Monday, 5 August 2019

Hatigo anuchchhed 270 : हटीगो अनुच्छेद 270

मीठी मीठी - 324 : हटिगो अनुच्छेद 370

       आंखिर 2014 में  करी  एन डी ए सरकार क वैद  2019 में पुर हैगो ।  बेई 05 अगस्त 2019 हुणि भारत क जम्मू - कश्मीर राज्य बै राज्य कैं विशेष स्वायतता दिणी अनुच्छेद 370 कि सब धारा (2) और (3 ) कैं  हटै है और  राज्य क पुनर्गठन लै हैगो  जमें जम्मू - कश्मीर कैं विधान सभा समेत केंद्र शासित प्रदेश बना और लद्दाख कैं बिना विधान सभाक  केंद्र शासित प्रदेश बनै है ।

     यहै पेली राज्यक ज्यादातर भागों में धारा 144 लगै दी और इंटरनेट सेवा लै रोकि दे ताकि क्वे लै नकि घटना नि घटो और कानून - व्यवस्था कि समस्या पैद नि हो ।  वांक द्वि पूर्व मुख्यमंत्री नजरबंद है गईं । येक दगाड़ 27 अक्टूबर 1947 कि उ अस्थाई अनुच्छेद पूर्ण रूप ल जम्मू कश्मीर बै ख़तम हैगो । आब  जम्मू - कश्मीरक संविधान लै ख़तम हैगो । अनुच्छेद 370 क अंश (1) नि हटै  रय । वर्ष 1947 में अनुच्छेद 370 क विशेष  दर्ज़ उ टैमक  महाराजा हरिसिंह कि मांग पर दिई गो किलै कि ऊं येक  बिना भारत में विलय हुणि तैयार नि हाय जबकि पाकिस्तान महाराजा कि क्वे लै मांग पुर करैं हैं तैयार हैगो छी ।

        अाब भारत 28 राज्यों और 9 केंद्र शासित प्रदेशोंक गणतंत्र हैगो ।  राज्य सभा में बिलक पक्ष में 125 और विपक्ष में 61 वोट पड़ीं और बिल पास हैगो । विरोधी दलों क मानण छ कि उनुकैं विश्वास में नि लिई गोय । एन डी ए क कुछ सहयोगी दलों ल लै राज्यसभा है बायकाट करौ। उम्मीद करण चैंछ कि कि जम्मू - कश्मीर राज्यक य पुनर्गठन ल आब य क्षेत्र में शांति स्थापित हलि और द्विए  केंद्र शासित प्रदेशों क तेजी क साथ भल विकास हल ।

पूरन चन्द्र कांडपाल
06.08.2019

Alvida anuchchhed 370 : अलविदा अनुच्छेद 370

मीठी मीठी - 324 :  अलविदा अनुच्छेद 370

       अंततः 2014 में किया गया एन डी ए सरकार का वायदा 2019 में पूरा हुआ । कल 05 अगस्त 2019 को भारत के जम्मू - कश्मीर राज्य से राज्य को विशेष स्वायतता देने वाला अनुच्छेद 370 की सब धारा (2) और (3 ) को हटाया गया और साथ ही राज्य का पुनर्गठन भी किया गया जिसमें जम्मू - कश्मीर को विधान सभा सहित केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया और लद्दाख को बिना विधान सभा के  केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया ।

     इससे पहले राज्य के अधिकतर भागों में धारा 144 लगा दी गई और इंटरनेट सेवा भी अवरुद्ध कर दी गई ताकि कोई अप्रिय घटना न घटे और कोई कानून - व्यवस्था की समस्या पैदा एन हो ।  वहां के दो पूर्व मुख्यमंत्री नजरबंद है इसके साथ ही 27 अक्टूबर 1947 का वह अस्थाई अनुच्छेद पूर्ण रूप से जम्मू कश्मीर से समाप्त हो गया । साथ ही जम्मू - कश्मीर का संविधान भी समाप्त हो गया । अनुच्छेद 370 का अंश (1) नहीं हटाया गया । वर्ष 1947 में अनुच्छेद 370 का विशेष दर्जा तत्कालीन महाराजा हरिसिंह की मांग पर दिया गया क्योंकि वे इसके बिना भारत में विलय को तैयार नहीं हुए जबकि पाकिस्तान महाराजा की कोई भी मांग पूरा करने को तैयार हो गया था ।

          अब भारत 28 राज्यों और 9 केंद्र शासित प्रदेशों का गणतंत्र हो जाएगा ।  राज्य सभा में बिल के पक्ष में 125 और विपक्ष में 61 वोट पड़े और बिल पास हो गया । विरोधी दलों का मानना है कि उन्हें विश्वास नहीं किया गया । एन डी ए के कुछ सहयोगी दलों ने राज्यसभा से बहिर्गमन किया । आशा की जानी चाहिए कि जम्मू - कश्मीर राज्य के इस पुनर्गठन से अब इस क्षेत्र में शांति स्थापित होगी और दोनों केंद्र शासित प्रदेशों का तीव्र गति से विकास होगा ।

पूरन चन्द्र कांडपाल
06.08.2019

Sunday, 4 August 2019

Raag hindu muslum : राग हिन्दू मुस्लिम क्यों ?

खरी खरी - 470 : राग 'हिन्दू -मुस्लिम' क्यों  और कब तक ?

      सब जानते हैं कि विश्व में 56 मुस्लिम देश हैं जिनमें 12 तेल निर्यातक हैं । हम 80% तेल आयात करते हैं । हमारी 99.9 मुस्लिम देशों से दोस्ती है । हम इन देशों को कई वस्तुएं निर्यात भी करते हैं । फिर हर बात में  'हिन्दू- मुस्लिम' राग क्यों ? हमें अब स्वयं सोचना होगा । विश्व में इंडोनेशिया ( जहां पिछले साल पीएम साहब गए थे ) के बाद सबसे अधिक मुस्लिम हमारे देश में रहते हैं । 

     हमने स्वतंत्रता आंदोलन भी मिलकर लड़ा । हमने रसखान का कृष्ण- प्रेम देखा, मिज़ाइल मैन APJ अब्दुल कलाम का सपना देखा, परमवीर चक्र विजेता (मरणोपरांत) अब्दुल हमीद की अद्भुत वीरता देखी, भारत रत्न बिस्मिल्लाखां की शहनाई सुनी, 6 भारत रत्न और 1 परमवीर चक्र का राष्ट्र-प्रेम देखा । खेल, व्यापार, सिनेमा, लेखन, कृषि सहित विभिन्न क्षेत्रों में अनेकों ऐसे मुस्लिम देखे जिन्होंने भारत के मुकुट पर कई रत्न जड़े ।

     समझ में नहीं आता कि वे कौन क्षुद्रबुद्धि लोग हैं जो बात-बात में 'हिन्दू-मुस्लिम' का राग अलाप कर हमारी गंगा- जमुनी तहजीब को जख्म देना चाहते हैं, फूलवालों की सैर में रोड़ा अटकना चाहते हैं और इसी राग से आग लगा कर राजनैतिक रोटियां सेंकना चाहते हैं । हमारे लिए उन शब्दों का कोई मोल नहीं है जो करनी से मेल नहीं खाते ।

      कुछ महीने पहले हमें पीएम साहब ने ईदगाह (मुंशी प्रेमचंद ) के हामिद की याद दिलाई । हमारे समाज में गोपाल, हामिद, रोबर्ट, गुरतेज सहित 11 धर्मों के बच्चे अपने अभिभावकों के संग आपस में मिलजुलकर रहते हैं, पढ़ते -खेलते हैं । हमारी सदियों पुरानी सौहार्द- मोहब्बत की हिलोर कुछ सरारती -असामाजिक तत्वों द्वारा देखी नहीं जा सकती । इसलिये वे हमेशा कुछ न कुछ छिछोरपन करके इसे तोड़ने की फिराक में रहते हैं । इनकी यह बदनीयती कभी भी सफल नहीं होगी क्योंकि प्रत्येक भारतीय इनकी मंसा को समझ चुका है । ऐसे दौर हम देखते आये हैं क्योंकि "सदियों रहा है दुश्मन दौरे जहां हमारा ।" हमने मिलकर अपना संविधान बनाया है । यह हमारे सामाजिक सौहार्द का सबसे बड़ा ग्रन्थ है जिसका हमने सम्मान करना चाहिए और करेंगे भी ।  "मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना , हिंदी हैं हम वतन है हिंदुस्तान हमारा ।" जयहिन्द ।

पूरन चन्द्र काण्डपाल

05.08.2019

Saturday, 3 August 2019

ek mahila aisee bhee : एक महिला ऐसी भी

खरी खरी - 469 : एक महिला ऐसी भी

     फूलन देवी ( जिसे दस्यु सुंदरी भी कहा गया और जिस पर 'बैंडिट क्वीन' फ़िल्म भी बनी ) की जिंदगी में जो बीता और वह दस्यु नारी क्यों बनी इस बात को बहुत कम लोग जानते हैं । 10 साल की फूलन का 40 साल के व्यक्ति से विवाह कितना अनैतिक है इसे समझा जा सकता है । वह भागी और डाकुओं द्वारा अगवा कर ली गई । विक्रम मल्लाह से दोस्ती कर उसने बंदूक चलानी सीखी । प्रतिशोध की ज्वाला में दहकती फूलन ने 58 दलितों की मौत का बदला बेहमई में 22 सवर्णों को मार कर लिया फिर 11 वर्ष बिना ट्रायल के जेल काटी । 

      मिर्जापुर से वह सांसद बनी और सुरक्षा के बीच भी 26 जुलाई 2001 को फूलन की हत्या कर दी गई । फूलन के संघर्ष पर यदि ईमानदारी से दृष्टि डाली जाए तो वह दलित महिला शोषण के विरुद्ध आवाज उठाती रही ।क्राइम ब्यूरो के अनुसार आज भी प्रतिदिन 6 दलित महिलाओं का यौन उत्पीड़न होता है । दलित महिलाओं को फूलन का संघर्ष स्मरण करते हुए उन लोगों से अहिंसक संघर्ष करना चाहिए जो आज भी किसी न किसी बहाने उनका शारीरिक शोषण करते हैं औऱ उन्हें कुएं तथा मंदिर प्रवेश से वंचित रखते हैं । तुलनात्मक दृष्टि से देखा जाय तो दलित  बच्चियों और महिलाओं में अशिक्षा एवं गरीबी बहुत अधिक है जिस पर सरकारों को अवश्य मंथन करना होगा ।

पूरन चन्द्र काण्डपाल


04.08.2019


Friday, 2 August 2019

Tank se mulakat : टैंक से मुलाकात

मीठी मीठी - 323 : एक सेवानिवृत टैंक से मुलाकात


       उत्तर भारत में भ्रमण के दौरान एक विशेष जगह पर सम्मान के साथ स्थापित भारतीय स्थल सेना के एक सेवानिवृत टैंक से बिलकुल नजदीक से मुलाकात हुई । मेरे पूछने पर टैंक ने बताया, "सर सेवानिवृत्ति के बाद इस स्थान पर मैं बहुत सम्मानित महसूस कर रहा हूं । दिन भर जो भी देशवासी यहां से गुजरता है, बड़ी गर्मजोशी और गर्व के साथ मेरी ओर देखता है । कई लोगों ने तो मेरे अंग - अंग को बड़े सम्मान से स्पर्श किया है, सहलाया है। बच्चे तो कभी कभी मेरी गोद में सवार हो जाते हैं ।"

       सेवानिवृत टैंक अपनी दास्तान सुनाते गया,  " मुझे अपने जीवन पर गर्व है क्योंकि मेरे पूर्वज वर्ष 1948, 1962 और 1965 के सभी युद्धों में लड़े और दुश्मन को छटी का दूध याद दिलाया । मैं 1971 के युद्ध में अपने साथियों के साथ पश्चिमी सीमा पर लड़ा और दुश्मन को नेस्तोनाबूद किया । आज भी मेरे वंशज बड़ी मजबूती के साथ देश की सीमाओं पर डटे हैं । हमारी हिम्मत, मजबूती, जोश और युद्ध प्रवीणता को देखकर कोई भी दुश्मन हमारी ओर आंख उठाकर नहीं देख सकता । अपनी भारतभूमि की सेवा करने के लिए मैं स्वयं को धन्य समझता हूं । जयहिंद ।" इस अमर सेनानी सेवानिवृत टैंक को सलूट करते हुए मैं अपने गंतव्य की ओर निकल गया ।

पूरन चन्द्र कांडपाल

03.08.2019

Thursday, 1 August 2019

Ijjat lutige ni kau : इज्जत लूटिगे नि कौ

बिरखांत -275 : यै हुणि ‘इज्जत लुटिगे’ नि कौ

     हमर समाज में नरपिसाचों कि संख्या दिनोदिन बढ़नै जांरै | उनुकैं सजा या क़ानून क डर न्हैति | नानि गुड़िय जसि भौ बटि बुढी स्यैणि तक इनरि करतूत क शिकार बनै रईं | बलात्कार क रोजाना नईं कांडों ल हैवानियत लै शर्मसार हैगे | रात छोड़ो दिन में लै स्यैणि- जात सुरक्षित न्हैति | दुष्कर्मी बेखौप घुमें रईं | यूं वहशियों क आपण क्वे नात-रिश्त नि हुन | यूं नरपिसाच देखण में आम मैंसों जास देखिंनी जो आपण लोगोंक बीच में लै हुनी पर इनरि पछ्याण करण भौत मुश्किल हिंछ | बलात्कारक मर्ज नरपिसाचों कि हैवानियत ग्रस्त लाइलाज बीमारी छ तबै त यूं एक छोटि गुड़ी जसि भौ बटि अस्सी वर्ष कि बुढ़िय तक कैं आपण शिकार बनै दिनी |

     आज हम सद्म में छ्यूं, हम दुखित छ्यूं, हम डर ल कापैं रयूं क्यलै कि हमार इर्द- गिर्द रोज बलात्कार कि घृणित घटना होतै जां रईं जनूं में दस घटनाओं में बै केवल एक ही घटना कि रिपोट पुलिस तक पुजीं | समाज विज्ञानियोंक मानण छ कि 90% रेप केस पुलिस अविश्सनियता, न्याय में देरी और सामाजिक सोच (सोसियल स्टिग्मा) क कारण चुपचाप घुटन में छटपटानै हरै जानीं | देश कैं 2005  क दिल्ली गेट रेप काण्ड, 2010 क दिल्ली धौलाकुआ दुष्कर्म केस, 2012 क दिल्ली निर्भया हैवानियत काण्ड, य बीच अणगणत रेप कांडों और 29 जुलाई 2016 क बुलंदशहर हाइवे रेप- लूट काण्ड ल और मई 2017 क उन्नाव रेप कांड ल देश कैं दहलै बेर धरि दे | उन्नाव रेप कांड पर 1अगस्त 2019 हुणि सर्वोच्च न्यायालय क दखल क  बाद रोजाना सुनवाई दिल्ली में व्हलि ।

     दिनोदिन बढ़णी रेप केसों क मध्यनजर पुलिस या क़ानून कि तरफ देखि बेर दुःख और निराशा हिंछ | बताई जांरौ कि 29 जुलाई 2016 की रात जो हाइवे पर य घृणित कुकृत्य हौछ उ रात पुलिस रजिस्टर में उ क्षेत्र में छै पीसीआर वाहन ड्यूटी पर छी | अगर यूं वाहन ड्यूटी पर हुना तो यसि जघन्य बारदात नि हुनि | नरपिसाचों कैं पुलिस क रवइय और अकर्मण्यता क पत्त हुंछ तबै ऊँ बेडर है बेर यस संगीन अपराध करनीं | पत्त नै य हमरि कुम्भकरणी नींन में स्येती पुलिस कब जागलि ? चाहे ज्ये लै कारण हो हमार देश में न्याय में देरी लै एक अभिशाप छ | दिसंबर 2012 क निर्भयाकांड क 7 वर्ष बितण बाद लै उ काण्ड में लिप्त नरपिसाच सजा मिली बाद लै फांसी पर नि चढ़ि राय | कभैं अपील, कभैं दुबार उखेलापुखेल, कभैं लूपहोल क लाभ ल्हीनै न्याय मिलण में देरी होतै जींछ | निर्भया ल 29 दिसंबर 2012 हुणि तड़पि- तड़पि बेर दम तोड़ दे पर वीकि आत्मा कि आवाज आज लै हमार कानों में गूंजीं, मानो उ हमूं हैं पूछें रै, “कभणि मिललि ऊँ दरिंदों कैं फांसि ? कभणि मिलल मीकैं न्याय ?”

     बलात्कार कि शिकार स्यैणि- जात क असहनीय शारीरिक और मानसिक पीड़ है मुक्ति मिलण भौत कठिन छ | यै है लै ठुल छ सामाजिक पीड़ क दंश | हमार समाज में क्वे ले स्यैणि या नानि दगै यसि घटना हुण पर ‘इज्जत लुटिगे’ कै दिनी जो भौत गलत बात छ और शर्मनाक छ | य सामाजिक दंश कि पीड़ यतू भयानक और अकल्पनीय छ कि कएक पीड़ित त आपणी कपोघात (आत्म-हत्या) तक कर ल्हीनी | य ठीक बात न्हैति | यस नि हुण चैन | य समाज क लिजी भौत शर्म कि बात छ | पीड़ित क यै में क्ये लै  दोष नि हय फिर उ आपूं कैं सजा क्यलै द्यो ? अगर उ टैम पर उ य दंश क  सद्म है उबरि जो तो उ आत्म- हत्या है बचि सकीं | उ बखत उकैं सामाजिक, डाकटरी और मनोवैज्ञानिक उपचार कि भौत ज्यादै जरवत हिंछ |

     दुष्कर्म पीड़िता कैं य सोचि बेर हिम्मत बादण पड़लि कि उ आपूं कैं क्ये लिजी सजा द्यो ? वील त क्वे कसूर नि कर और न वीक क्ये दोष | सिर्फ स्यैणि -जात हुण क कारण वीक शिकार हौछ | उकैं खुद आपूं कैं समझूण पड़ल कि उ एक नरपिसाच रूपी भेड़िये कि शिकार बनीं | उकैं आपणि पीड़ कैं सहन करनै, टुटि हुयी मनोबल कैं दुबार जगूण पड़ल और नरपिसाचों कैं सजा दिलूण में क़ानून कि मदद करण पड़लि जो बिना वीक सहयोग दिए संभव नि है सका | उसी लै जंगली जानवरों द्वारा बुकाई जाण पर हम इलाजै करनू | हादसा समझि बेर य घटना कैं भुलण क दगाड़ यूं भेड़ियों क आक्रमण है बचण क हुनर लै आब हरेक स्यैणि कैं सिखण पड़ल और हर कदम पर आपणि चौकसी खुद करण पड़लि |

      बलात्कारियों कैं जल्दि है जल्दि कठोर दंड मिलो, य पीड़ित कि पीड़ कैं कम करण में एक मलम क काम करल | आब टैम ऐगो जब समाज क बुजर्गों, बुद्धिजीवियों, धर्म- गुरुओं, पत्रकार- लेखकों, सामाजिक चिंतकों और महिला संगठनों कैं जोर-शोर ल य कौण पड़ल कि यै हुणि ‘इज्जत लुटिगे’ या ‘इज्जत तार तार हैगे’ जसि बात नि समझी जो और नि कई जो | यूं शब्दों है मीडिया- टी वी चैनलों कैं लै परहेज करण पड़ल ताकि पीड़ और निराशा में डूबी हुई पीड़ित कैं ज्यौन रौण बाट मिलि सको |

पूरन चन्द्र काण्डपाल
02.08.2019

Ram aur Rawan : राम और रावण

खरी खरी - 468 :  कटु सत्य  : राम और रावण

       यदि आप रास्ते में चल रहे हैं और आपको वहां पड़ी हुई राम जी की और रावण की दो मूर्तियां मिले और आपको एक मूर्ति उठाने का कहा जाए तो अवश्य आप राम की मूर्ति उठा कर घर ले जाओगे क्योंकि राम सत्य, निष्ठा, मर्यादा, कर्म और सकारात्मकता के प्रतिक है और रावण छल - कपट और नकारात्मकता का प्रतिक है ।

       अगली बार आप फिर से उसी रास्ते पर  चल रहे हों और रास्ते में पड़ी हुई राम जी और रावण की दो मूर्तियां मिल जाएं जिनमें राम की मूर्ति पत्थर की हो और रावण की सोने की हो और आपसे एक मूर्ति उठाने को कहा जाए तो आप राम जी की मूर्ति छोड़ कर  रावण की सोने की मूर्ति ही उठाएंगे । (अपवाद को छोड़कर ) । इसका अर्थ हुआ कि हम सत्य और असत्य, सकारात्मक और नकारात्मक अपनी सुविधा और लाभ के अनुसार तय करते हैं ।

      एक कटु सत्य यह भी है कि 99% प्रतिशत लोग भगवान को सिर्फ अपने लाभ और डर की वजह से पूजते है । आज तक किसी ने नहीं कहा कि है भगवान तेरा भला हो । जब भी भगवान की पूजा होती है कुछ न कुछ मांग भगवान के सम्मुख रख दी जाती है । कई बार तो भगवान के सामने शर्त रखी जाती है कि हे भगवान मेरा अमुक काम बन जाएगा तो तुझे प्रसाद चढ़ाऊंगा । मन्नत भी इसी क्रिया का अंश है ।  स्वयं से सवाल पूछने की जरूरत तो है ।  ( लेख के कुछ अंश  सोसल मीडिया से साभार संपादित हैं । )

पूरन चन्द्र कांडपाल
01.08.2019