक्का मारा |  दुनिया के सभी विवादों का अंत बातचीत के गांधी दर्शन के अनुसार ही समझौतों तक पहुंचता है |

        गांधी जी की सीख जिसे अब ‘गांधीगिरी’ कहा जाता है वह है- ‘गाली देने वाले की तरफ मुस्करा कर देखो--वह देर-सबेर शर्मिंदा होगा; समस्या का समाधान झगड़े से नहीं प्यार से निकालो; गुस्सा और अहंकार से दूर रहो; हिंसा में विश्वास नहीं रखो; अभद्र से भद्रता से पेश आओ; क्षमा करना कमजोर इंसान के बूते की बात नहीं है; जिन्दगी ऐसे बिताओ मानो कल ही मौत की तारीख तय है; कथनी और करनी में अंतर मत करो | गांधी ने कई बार कहा, ‘एक गलत कभी भी सच्चाई का स्थान नहीं ले सकता है भलेही उसका कितना ही प्रचार क्यों न किया गया हो | गांधी ने  यह भी कहा था, “ जब हिंसा और कायरता में से एक को चुनना होगा तो मैं  हिंसा का चुनाव करूंगा |” गांधी के ‘दूसरी गाल में थप्पड़’ और ‘ तीन बन्दर’ वाली बात का जो लोग सही विश्लेषण नहीं करते उन्हें गांधी के दर्शन को समझना और उसका पुन: मंथन करना चाहिए |

       गांधी ने छुआछूत का किस तरह विरोध किया, एक प्रसंग – एक बार गांधी जी को एक सभा में बोलना था, उसमें सफाई कर्मियों को नहीं आने दिया गया | गांधी को जब यह बात मालूम हुई तो उन्होंने सभा के आयोजकों से कहा, ‘आप लोग अपनी मालाएं और अभिनन्दन पत्र अपने पास रखिये | मैं उनके पास जाकर भाषण दूंगा | जिन्हें मेरी बात सुननी हो वहाँ आ जाए’ | गांधी जी उनके पास चले गए और आयोजकों को वहां जाना पड़ा |गांधीगिरी में बहुत दम है बस ज़रा विनम्रता से प्रयास करने की देर है | विज्ञान का युग आया, परिस्थितियां बदली परन्तु गांधीगिरी की आज अधिक जरूरत है | मेरा दावा है जो बच्चा ‘शाम- दाम- दंड- भेद’ से नहीं मानता वह गांधीगिरी से मान जाता है | किन्तु-परन्तु मत कहिये, करके देखिये |

        आज के इस पुनीत अवसर पर देश के दूसरे प्रधानमंत्री, ‘जय जवान  जय किसान’ नारे का उद्घोष करने वाले भारत रत्न लाल बहादुर शास्त्री जी जिनका जन्म 02 अक्टूबर 1904 को हुआ था, को भी हम श्रधा सुमन अर्पित करते हैं | गांधी जी की प्रेरणा से वे स्वतंत्रता संग्राम में कूदे थे और 18 बार जेल गए | वे उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री और नेहरू कबीनेट में रेल मंत्री थे | नेहरू जी की मृत्यु के बाद वे 9 जून 1964 से 11 जनवरी 1966 तक एक  वर्ष 7 महीने देश के प्रधानमंत्री रहे | उनके नेतृत्व में 1965 के युद्ध में हमारी सेना ने पकिस्तान को बुरी तरह से हराया था | आज ही हम उत्तराखंड राज्य आन्दोलन में शहीद हुए रामपुर तिराहे के शहीदों सहित राज्य आंदोलन के सभी 42 शहीदों को भी नमन करते हैं और श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं  |

पूरन चन्द्र काण्डपाल
02 अक्टूबर 2019