Wednesday, 6 June 2018

Insaniyat thuli चीज : इंसानियत सबूं है ठुलि चीज

इंसानियत सबूं है ठुलि चीज

     जो लोग समाज क सौहार्द कैं बिगाड़नीं ऊँ कबीर, रहीम, बिहारी, रसखान आदि कालजयी कवियों कैं नि जाणन या जाणी बेर लै अनजान बनी रौनी | यूं महामनीषियों ल मनखी कैं इंसान बनूण क लिजी, समाज कैं अंधविश्वास है भ्यार निकाउण क लिजी और सामाजिक सौहार्द कैं बनाइये धरण क लिजी अथाह कोशिश करी | हमार पुरखों ल स्वतंत्रता संग्राम लै मिलि बेर लड़ौ | महत्वाकांक्षा क अउरों ल सामाजिक सौहार्द कैं बिगाड़ि दे  और य अउर कैं हमुकैं गुलाम बनूणी जाते- जाते मजबूती दि बेर देश कैं  खंडित करि गईं | य खंडन ल मजहब कि दिवाल कैं मजबूती मिली और कुछ असामाजिक तत्वों ल नफरत कि नर्सरी में अविश्वासा क डाव जमै बेर उनुकैं जां- तां रोपण शुरू करि दे | वीक ज्ये लै परिणाम हौछ उ बातै कि चर्चा करण कि जरवत न्हैति क्यलै कि सबकुछ हाम आये दिन देखैं रयूं |


     हमार समाज में सौहार्द कैं पाणि दिणी लै मौजूद छीं | कुछ दिन पैली कानपुर में गंगा नदी क बैराज पर नौ लौंड घूमूहैं गईं | उनुमें बै एक झणि सेल्फी ल्हीणा क चक्कर में रड़ि बेर गंगा नदी में घुरी गो और डूबण फैगोय | उकैं बचूण क लिजी से एक क बाद एक सबै दगड़ी नदी में कूदि गाय और डूबैं फै गाय | डूबणियां क शोर सुणि बेर नजीकै रेत में भैटी एक लौंड उनुकैं बचूहैं नदी में कुदि गो | य ई बीच कुछ नाविकों ल तीन लौंड ज्यौनै  भ्यार निकाईं पर उ लौंड लै उनुकैं बचूण क चक्कर में नदी में डुबि बेर आपणि ज्यान गवै भैटॉ | बाद में गोताखोरों ल सात मुर्द भ्यार निकाईं | आपणी ज्यान है हात धुणी रेत में भैटी य लौंड यूं नौ लौंडों कैं नि पछ्याण छी फिर लै उ इनुकैं बचूण क लिजी नदी में कुदि पड़ौ और उनूं कैं बचूण क प्रयास में डुबि गो | बाद में पत्त चलौ कि वीक नाम मक़सूद अहमद छी जो एमएससी में अध्ययनरत छात्र छी |


     जब मक़सूद अहमद गंगा में नौ लौंडों कैं बचूहैं कुद हुनल उ टैम वीक मन में हिन्दू- मुसलमान कि बात नि ऐ हुनलि | उ एक मुस्लिम लौंड छी जैकैं ऊँ नौ लौंडों क बार में क्ये लै पत्त नि छी | बखत कि मांग पर उ  इंसानियत क नात ल नौ इंसानों कैं बचूण क लिजी नदी में कुदौ और खुद पाणि में समै गो | बात -बात में हिन्दू- मुस्लिम कौणियां कैं य बात समझण चैंछ कि हम सबू है पैली इंसान छ्यूं, बाद में कुछ और | मक़सूद क दगाड़ दुसार छै लौंडों क डुबण भौत दुखदायी छ | बाद में पत्त चलौ कि सबै छै मृतक लौंड हिन्दू सम्प्रदाय क छी | एक सेल्फी ल सात बेशकीमती ज्यानों क कहणात करि दी | लोगों ल चौकन्न है बेर सेल्फी ल्हीण चैंछ | अच्याल कएक लोगों कि जिन्दगी सेल्फी क चक्कर में ख़तम हैगे |


     यसिक्ये 18 नवम्बर 1997 हुणि रत्ते साव सात बजी इस्कूली नना कैं ल्ही जाणी एक बस यमुना नदी पर बनी वजीराबाद पुल कि रेलिंग टोड़ि बेर  यमुना नदी में घुरी ग्येइ | य बस में 113 नान और 2 अध्यापक छी | य  दुर्घटना में 28 नान डुबि बेर ख़तम है गाय और 67 नना कैं अस्पताल में भर्ती करी गोय | यूं नना कैं जगतपुरी दिल्ली निवासी गोताखोर अब्दुल सत्तार खान ल पाणि में बै भ्यार निकावौ | सत्तार ल लगातार 5 घंटे तक ठंड पाणि में डुबकि लगै और 50 नना कैं बचा और मरी नना क शव भ्यार निकाईं | यतू मेहनत क साथ 50 नना क जिन्दगी बचूण क बाद सत्तार ल कौ, “अल्लाह ल हुनर दि रौछी तबै यूं नान बचाईं | मीकैं 28 नना कैं नि बचै सकण क भौत मलाल छ |” सत्तार मुसलमान छी पर उ ज्यौन बचाई नना क लिजी एक “इंसान ना फ़रिश्ता बनि बेर आछ”, यूं शब्द ऊँ अभिभावकों क छी जो आपण ज्यौंन नना दगै अंग्वाव किटि बेर कौं रौछी |  काश ! हम सबूं है पैली  एक भाल इंसान बनि बेर सामाजिक सौहार्द कैं सिंचण क काम करि सकना !


पूरन चन्द्र काण्डपाल 

07.06.2018


 


 


 

Monday, 4 June 2018

Sangharsh viram galat : संघर्ष विराम गलत

खरी खरी - 250 : संघर्ष विराम गलत

     जब पाकिस्तान भारत से आमने-सामने की लड़ाई में हारते चला गया तो उसने 1989 से जम्मू-कश्मीर में छद्म युद्ध शुरू कर दिया । छद्म युद्ध का भी हमारी सेना और अन्य सुरक्षा बलों ने डटकर मुकाबला किया । जब छद्म युध्द से उसे उचित सफलता नहीं मिली तो 2007 से उसने कश्मीर में पत्थरबाजों को सक्रिय कर दिया । पत्थरबाजों में वे युवा हैं जो शिक्षा और रोजगार से वंचित हैं । पाकिस्तान ने इन युवाओं को पत्थरबाजी के लिए मजदूरी देनी आरम्भ कर दी जो विगत 11 वर्षों से जारी है ।

     इस बीच रमजान का महीना आया और सरकार ने एकतरफा संघर्ष विराम तो घोषित कर दिया परन्तु इसका असर पत्थरबाजों पर नहीं पड़ा और शांति बहाली की कोशिश शिथिल पड़ गई । इधर हमारे सैनिकों की लगातार शहीदी हो रही है । दो दिन पहले ही तिरंगे पर लिपट कर हमारे दो शहीदों के पार्थिव शरीर उनके स्वजनों के पास पहुँचे हैं ।

     कश्मीर में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद थम नहीं रहा है । हमारी अमन बहाली की कोशिशें बेकार गईं हैं । अतः सरकार को अब शीघ्र ही संघर्ष विराम की घोषणा को निरस्त कर देना चाहिए और आतंकवादियों को उन्हीं की भाषा में जबाब देना चाहिए जिससे 'ओप्रेसन आल आउट' को बल मिले औऱ जम्मू,-कश्मीर से आतंकवाद का जड़ से सफाया हो ।

पूरन चन्द्र काण्डपाल
05.06.2018

Paryaawaran ,: पर्यावरण को तू सजा

मीठी मीठी - 119 : पर्यावरण को तू सजा 

होली दीवाली दशहरा, 
पितृ पक्ष नवरात्री,
ईद क्रिसमस बिहू पोंगल
गुरुपुरब लोहड़ी,
वृक्ष रोपित एक कर 
पर्यावरण को तू सजा,
हरित भूमि बनी रहे
जल जंगल जमीन बचा ।

      सभी मित्रों को आज 5 जून पर्यावरण दिवस  की शुभकामना । सोसल मीडिया में किसी भगवान या देवी की मूर्ति पोस्ट करने से अच्छा है हम कम से कम एक पेड़ अवसर देख कर जरूर रोपें और उसका संरक्षण करें । धरती मां का श्रृंगार करें । धरती को प्लास्टिक से बचाएं ।इससे बड़ी धरती मां की पूजा और क्या हो सकती है । पर्यावरण बचेगा तभी हमारा जीवन बचेगा ।

पूरन चन्द्र काण्डपाल
05.06.2018

Taundoomal : तौंदूमल का फैटी लीवर

खरी खरी - 249 : तौंदूमल का फैटी लीवर

     आम तौर पर हमारे समाज में तौंदूमल उस आदमी को कहते हैं जिसका पेट निकला हो या बड़ा दिखाई दे । इसी तरह मोटापा ग्रसित महिला (गर्भवती नहीं) को उसकी सहेलियाँ मोटी भैंस कहतीं हैं । ऐसे ही एक तौंदूमल पति से पत्नी बोली-

पत्नी : कितने मोटे हो गए  हो?
पति : तुम भी तो मोटी हो गई हो ।
पत्नी: मैं तो माँ बनने वाली हूँ ।
पति : मैं भी तो पिता बनने वाला हूँ ।

    सच्चाई यह है कि तोंदूमल जी को अपना पेट नजर नहीं आया और न इसे उन्होंने कभी गंभीरता से लिया । किसी भी व्यक्ति का पेट बड़ना बहुत खतरनाक है । इसके कई कारणों में एक कारण है फैटी लीवर अर्थात लीवर (कलेजा) पर फैट (बसा) की पर्त चढ़ जाना । लीवर का मुख्य काम है पित्त के साथ मिलकर बसा का पाचन करना और इसे रक्त-संचार से शरीर की मांशपेशियों तक पहुँचाना । यदि लीवर में बसा चढ़ गया तो लीवर के सभी कार्य अवरुद्ध हो जाएंगे । फैटी लीवर होने के कई कारण हैं जैसे शराब की अधिकता, बसायुक्त अधिक भोजन का उपभोग, व्यायाम -सैर की कमी, भोजन अनुशासन की कमी आदि ।

     अतः स्वस्थ रहना है तो उक्त बातों का ध्यान रखना पड़ेगा अन्यथा तौंदूमल जी एक न एक दिन अपने नाजुक कलेजे को जख्म देते हुए दिल और गुर्दे की बीमारी के शिकार भी हो सकते हैं । स्त्री-पुरुष या बच्चे सभी को मोटापे से स्वयं को बचाने का एकमात्र उपाय है अपने पर नजर रखना, अपना वजन देखते रहना, कमर की मोटाई नापते रहना । यदि आप ऐसा कर पाए तो जिंदगी का सुहाना सफर आपको गुदगुदाते रहेगा । यह सब हम कर सकते हैं क्योंकि इसके लिए हम किसी पर आश्रित नहीं हैं । तो उठिए और एकबार आईने में अपने को देखिए । यदि प्रश्न खड़ा होगा तो उत्तर ढूंढने को आप स्वयं लाचार होंगे यदि मोटापे की फिक्र होगी तो ।

पूरन चन्द्र काण्डपाल
04.06.2018

Sunday, 3 June 2018

Patni ki shadi : पत्नी की शादी

मीठी मीठी - 118 : पत्नी की शादी

     दूसरे को खुशी देने के लिए खुद की खुशी को कुर्बान करना हमने सिनेमा में कई बार देखा है । जमीन में ऐसा कम ही देखने को मिलता है । हमने ऐसे कई पति देखें हैं जो सोचते हैं कि बढ़ती उम्र में पत्नी उनसे पहले निकल जाए तो अच्छा ताकि उन्हें यह संताप नहीं रहे कि उम्र के पड़ाव पर पति के बिना कहीं पत्नी की दुर्गति न हो जाय । चिंता से कुछ होना-जाना नहीं है । मृत्यु तो अपने समय पर ही आएगी ।

     एक जवान नवविवाहित पति ने जिंदादिली का एक नायाब नमूना हाल ही में पेश किया । कानपुर देहात क्षेत्र में एक युवा की शादी हुई । युवा पति को महसूस हुआ कि उसकी पत्नी खुश नहीं है । पति द्वारा नवविवाहिता पत्नी से पूछने पर पता चला कि पत्नी किसी अन्य लड़के से प्यार करती है और उसके बिना रह नहीं सकती । अभिभावकों ने उसकी शादी वर्तमान पति से उसकी इच्छा के विपरीत कर दी ।

     युवक को पत्नी की बात पर संदेह हुआ फिर भी उसने इस मामले की स्वयं जांच की । इस युवक ने पत्नी की बात को सत्य पाया औऱ काफी मशक्कत के बाद अपने घर वालों को राजी कर लिया कि वह अपनी पत्नी की शादी उसके प्रेमी से कर देगा । उसने स्थानीय पार्षद के सहयोग से सार्वजनिक तौर पर एक मंदिर में अपनी पत्नी की शादी उस लड़के से कर दी और खुशी खुशी अपनी पत्नी को उसकी खुशी के लिए विदा कर दिया । क्षेत्र के लोगों ने भी इस आयोजन में भागीदारी दी ।

     काम कठिन था । बड़ी मुश्किल से तो इस युवक की शादी हुई थी । खर्च भी हुआ था । अंत में कहानी कुछ इस तरह मोड़ खा गई कि उसके दिल में एक ऐसा जख्म कर गई जिस जख्म के  दर्द की कसक उसने अपने चेहरे पर नहीं आने दी । जिंदादिल तो निकला यह युवक । दुआ करते हैं कि इस युवक की शादी की शहनाई जल्दी गूंजे ।

पूरन चन्द्र काण्डपाल
03.06.2018

Pani bachao : पानी बचाओ

खरी खरी - 24 8 : पानी बचाओ-बिन पानी सब सून

     गर्मी सातवें आसमान पर है । आज भी दुनिया के डेड़ अरब से अधिक लोगों को पीने का शुद्ध पानी नहीं मिल रहा है । हम कंक्रीट के जंगल बनाते जा रहे हैं । नदी, तालाब, बवाड़ी, चश्मे, कुएं पहले ही रसायनों की भेंट चढ़ चुके हैं या स्वतः लुप्त हो चुके हैं । वर्षा जल को हम संरक्षित नहीं कर पा रहे हैं । जमीन के अंदर के पानी का स्तर गिर रहा है । एक टन अनाज उत्पादन के लिए एक हजार टन पानी की आवश्यकता होती है । हमारे देश में पहले हजारों नदियां थीं जो अब सैकड़ों में रह गईं हैं । पानी की मांग अधिक है जिसकी पूर्ति हो नहीं सकती ।

      एक ही रास्ता है कि हम पानी की उपयोगिता को समझते हुए पानी बचाएं अर्थात कम पानी प्रयोग करें और पानी की बरबादी न होने दें । 'बूंद बूंद से घड़ा भरता है ' यह हम जानते हुए भी अपने घर में कपड़े धोने, नहाने, बर्तन धोने, गाड़ी धोने में बहुत पानी बरबाद करते हैं । दाड़ी बनाते समय और दांत ब्रश करते समय भी हम नल खुला छोड़ देते हैं ।  कल्पना करिये जब पानी नहीं रहेगा तो हम जीवित नहीं रह सकेंगे । इसलिए 'जल ही जीवन है' वाली बात को गंभीरता से मंथन करें और अपनी भावी पीढ़ी के लिए भी कुछ जल छोड़ जाएं । रहीम जी ने हमें बहुत पहले चेताया है- 

रहीमन पानी राखिये
बिन पानी सब सून,
पानी गए न ऊबरे
मोती मानुष चून ।

पूरन चन्द्र काण्डपाल
02.06.2018

Pareeks parinaam: परीक्षा परिणाम

खरी खरी - 247 : परीक्षा परिणाम - कहीं खुशी कहीं गम

     सीबीएसई में 12वीं औऱ 10वीं के परिणाम आते ही कहीं हर्सोल्लास हुआ तो कहीं निराशा भी छा गई । इस साल इन परीक्षाओं के टॉपरों ने 499/500  (12वीं में एक और 10वीं में चार टॉपरों ने यह चमत्कार किया ) अंक प्राप्त कर परचम को अधिक ऊंचाई तक फहरा दिया । द्वितीय और तृतीय वाले भी 498 औऱ 497 के साथ बड़ी निकटता बनाये रहे । 12वीं में तो 7 विद्यार्थियों ने 497 के अंक के साथ तृतीय स्थान को छुआ । लड़कियों ने अपनी श्रेष्ठता इस साल भी बनाये रखी । 12वीं में 83.01% और 10वीं में 86.7% विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए ।

       परीक्षा परिणाम का दूसरा पहलू हमें निराश भी करता है । जो बच्चे फेल हुए उनमें से कुछ ने अनुचित कदम भी उठाने का प्रयास किया और 10वीं के दो विद्यार्थी इस निराशा में अपनी जान दे बैठे ।  इनमें एक के 70% तो दूसरे के 59% अंक बताए जाते हैं । असफल विद्यार्थियों को निराश नहीं होना चाहिए और पुनः परिश्रम के साथ पढ़ाई में जुट जाना चाहिए । आत्महत्या जैसे कदम उठाना एकदम अनुचित है जो किसी भी हालत में सही नहीं ठहराया जा सकता ।

     हमारे देश में शिक्षा की हालत ठीक नहीं है । एक समाचार के अनुसार देश में करीब 18 करोड़ बच्चे आरम्भ में स्कूल जाते हैं और 12वीं तक मात्र डेड़ करोड़ बच्चे ही पहुंच पाते हैं । बाकी 16.5 करोड़ बच्चे कहां गए ? यह संख्या अकुशल मजदूरों के समूह में जाकर जीवनपर्यंत धक्के खाते रहती है । सर्व शिक्षा अभियान के बावजूद हमारा शिक्षा कार्यक्रम सही दिशा नहीं पकड़ पाया अन्यथा बच्चों की इतनी बड़ी संख्या अकुशल मजदूर नहीं बनती ।

      नोबेल पुरस्कृत, बचपन बचाओ आंदोलन के प्रणेता कैलाश सत्यार्थी जी के अनुसार यदि सरकार के साथ -साथ हमारे मंदिर- मस्जिद- चर्च तथा अन्य पूजालय भी बच्चों की शिक्षा के बारे में  गंभीरता से सोचते तो एक सामाजिक परिवर्तन के साथ शिक्षा का उत्तम फैलाव होता और अकुशल मजदूरों की संख्या इतनी नहीं होती । हमें अपने और अपने समाज के बच्चों को आरम्भ से ही शिक्षा की ओर प्रेरित करना चाहिए तभी सम्पूर्ण देश उन्नति करेगा । हमारे इर्द- गिर्द अनपढ़, नशेड़ी, अशिष्ट, दुष्कर्मी, चोर, जेबकतरे और असामाजिकतत्व बन गए अधिकांश बच्चे स्कूल ड्रॉपआउट (शिक्षा छोड़े) ही होते हैं । इस सामाजिक समस्या पर हमें चिंतन तो करना ही होगा ।

पूरन चन्द्र काण्डपाल
01.06.2018