Thursday, 7 September 2017

दिल्ली बै चिठ्ठी ऐ रै

पहाड़ में नश क जोर

          पहाड़ कि जवानी में नशा(शराब,  अत्तर, गांज, बीड़ी, सिगरट, सुडति, गुट्क, तमाकु भांग ) भौत भतेर तक घुसिगो । चनरदा  जवान लौंडों में नश कि प्रवृति देखि दुखीं है बेर बतूं रईं,  "क्वे जमान  छी जब पहाड़ क पठ्ठों पर गर्व हुछीं ।  पहाड़ क पठ्ठ लुव क सांबोव कें लतकै  दिछी ,  घट क बार आऊ क पाथर कें द्वि पठ्ठ सड़क बटि गाड़ पुजै  दिछी, बरयात में घ्वड़ क टांगों कें मोड़ी बेर बकरी घोठ घुसै दिछी ।

     आज नश ल यौ सब  ख़तम करि है ।  हालों में कोटद्वार में एक भर्ती रैली हैछ । उत्तराखंड  क हजारों  लौंडों ल य रैली में भाग ल्हेछ ।  कुछ हजार लौंड पैलि दौड़ में फेल है  गईं । दौड़ क पैल चक्कर में उनर दम फुलि गो,  ऊँ हाफंण  फै गईं और पैल चरण  में अनफिट है बेर ज्वताई जास घर लौटि आईं । सेना क अधिकारियों ल यैक  मुख्य  कारण लौंडों  में नश कि प्रवृति बता । कुछ लोग कूं रईं कि लौंडों में शारीरिक  श्रम  करण कि न इच्छा और न कुबत । कुछ साल पैली तक पहाड़ा क लौंड इस्कूल-कालेज जणा लिजी मीलों पैदल हिटछी । 

      आब लौंड-मौड आराम पसंद जिन्दगी बितै बेर  सेना  क  लिजी अनफिट है गईं । उत्तराखंड में  कुमाऊं रेजिमेंट और गढ़वाल राइफल्स  द्वि मुख्य इन्फैंट्री पलटन छीं ।  द्विये पलटन आपणी बहादुरी पऔर देशभक्ति क लिजी प्रसिद्ध छीं । स्वतंत्रता क बाद कुमाऊं रेजिमेंट ल २ परमवीर चक्र और ४ अशोक चक्र  जितीं जबकि गढ़वाल राइफल्स ल एक अशोक चक्र जितौ ।  यूं द्विये पलटनों ल बहादुरी  क  लिजी मिलणी अन्य पदकों क ढेर लगा। 

      आज रामलिल में देखि राजा जनक  क ऊँ बात याद औं रईं जब उनूल भरी दरवार में धनुष निटूटण पर कौछ, 'आज  य  दुनिय वीरों है खाली हैगे, धनुष नि टूटण पर सीता अणब्यवाइये रैगे । 'उत्तराखंड क लौंडों कें बतूंण  चानू कि नाश करणी  नश है आपूं कें दूर धरो, रोज दौड़ण   क अभ्यास करो और अघिल भर्ती क इन्तजार करो ।  निराश हुण कि जरवत  बिलकुल  न्हेति ।"

पूरन चन्द्र काण्डपाल
07.09.2017

Wednesday, 6 September 2017

Chauthe stambh kee hatya : चसुते स्तंभ की हत्या

खरी खरी - 78 : प्रजातंत्र के चौथे स्तंभ की हत्या

     5 सितंबर 2017 को जब देश में शिक्षक दिवस मनाया जा रहा था तब 55 वर्ष की एक वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की बंगलुरू में गोली मार कर हत्या कर दी गई । गौरी लंकेश साम्प्रदायिकता, अंधविश्वास, रुढ़िवाद और अराजकता के विरोध में लिखती थी । इस हत्या से सच को दबाने का कुटिल षड्यंत्र किया गया है । यह संविधान प्रदत स्वतंत्र विचार प्रकट करने के अधिकार की हत्या है । किसी से असहमत होने का अधिकार भी भी हमें संविधान प्रदत है । यह अत्यंत दुखद है कि अब तक 66 RTI कार्यकर्ता और 1992 के बाद 27 पत्रकार सच को सामने लाने के कारण मारे जा चुके हैं ।

      गौरी लंकेश की हत्या भी उसी तरह की गई जैसे 20 अगस्त 2013 को नरेंद्र दाभोलकर, 20 फरवरी 2015 को गोविंद पंसारे और 30 लगस्ट 2015 कि एम एम कालबुर्गी की हत्या की गई थी । ये तीनों भी अन्धविश्ववास और पौंगापंथी का विरोध करते थे, प्रेस की स्वतंत्रता और विचार प्रकट करने की आजादी की बात करते थे तथा असहिष्णुता और साम्प्रदायिकता का विरोध करते थे । कत्ल इसलिए हुआ कि सच सामने न आये ।हत्यारों को यह समझना पड़ेगा कि किसी की हत्या से उस विचार की मृत्यु नहीं होती जिसके लिए वह जिंदा रहा । सरकार को इन हत्यारों को न्याय के सम्मुख शीघ्र पेश करना चाहिए ।

पूरन चन्द्र काण्डपाल
07.09.2017

Sammaan : शिक्षक दिवस सम्मान

मीठी मीठी - 29 : शिक्षक दिवस पर सम्मान

     कल 5 सितंबर 2017 शिक्षक दिवस के अवसर पर  नई दिल्ली स्थित कंस्टीट्यूसन क्लब के स्पीकर हाल में बच्चों को कुमाउनी- गढ़वाली सिखाने वाले अध्यापकों को दिल्ली पैरामेडिकल ऐंड मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट (DPMI) द्वारा उत्तराखंड लोकभाषा साहित्य मंच दिल्ली के सानिध्य में सम्मानित किया गया । इस अवसर पर पूर्वी दिल्ली की मेयर सुश्री नीमा भगत, DPMI के चेयरमैन डा विनोद बछेती सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे ।

       हम आशा करते हैं की हमारी भाषाओं को देर-सबेर संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान मिलेगा । दिल्ली में हमारी भाषाओं की अकादमी बनाने हेतु प्रयास जारी है जिसके लिए लोकभाषा साहित्य मंच दिल्ली निरंतर प्रयासरत है । सभी मित्रों से निवेदन है कि अपनी मातृ भाषा को व्यवहार में रखते हुए सिंचित करते रहें क्योंकि भाषा के लुप्त होने पर संस्कृति और सभ्यता भी लुप्त हो जाती है तथा मनुष्य की पहचान मिट जाती है । हम दुनिया की कोई भी भाषा सीखें परन्तु अपनी मां और अपनी मातृभाषा को न भूलें । चित्र भेजने के लिए ओपी जी का धन्यवाद ।

पूरन चन्द्र काण्डपाल
06.09.2017

Bya : नईं नईं ब्या

मीठी मीठी - 27 : नईं नईं ब्या

पार्टी में नईं -नईं 
ब्या वलां पर
सबूं कि नजर लैरीं,
एक्कै प्लेटम 
ब्योलि-ब्यौल
दगड़ - दगड़ै फैरीं,
ब्योलि चमच ल
पचकूं रै,
ब्यौल प्लेट 
पकड़िए रैगो,
कस जमान देखौ
कस जमान ऐगो,
बखता त्यरि बलै ल्युल
'बुधि दा' कैगो ।

पूरन चन्द्र काण्डपाल
04.09.2017

Tuesday, 5 September 2017

Shikshak diwas : शिक्षक दिवस

मीठी मीठी - 27 : शिक्षक दिवस की बधाई

      आज 5 सितंबर, पूर्व राष्ट्रपति, भारत रत्न, डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी का जन्मदिन देश में  शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है । उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि ।

      कलम- कमेट से पाटी पर आरंभिक अक्षरबोध कराने वाले शिक्षकों से लेकर आज तक पढ़ाने वाले, ज्ञान देने वाले, हमारा मार्ग दर्शन करने वाले तथा हमारे दुर्गुणों को बताने वाले सभी शिक्षकों को प्रणाम और शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं । 

"शिक्षा का रामबाण 
है शिक्षक के हाथ, 
भावी पीढ़ी का निर्माण
 है शिक्षक के हाथ ।"

पूरन चंद्र काण्डपाल
05 सितंबर 2017

Saturday, 2 September 2017

Deron ko chhoot kyon ? डेरों को खुल्ली छूट क्यों ?

खरी खरी - 77 : डेरों को खुल्ली छूट क्यों ?

     हाल के वर्षों में श्रद्धा-भक्ति और डेरे- आश्रमों पर दाग लगाने वाले बाबाओं ने श्रद्धालुओं को गहरी चोट पहुंचाई है, लज्जित किया है । सिरसा के डेरे में कई श्रद्धालुओं को डेरे ने धोखे से यह कह कर बुलाया कि 25 अगस्त को बाबा अपने हाथ से प्रसाद बाटेंगे । जब बाद में संगत को बाबा की करतूत का पता चला तो वे ठगे- ठगे से रह गए और उन्हें बहुत ग्लानि हुई कि वे इस पाखंडी को पहचान क्यों नहीं पाए, वे क्यों इस ढोंगी की अंधभक्ति में डूबे रहे ?

     अब समय आ गया है जब केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर मठ, आश्रम, डेरे, बड़े-बड़े मंदिर, मस्जिद, मदरसे, गुरुद्वारों, चर्च, मिशनरी पर निगरानी रखनी चाहिए कि वहां अंदरखाने  क्या होता है ? बताया जा रहा है कि अकेले हरयाणा में 350 डेरे हैं जिनमें दस डेरे रोहतक में हैं । खुफिया विभाग को इन डेरों में क्या गति-विधियां चल रही हैं उसका पता होना चाहिए । यदि इन पर निगरानी होती तो सिरसा कांड नहीं होता । अब तक जितने भी डेरों में कांड हुए हैं उनकी किसी को भनक तक नहीं लगी । समाचार है कि सिरसा डेरे में तो विगत 12 वर्ष से पुलिस वालों की ड्यूटी भी नहीं बदली गई । क्यों ? स्पष्ट है कि डेरे को कुछ भी करने की खुल्ली छूट थी ।

पूरन चन्द्र काण्डपाल

03.09.2017


Friday, 1 September 2017

Kaalburgi, dabholkar, pansare : कालबुर्गी, दाभोलकर, पंसारे

खरी खरी -76 : कालबुर्गी, दाभोलकर, पंसारे

     कुछ महीने पहले देश ने  लालकीले से एक आवाज सुनी थी कि अब हम ‘सपेंरों का देश’ नहीं हैं, फिर ये हत्यारे कौन हैं जो हमें फिर ‘सपेरों का देश’ बना रहे हैं ? ३० अगस्त २०१५ को बंगलुरु में ७७ वर्षीय कन्नड़ विद्वान् लेखक और प्रगतीशील विचारक एम् एम् कालबुर्गी को कुछ लोगों ने उनके घर में गोली मार दी | कालबुर्गी, नरेंदर दाभोलकर और गोविन्द पंसारे के बाद तीसरे  व्यक्ति हैं जो अंधविश्वास के विरोध में बोलते-लिखते थे और मार दिए गए | 

     103 पुस्तकों के लेखक प्रोफ़ेसर कालबुर्गी लोगों में मुर्दा शान्ति हटाकर तड़प पैदा करने, राष्ट्र प्रेम करने और अंधविश्वास का विरोध करने का प्रयास करते थे |  हमलावरों का अगला शिकार कौन होगा, यह कह नहीं सकते परन्तु यह अटूट सत्य है कि विचार मरता नहीं है, विचार ज़िंदा रहता है | मसमसाने से कुछ नहीं होगा | मुंह खोलें, अंधविश्वास का विरोध करें | यही कालबुर्गी, दाभोलकर और पंसारे को सच्ची श्रधांजलि होगी |

 पूरन चन्द्र काण्डपाल
02.09.2017