Wednesday, 5 September 2018

Shikshk diwas sammaan : शिक्षक दिवस सम्मान

मीठी मीठी - 156 : शिक्षक दिवस पर सम्मान

     बेई 5 सितंबर 2018 शिक्षक दिवसक मौक पर  नई दिल्ली स्थित कंस्टीट्यूसन क्लबक स्पीकर हाल में ननां कैं कुमाउनी- गढ़वाली सिखूंणी अध्यापकों कैं दिल्ली पैरामेडिकल ऐंड मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट (DPMI) द्वारा उत्तराखंड लोकभाषा साहित्य मंच दिल्लीक सानिध्य में सम्मानित करीगो । य मौक पर वरिष्ठ लोकगायक-कवि श्री नरेंद्र सिंह नेगी, श्री हीरा सिंह राणा, डी आई जी बीएसफ श्री टोलिया, हिंदी-संस्कृत अकादमीक सचिव डॉ जीतराम भट्ट, पूर्व आईएस कृष्ण आर्य, अणुव्रतक श्री रमेश काण्डपाल और डीपीएमआई क निदेशक डॉ विनोद बछेती ज्यू मुख्य वक्ता छी । कएक गणमान्य लोगोंक कि मौजूदगी में करीब छै दर्जन भाषा सिख़ूणी शिक्षकों और समाजसेवियों कैं सम्मानित करीगो । यूं लोगों ल दिल्ली एनसीआर में करीब द्वि दर्जन जगां पर ननां कैं 20 मई बटि 5 अगस्त 2018 तकाक 12 इतवारों हुणि हमरि भाषा सिखै ।

       हम उम्मीद करनू कि हमरि भाषाओं कैं  देर-सबेर संविधान की आठवीं अनुसूची में जाग जरुर मिललि । दिल्ली में हमरि भाषाओं कि अकादमी बनण कि आब पुरि उम्मीद हैगे जैक लिजी लोकभाषा साहित्य मंच दिल्ली, डीपीएमआई और उत्तराखंड एकता मंच निरंतर प्रयासरत रौछ । सबै मित्रों हैं निवेदन छ कि आपणि मातृ भाषा कैं व्यवहार में धरनै यकैं सिंचित करते रौण चैंछ किलै कि भाषाक गुम हुण पर संस्कृति और सभ्यता लै गुम है जींछ और मनखियेकि पछ्याण लै मेटी जींछ । हम दुनिय कि क्वे लै भाषा सिखूँ पर आपणि इज और आपणि मातृभाषा कैं हमूल नि भुलाण चैन । डीपीएमआई ,उत्तराखंड लोकभाषा साहित्य मंच दिल्ली, उत्तराखंड एकता मंच दिल्ली और अन्य सबै सहयोगियों क य भाषा उत्सव कैं सफल बनूणक लिजी आभार ।

पूरन चन्द्र काण्डपाल
06.09.2018

Tuesday, 4 September 2018

Tearchers day:शिक्षक दिवस

मीठी मीठी - 154 : शिक्षक दिवस की बधाई

      आज 5 सितंबर, पूर्व राष्ट्रपति डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी का जन्मदिन देश में  शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है । उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि । उनके बारे में पुस्तक "लगुल" से एक लघु लेख यहां उधृत है ।

      कलम- कमेट से पाटी पर आरंभिक अक्षरबोध कराने वाले शिक्षकों से लेकर आज तक पढ़ाने वाले, ज्ञान देने वाले, हमारा मार्ग दर्शन करने वाले तथा हमारे दुर्गुणों को बताने वाले सभी शिक्षकों को प्रणाम और शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं ।

"शिक्षा का रामबाण
है शिक्षक के हाथ,
भावी पीढ़ी का निर्माण
है शिक्षक के हाथ ।"

पूरन चंद्र काण्डपाल
05 सितंबर 2018

Bakhat ki balai : बखत कि बलै

खरी खरी-302 : बखत कि बलै ल्युल

पार्टी में नईं -नईं
ब्या वलां पर
सबूं कि नजर लैरीं,
एक्कै प्लेटम
ब्योलि-ब्यौल
दगड़ - दगड़ै फैरीं,
ब्योलि चमच ल
पच -पच पचकूं रै,
ब्यौल प्लेट
पकड़िए रैगो,
कस जमान देखौ
कस जमान ऐगो,
बखता त्यरि बलै ल्युल
'बुधि दा' कैगो ।

आब जन्मदिन लै
नाईं तरीकैल मनूंरीं,
केका माथ बै
मोमबत्ती जगूंरीं,
तीन आंखर अंग्रेजी
सबूं ल सिखि है,
अंग्रेजी में कूंरीं
हैप्पी बर डे,
जैल दी जगूण चैंछी
उ निमूं फैगो,
कस जमान देखौ
कस जमान ऐगो,
बखता त्येरि बलै ल्युल
'बुधि दा' कैगो ।

पूरन चन्द्र काण्डपाल
04.09.2018

Sunday, 2 September 2018

Geeta kee baat : गीता की बात

खरी खरी - 301: 'गीता' की बात भी हो श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर

      कुछ लोगों ने कल  (2 सितंबर) और कुछ आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मना रहे हैं । इस महोत्सव में श्रीकृष्ण के कर्म संदेश की चर्चा प्रमुखता से होनी चाहिए थी जो नहीं हुई । 'गीता' के कर्म संदेश का मूल अर्थ यह नहीं है कि बिना फल या परिणाम का लक्ष्य बनाये हम कर्म करते जाएं । "कर्मण्डे वा....कर्मणी"  का भाव यह है कि हम कर्म करें और जो भी प्रतिफल मिले उसकी चिंता न करते हुए उसे स्वीकार करें । हम जो भी कर्म करेंगे उसका फल हमें भोगना पड़ेगा । इसलिए कर्म करने से पहले सोच लेना उचित होगा । खैर लोग अपने अपने हिसाब से व्याख्या करते हैं ।

        श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर आजकल ज्ञान की बात से अधिक मनोरंजन पर ध्यान दिया जाता है । एक बानगी देखिए - एक फिल्मी गीत है, 'हम-तुम चोरी से , बंधे एक डोरी से ...।' इस गीत पर जन्माष्टमी पर पैरोडी बना दी गई, 'बृज की छोरी से, राधिका गोरी से, मैया करा दे मेरा ब्याह...।' तीन कलाकार- एक राधा, दूसरा कृष्ण और तीसरा यसोदा ।  गीत में कृष्ण बना कलाकार यसोदा के कलाकार से कह रहा है और राधा बना कलाकार नाच रहा है तथा लोग सिटी बजा कर इस भौंडे नृत्य-गान में मस्त हैं । कृष्ण की पत्नी रुकमणी जी थी । राधा तो कृष्ण की अनन्य भक्त थी फिर यह फिल्मी पैरोडी पर लोगों ने आपत्ति क्यों नहीं की ? यह क्या हो रहा है, क्या संदेश जा रहा है, किसी को कोई मतलब नहीं ? पैरोडी गाने वाले के साथ गुटका मुंह में उड़ेले कलाकार वाद्य बजा रहे हैं औऱ श्रीकृष्ण का जन्मदिन मनाया जा रहा है ।

      काश ! मंच से श्रीकृष्ण के बहाने नशामुक्ति और स्वच्छता अभियान का भी उद्घोष बीच -बीच में होता तो कोई तो बदलता । कर्म - संस्कृति और संस्कारों की बात होती तो समाज में कुछ परिवर्तन आता । लकीर के फकीर बनकर हमने उत्सव जरूर मनाया, पैरोडियाँ सुनी, रासलीला देखी, माखन चोरी मंचित हुई परन्तु गीता के 18 अध्यायों के 700 श्लोकों में से एक की भी चर्चा नहीं हुई । कहीं कहीं पर तो - "कन्हैया तेरो जन्मदिन ऐसो मनायो, कटिया डाल के बिजली ल्हीनी जगमग भवन बनायो " भी होता है ।

     गीता के प्रथम अध्याय के प्रथम श्लोक का प्रथम शब्द है "धर्म'' और अंतिम अध्याय के अंतिम श्लोक का अंतिम शब्द है "मम।" इन दोनों को जोड़ें तो शब्द बनता है "धर्ममम'' अर्थात मेरा धर्म है केवल 'कर्म', वह कर्म जो जनहित में हो, समाज हित में हो और देश हित में हो । योगेश्वर श्रीकृष्ण के इस संदेश का मंथन आज के परिवेश में नितांत आवश्यक है । श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की पुनः शुभकामनाएं ।

पूरन चन्द्र काण्डपाल
03.09.2018

Saturday, 1 September 2018

18th Asiyan games : 18वें एशियाई खेल

मीठी मीठी - 153 : 18वें एशियाई खेल जकार्ता

     18वें एशियाई खेल जकार्ता (इंडोनेशिया) में आज 2 सितंबर 2018 को समाप्त हो गए जिसमें 45 देशों के करीब 12000 खिलाड़ियों ने भाग लिया। इन खेलों में हमारे 804 खिलाड़ियों एवं सदस्यों ने  हिस्सेदारी निभाई । पदक तालिका में चीन, जापान और दक्षिण कोरिया क्रमशः 289, 204 और 176 पदकों के साथ प्रथम, द्वितीय और तृतीय रहे । भारत 69 पदकों (15+24+30, G+S+B) के साथ 8वें स्थान पर रहा । हमने 2010 में 65  (14, 17, 34,)और 2014 में 57 (11, 9, 37) पदक जीते थे ।

      हम पदक तालिका में चीन से 4 गुना पीछे हैं । सोने के तमगों में तो हम चीन से 9 गुना पीछे हैं । चीन ने कुल 289 (132, 93, 65 ) पदक जीते जबकि हमारी झोली में  मात्र 69 पदक आये । भारत और चीन जनसंख्या में लगभग अब बराबर है । दोनों ही शीतोष्ण कटिबद्ध के देश हैं । हमें इस बात का चिंतन करना होगा कि हम खेलों में इतने पीछे क्यों हैं ?  समय पर खेलों की तैयारी, खिलाड़ियों की उचित देखभाल, खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा और खेलों से राजनीति को दूर रखकर हम चीन, जापान और दक्षिण कोरिया को टक्कर दे सकते हैं । सभी पदक विजेताओं और प्रतिस्पर्धा में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को बहुत बहुत शुभकामनाएं और बधाई ।

पूरन चन्द्र काण्डपाल
02.09.2018

Chup kyon ? : चुप क्यों ?

खरी खरी - 300 :  चुप क्यों ?

जब मेरे आंखों के सामने
कभी किसी कन्या भ्रूण का
लहू गिरता है,
किसी नारी का दामन लुटता है,
रेल का डिब्बा सरेआम फुकता है,
किसी वृक्ष पर कुल्हाड़ा चुभता है,
मैं चुप क्यों रहता हूं ?
मुझे नहीं पता ।

जब पड़ोसी का घर लुटता है,
जब कोई बेकसूर कुटता है,
जब किसी स्त्री पर हाथ उठता है,
जब सत्य पर कहर टूटता है,
मैं चुप क्यों रहता हूं ?
मुझे नहीं पता ।

जब राष्ट्र की संपत्ति लुटती है,
प्रदूषण -धार नदी में घुसती है,
किसी असहाय की सांस घुटती है,
जब भ्रष्टों की जमात जुटती है,
मैं चुप क्यों रहता हूं ?
मुझे नहीं पता ।

शायद मैं हालात से डर जाता हूं,
मरने से पहले मर जाता हूं,
कर्तव्य पथ पर ठहर जाता हूं,
फर्ज से पीठ कर जाता हूं ।

अगर मैं जिंदा होता,
अपना मुंह अवश्य खोलता,
चिल्लाकर लोगों को बुलाता,
मिलकर उल्लुओं को भगाता ।

शायद मेरी संवेदना मर गई है,
मुझ से किनारा कर गई है,
मेरा खून पानी हो गया है,
मेरा जमीर बिलकुल सो गया है ।

अब कौन मुझे जगायेगा?
कौन उल्लुओं को भगाएगा ?
मैं मुर्दा नहीं, जिन्दा हूं
यह मुझे कौन बताएगा ?

यह सब मुझे ही करना होगा,
वतन परस्तों से सीखना होगा,
भलेही कोई साथ न दे,
मुझे अकेले ही चलना होगा ।
मुझे अकेले ही चलना होगा ।।

पूरन चन्द्र काण्डपाल
01.09.2018

Andhvishwas : अंधविश्वास

खरी खरी - 299 : कौन निकाले चंगुल से ?

      उत्तराखंड में नशे और अंधविश्वास की जड़ बहुत गहरी हैं जिन्हें तथाकथित गुरु, सद्गुरु,  बाबा, पण्डे, पंडित, ओझा, तांत्रिक, गणतुवे, जगरिये, डंगरिये, नेता आदि सींचते रहते हैं । डर से ग्रसित पढे -लिखे भी इनके गुलाम बन गए हैं । मसमसाते जरूर हैं पर गिच खोलने का दम नहीं भर पाते । ऐसे में उत्तराखंड को इन अंधविश्वासियों और नशेड़ियों के चंगुल से कौन निकाले ?

"पढ़े लिखे अंधविश्वासी बन गए,
लेकर डिग्री ढेर,
अंधविश्वास के मकड़जाल में
फसते न लगती देर,
पण्डे ओझा गुणी तांत्रिक
बन गए भगवान्,
आँखमूंद विश्वास करे जग
त्याग तथ्य-विज्ञान ।"

पूरन चन्द्र काण्डपाल
31.08.2018