Wednesday, 7 November 2018

Pradooshan mukti : प्रदूषण मुक्ति के कदम

बिरखांत -237 : प्रदूषण मुक्ति के सख्त कदम

    यदि महानगरों में प्रदूषण घटाना है तो सख्त कदम तो उठाने ही पड़ेंगे । अपने स्वास्थ्य के खातिर हमने कोई बदलाव स्वीकार नहीं किया । वर्त्तमान दिल्ली सरकार ने दो बार सम- विषम (ऑड -ईवन ) का  प्रयोग कर भी लिया है परंतु नियमित नहीं हो सका जो अब नियमित करना ही होगा । अपनी सुख-सुविधा के खातिर हम बच्चों के नाजुक फेफड़ों की तरफ नहीं देख रहे ।

     सरकार के भरसक प्रयास करने पर भी रुपए का गिरना जारी है जो ₹ 74/- प्रति डालर हो चुका है । यह स्तिथि लगातार आयत के बढ़ने और निर्यात के घटने से उत्पन्न हुई । आयात की सूची में सबसे अधिक आयात कच्चे तेल का होता है। हम कुल खपत का 80 % तेल आयात करते हैं जिसकी कीमत डालर में देनी होती है।

     देश में सड़कों पर कारों  की संख्या बहुत है जिसे घटाया नहीं जा सकता बल्कि यह संख्या दिनोदिन बढ़ती रहेगी।  वर्षों से यह अपील जारी  है कि  लोग कार -पूलिंग करें अर्थात एक ही गंतव्य स्थान तक जाने के लिए दो-चार व्यक्ति बारी-बारी से एक ही कार का उपयोग करें जिससे चार कारों की जगह सड़क पर एक ही कार चलेगी। पेट्रोल भी बचेगा और सड़क पर वाहन भीड़ भी कम होगी।  इस अपील पर बिलकुल भी अमल नहीं हुआ। कार मालिक सार्वजानिक वाहन (बस ) की कमी और समय अनिश्चितता के कारण उसका उपयोग करना  पसंद नहीं करते।

          सरकार यदि देश के सभी महानगरों के लिए यह क़ानून बना दे कि सम और विषम संख्या की कारें बारी-बारी से सप्ताह में तीन-तीन दिन के लिए ही सड़क पर चलें अर्थात जिन कारों के अंत में 1, 3, 5 ,7 ,9  (विषम संख्या ) हो वें विषम तारीख को चलें और जिनके अंत में 2, 4, 6, 8, 0 (सम संख्या ) हो वे सम तारीख को चलें तथा रविवार को सभी वाहन चलें तो इससे सड़कों पर वाहन संख्या घट कर आधी रह जायेगी, तेल का आयात घटेगा, प्रदूषण कम होगा और प्रदूषण जनित बीमारियां कम हो जाएंगी क्योंकि बच्चों के फेफड़ों पर इस प्रदूषण का बहुत बड़ा कुप्रभाव पड़ रहा है । अगली बिरखांत में कुछ और...

पूरन चन्द्र काण्डपाल
08.11.2018

Tuesday, 6 November 2018

Shubh dipawali : शुभ दीपावली

मीठी मीठी -181 :  शुभ दीपावली

शुभ दीपावली सबके नाम,
एक दीप शहीदों के नाम,
चीनी सामान का नहीं नाम,
स्वच्छता हो सबका काम,
आतिशबाजी न लो नाम,
सुप्रीम कोर्ट को लाल सलाम ।

     जब चीन पाकिस्तानी आतंकी अजहर मसूद को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करने में अड़ंगा लगा रहा है, सीमा पर घुसपैठ कर रहा है तो फिर हम चीन की मूर्तियां, लड़ियां, पटाखे और खिलौनों पर मोह क्यों करें ? चीन में बनी जिन वस्तुओं का विकल्प हमारे पास है उन चीनी वस्तुओं को भी नहीं खरीदा जाय । इस बार यह देशप्रेम हमें प्रदर्शित करना ही होगा तभी चीन की बुद्धि काम करेगी ।

      पिछली दीपावली से इस दीपावली तक हमारे कई दर्जन सैनिक उग्रवाद से लड़ते हुए शहीद हो गए । इस दीपावली पर एक दीप शहीदों के नाम पर भी प्रज्ज्वलित करें और शहीदों को नमन करते हुए शहीद परिवारों के प्रति सम्मान प्रकट करें ।

      दीपावली दीप पर्व है । दीप प्रज्ज्वलित करें, घर की स्वच्छता और सजावट सर्वोपरि है । दीपावली स्वच्छता का त्यौहार है । आतिशबाजी स्वेच्छा से ही नहीं करें । उच्चतम न्यायालय को दीपावली की विशेष शुभकामनाएं जो उन्होंने हमें प्रदूषण से बचाने का कदम उठाया । हो सके तो प्रदूषण कम करने के लिए एक पेड़ लगाएं ।

     सभी मित्रों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं । मातृभूमि के उन वीर सपूतों को विनम्र श्रद्धांजलि के साथ एक निवेदन -

तुम गजल लिखो या
गीत प्रीत के खूब लिखो,
एक पंक्ति तो कभी
शहीदों पर लिखो,
लौट नहीं आये जो
गीत लिखो उनपर,
देह-प्राण न्यौछावर
कर गए राष्ट्र की धुन पर ।

पूरन चन्द्र काण्डपाल
07.11.2018
शुभ दीपावली

Monday, 5 November 2018

Gutkha tambakoo lat : गुटखा - तम्बाकू लत

खरी खरी - 335 :जरूर छूटेगी तम्बाकू-गुटखे की लत !

    विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार तम्बाकू उत्पादों से छुटकारा पाने के लिये सबसे जरूरी है कि आप ये उत्पाद अपने पास या घर में नहीं रखें । इस लत को छोड़ने के दौरान सिरदर्द या अनिद्रा हो सकती है । व्यायाम करें, जल पीएं और अपने को ललकारें कि 'यह लत तू मां के गर्भ से तो नहीं लाया था ।'

     तम्बाकू के जहरीले उत्पाद छोड़ने के मात्र 20 मिनट के अंदर रक्तचाप और दिल की धड़कन सामान्य हो जाएगी तथा 12 घंटे में खून में कार्बन मोनोक्साइड (जहर) का स्तर घट कर सामान्य हो जाएगा । 2 से 12 सप्ताह में सभी तकलीफें दूर हो जायेंगी ।

    बस एक प्रण करने की देर है । यदि आपने प्रण कर लिया तो आपका हृदय, फेफड़ा, लीवर सब सुचारु रूप से कार्य करेंगे और तम्बाकू जनित कैंसर का खतरा भी नहीं रहेगा । साथ ही आपके परिवार को भी इस समस्या से उत्पन्न परोक्ष खतरों से मुक्ति मिल जाएगी । किसी एक व्यक्ति/परिचित/अपरिचित को सचेत करना हमारा सामाजिक एवं राष्ट्रीय कर्तव्य है । करके देखें तो सही ।

पूरन चन्द्र काण्डपाल
06.11.2018

Sunday, 4 November 2018

Uttrakhand aarya samasj : उत्तराखंड आर्य समाज

मीठी मीठी - 179 : उत्तराखंड आर्य समाज में साहित्य और संस्कृति

        04 नवम्बर 2018 को नई दिल्ली स्थित गढ़वाल भवन में अपरान्ह 2 बजे से संध्या काल तक साहित्य, संस्कृति और समाजिकता का शानदार कार्यक्रम आयोजित किया गया । मुख्य अतिथि सांसद प्रदीप टम्टा जी एवं अन्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर साथ कार्यक्रम आरम्भ हुआ ।  उसके बाद कुमाउनी- गढ़वाली कवि सम्मेलन हुआ जिसमें वरिष्ठ कवि ललित केशवान, पूरन चन्द्र काण्डपाल, दिनेश ध्यानी, चंदन प्रेमी, रमेश हितैषी, र्शन सिंह रावत, ओम प्रकाश आर्य, गिरीश भावुक, प्रदीप रावत,  जगत कुमाउनी, संतोष जोशी, माया रावत सहित कई कवियों के अपनी भाषा का डंका बजाते हुए काव्य पाठ से श्रोताओं को खूब  आनंदित किया ।

       कवि -सम्मेलन के पश्चात लगातार तीन घंटे तक सांस्कृतिक कार्यक्रम हुआ जिसमें तिरूवा बाई कुसुम फ़िल्म स्टूडियो के कलाकारों सहित गायिका हेमा ध्यानी, प्रकाश मिलनसार एवं एक दर्जन से अधिक गायकों -कलाकरों ने अपने गीत - नृत्य - वाद्यों से  खचाखच भरे गढ़वाल भवन के भागीरथी सभागार में बैठे दर्शकों का खूब मनोरंजन किया । मंच संचालन संस्था के महासचिव रमेश हितैषी ने किया ।

      इस अवसर पर सांसद प्रदीप टम्टा, संस्था के अध्यक्ष संजय मोहन आर्य, उपाध्यक्ष गुसाईं राम आर्य, महासचिव रमेश हितैषी सहित कई आगंतुकों ने अपने विचार व्यक्त किये । संस्था की पूर्ण कार्यकारिणी एवं सभी सदस्यों ने आपसी सहयोग के साथ एक उत्कृष्ट सामाजिकता का प्रदर्शन किया । सभागार में कुमाउनी- गढ़वाली पुस्तकों की प्रदर्शनी के साथ बिक्री का भी प्रबंध था जहाँ से लगभग आधे दर्जन लेखकों के साहित्य में संस्था के सदस्यों ने रुचि दिखाई और किताबों का क्रय किया ।

     मध्यान्ह भोजन - एवं सांध्य जलपान के साथ संम्पन्न हुए इस सफल आयोजन की सभी दर्शकों ने दिल्ली महानगर में समाजिकता के एक अद्भुत मिठास को महसूस किया । इस सफल आयोजन के लिए उत्तराखंड आर्य समाज विकास समिति (पं) की पूरी टीम को हार्दिक बधाई एवं शुभकामना ।

पूरन चन्द्र काण्डपाल
05.11.2018

Nyaayaadheesh lokpal : न्यायाधीश - लोकपाल

खरी खरी - 334 : न्यायाधीशों और लोकपाल की कमी

     सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस टी एस ठाकुर का यह चिंतन सत्य था कि यदि जजों की यथोचित भर्ती होगी तो केस जल्द-से-जल्द निपटते जाएंगे । देश में निचली अदालतों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक करीब साढ़े तीन करोड़ से अधिक मुकदमे लंबित हैं ।

      हाइकोर्टों में ही करीब 43 % जजों की कमी बताई जाती है । अदालतों पर बहुत अधिक दबाव है और लोगों को न्याय बहुत देरी से मिल रहा है । हम आशा करते हैं कि पी एम साहब इस मुद्दे का हल शीघ्र खोज लेंगे । पूर्व सी जे आई वेदना एकदम उचित है । हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय में 4 न्यायाधीश नियुक्त हुए हैं जो सुखद है ।

     जिस लोकपाल के लिए पांच वर्ष पहले सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे जी ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई दिन तक अनशन करके पूरे देश को जगाया और नीति नियंताओं तक आवाज पहुंचाई उस लोकपाल की अब चर्चा तक नहीं हो रही । सभी चुप हैं । हमारे प्रजातंत्र का चौथा खंभा भी इस मुद्दे पर कमजोर हो गया लगता है ।

पूरन चन्द्र काण्डपाल
04.11.2018

Chhipkali : छिपकली

खरी खरी - 333 : छिपकली की मौत

मिड डे मील
खिचड़ी में छिपकली
बच्चे बीमार
किचन सील ।

बैठी इन्क्वारी
बदला ठेकेदार
किचन चालू
बदले नहीं हाल
वही चाल ढाल ।

फिर चालू मिड डे मील
फिर गिरेगी वो
फिर बच्चे बीमार
फिर लगेगी सील
वही खाल वही जाल ।

कमीशन देने में
जब भी होगी देरी
या हटेगा ध्यान
समझो एक छिपकली
फिर हो गई कुर्बान ।

पूरन चन्द्र काण्डपाल
03.11.2018

Kanfusi : कनफुसी

मीठी मीठी - 178 : कनफुसी

पढ़ी -लेखी हुणि झुसराम
अनपढ़ हूँ झूसी कौनीं,
घरोंफना मुसीभ्याकुड़ हूँ
क्वे भुरमुसी कौनीं,
जो कान भरणियाँ हूँ गौं में
हाम चुकुलखोर कौंछी,
शहर में यूं शातिरों हूँ
कनफुसी कौनीं ।

पूरन चन्द्र काण्डपाल
02.11.2018